scorecardresearch
 

अखिलेश यादव अयोध्या गैंगरेप पर राजनीति भले करें लेकिन संवेदनशील होकर

हाथरस और उन्नाव से लेकर कठुआ गैंग-रेप तक की घटनाओं पर खूब राजनीति हुई है. ताजा मामला अयोध्या का है जिस पर पहले से ही राजनीतिक रस्साकशी चल रही है - और अब तो उपचुनाव भी नजदीक ही है.

Advertisement
X
अयोध्‍या गैंगरेप पर अखिलेश यादव पीड़िता के लिए न्‍याय मांगते हुए पार्टी नेता और मामले में आरोपी मोईद खान का बचाव भी कर रहे हैं.
अयोध्‍या गैंगरेप पर अखिलेश यादव पीड़िता के लिए न्‍याय मांगते हुए पार्टी नेता और मामले में आरोपी मोईद खान का बचाव भी कर रहे हैं.

अयोध्या गैंग-रेप भी हाथरस, उन्नाव और कठुआ जैसा ही जघन्य अपराध है. लिहाजा राजनीति भी वैसे ही जमकर हो रही है. यूपी में विधानसभा की 10 सीटों के लिए उपचुनाव होने हैं, जिसमें अयोध्या की मिल्कीपुर सीट भी शामिल है. मिल्कीपुर विधानसभा सीट फैजाबाद से अवधेश प्रसाद के लोकसभा पहुंच जाने की वजह से खाली हुई है, और इसीलिए उपचुनाव होना.

Advertisement

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही अवधेश प्रसाद अयोध्या के सांसद के रूप में राष्ट्रीय राजनीति में छाये हुए हैं. अवधेश प्रसाद को अखिलेश यादव जगह जगह खास महत्व देकर प्रोजक्ट कर रहे हैं - और यूपी में बीजेपी के खिलाफ अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं. 

मुश्किल ये खड़ी हो गई है कि अयोध्या गैंगरेप के आरोपी मोईद खान को बीजेपी अवधेश प्रसाद का सहयोगी करार देते हुए समाजवादी पार्टी का नेता होने का दावा किया है - अवधेश प्रसाद के साथ मोईद खान की तस्वीरें वायरल हो रही हैं. बीजेपी तो तभी से ताक में बैठी थी जब से अखिलेश यादव, अवधेश प्रसाद के हाथों में संविधान थमाकर संसद पहुंचे थे. और राहुल गांधी के साथ पहली कतार में बैठे हुए थे. मकसद तो यही प्रचारित करने का था कि बीजेपी अयोध्या हार गई है. 

Advertisement

मोईद खान को लेकर अब तो अवधेश प्रसाद ही निशाने पर आ गये हैं. मोईद खान के साथ की तस्वीर पर सवाल उठाये जाने पर कहते हैं, 'रोज कम से कम 500 लोग मेरे साथ फोटो खिंचवाते हैं... हम फोटो को कैसे नकार सकते हैं.'

बिलकुल सही बोल रहे हैं. लेकिन मामला सिर्फ फोटो को नकारने का नहीं है, बल्कि आरोपी के बचाव में खड़े होने का भी है. अवधेश प्रसाद का कहना है, किसी निर्दोष को न फंसाया जाये... डीएनए टेस्ट करा लिया जाये... समाजवादी पार्टी पीड़ित और उसके परिवार के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ी है. 

बिना जांच के आखिर अवधेश प्रसाद को क्यों लग रहा है कि किसी बेकसूर को फंसाया जा रहा है. ये तो ऐसा लगता है, वो मोईद खान को बेकसूर मान रहे हैं, और पहले से ही अपनी तरफ से क्लीन चिट दे दे रहे हैं. 

अवधेश प्रसाद ने भी अखिलेश यादव की तरह डीएनए टेस्ट कराने की मांग दोहराई है. आगे जो भी हो, अभी तो अखिलेश यादव इस मसले में राजनीतिक तौर पर घिर ही गये हैं. बीजेपी ही नहीं, मायावती भी अखिलेश यादव पर हमला बोल रही है - कांग्रेस की तरफ से अभी सिर्फ एक नेता ने अखिलेश यादव का समर्थन किया है.

Advertisement

मामला अयोध्या है, इसलिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एक बच्ची के खिलाफ अपराध का है, इसलिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा का भी रिएक्शन जरूरी लगता है - देखते हैं, क्या राहुल और प्रियंका भी वैसा ही रवैया अपनाते हैं, जैसा अरविंद केजरीवाल के लिए अखिलेश यादव ने लखनऊ में स्वाति मालीवाल केस में अपनाया था. 

अखिलेश यादव को तो पहले से मालूम होना चाहिये था कि मामला अयोध्या का है, और बीजेपी तो घात लगा कर बैठी है. घायल शेर की तरह दुश्मन के खिलाफ कब मौका मिले और नेस्तनाबूद कर डाले. अखिलेश यादव को अयोध्या गैंगरेप मामले में सोच समझ कर ही कुछ भी बोलना चाहिये था. 

1. डीएनए टेस्ट की मांग के मायने क्या हैं?

समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने सोशल साइट X पर जो लिखा है, उसे आखिर क्या और कैसे समझा जाये? अखिलेश यादव की पोस्ट पर मायावती के रिएक्शन के भी निहितार्थ हैं, और ये तो समाजवादी पार्टी के नेता को भी पहले से ही अंदाजा होगा ही. 

अखिलेश यादव अपनी पोस्ट में लिखते हैं, 'कुकृत्य के मामले में जिन पर भी आरोप लगा है, उनका डीएनए टेस्ट कराकर इंसाफ का रास्ता निकाला जाए... न कि केवल आरोप लगाकर सियासत की जाए... जो भी दोषी हो उसे कानून के हिसाब से पूरी सजा दी जाए, लेकिन अगर डीएनए टेस्ट के बाद आरोप झूठे साबित हों, तो सरकार के संलिप्त अधिकारियों को भी न बख्शा जाए... यही न्याय की मांग है.'

Advertisement

बीएसपी नेता मायावती इसी मुद्दे पर अपनी पोस्ट में लिखती हैं, यूपी सरकार द्वारा अयोध्या गैंगरेप केस में आरोपी के विरुद्ध की जा रही सख्त कार्रवाई उचित है... लेकिन सपा द्वारा ये कहना कि आरोपी का डीएनए टेस्ट होना चाहिए, इसे क्या समझा जाए? सपा को ये भी बताना चाहिए कि उनकी सरकार में ऐसे आरोपियों के खिलाफ कितने डीएनए टेस्ट हुए हैं?

जांच होनी ही चाहिये और बेगुनाह को सजा भी नहीं होनी चाहिये, लेकिन ये कोई तरीका नहीं हुआ. डीएनए टेस्ट ही करना चाहते हैं तो ये मांग कोर्ट में भी की जा सकती है, और राजनीति ही करनी थी तो कोई और भी तरीका हो सकता है.

उन्नाव गैंगरेप में भी ऐसे ही कुलदीप सिंह सेंगर को जांच पड़ताल से पहले ही संदेह का लाभ दिया जा रहा था, जो अदालत से उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. 

2. क्या अखिलेश का बयान भी मुलायम जैसा ही है?

जब भी महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले आते हैं, समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव के एक बयान का जिक्र जरूर आता है, 'लड़के हैं... लड़कों से गलतियां हो जाती हैं...'

मुलायम सिंह ने ये राजनीतिक बयान दिया था, खास वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए. अखिलेश यादव उनसे थोड़ा आगे निकल चुके हैं. अखिलेश यादव को पिता की तरह अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर से कोई परहेज नहीं है. वो समाजवादी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए गठबंधन की भी मदद ले रहे हैं, कुछ नुकसान के बाद फायदा भी मिल रहा है. 

Advertisement

फिर भी अखिलेश यादव अब तक मुलायम सिंह यादव की तरह पिछड़ों के नेता नहीं बन पाये हैं. हां, उस रास्ते पर आगे जरूर बढ़ रहे हैं. हो सकता है, उनके दिमाग में अयोध्या पर मुलायम का वो बयान भी गूंजता हो, जिसमें वो बड़े गर्व से अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने की बातें किया करते थे - अयोध्या की जीत का मतलब, मुलायम सिंह की बात पर अयोध्या के लोगों की मुहर नहीं लगी है. खास परिस्थितियों खास नतीजे देखने को मिलते हैं, लेकिन मिल्कीपुर में ये बात फिर से कंफर्म होनी है. 

अगर अखिलेश यादव ऐसा ही रवैया अपनाते रहेंगे तो मुलायम सिंह यादव का बयान बार बार याद दिलाया जाएगा. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है, बलात्कारियों को बचाना सपा की जन्मजात फितरत है... अगर बलात्कारी मुसलमान हो तब पूरा का पूरा सैफई परिवार उसे बचाने के लिए खूंटा गाड़ देता है. 

बदले में अखिलेश यादव, केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू की हार याद दिला रहे हैं, लेकिन वो तो सबको पता है. ऐसे बचाव का कोई फायदा नहीं होता. उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी भी अपना चुनाव हार गये थे, अब भी वही मुख्यमंत्री हैं.

3. स्वाति मालीवाल केस में भी रवैया असंवेदनशील था

Advertisement

लखनऊ की प्रेस कांफ्रेंस में स्वाति मालीवाल केस से जुड़ा सवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से पूछा गया था. अरविंद केजरीवाल ने जवाब देने के लिए माइक अखिलेश यादव की तरफ घु्मा दिया था, और अखिलेश यादव ने उसे गैर-जरूरी मामला बताते हुए सवाल टाल दिया था - अयोध्या गैंगरेप केस में भी उनका वैसा ही रवैया नजर आ रहा है.

4. कांग्रेस को भी अयोध्या मामले पर रुख साफ करना होगा

अयोध्या गैंगरेप की घटना कोई राम मंदिर जैसा मुद्दा नहीं है कि पूरा विपक्ष मिल कर उद्घाटन समारोह का बहिष्कार कर रहा है. कांग्रेस को भी इस मामले में अपना स्टैंड साफ करना होगा. कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने अखिलेश यादव के डीएनए जांच की मांग का बचाव किया है.

क्या राहुल गांधी भी संदीप दीक्षित के साथ हैं? सवाल ये है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी हाथरस, उन्नाव और कठुआ के एक जैसे मामलों में फर्क क्यों कर रहे हैं?

5. राजनीति अपनी जगह है, महिलाओं के खिलाफ अपराध गंभीर मामला है

महिलाओं के खिलाफ अपराध को वोट बैंक पॉलिटिक्स से अलग रखना होगा. लेकिन अयोध्या गैंगरेप केस को देखकर तो ऐसा नहीं लगता कि कोई भी अलग खड़ा दिखाई पड़ रहा हो. सबको अपनी अपनी राजनीति की पड़ी है. 

Advertisement

वोट बैंक की पॉलिटिक्स आसानी से समझ में आती है, लेकिन वोट बैंक के लिए सब ताक पर तो नहीं रखा जा सकता. ये ठीक है कि स्वाति मालीवाल केस में अखिलेश यादव के बयान से समाजवादी पार्टी को कोई यूपी में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन अरविंद केजरीवाल की तो पूरी फसल ही चौपट हो गई - आज नहीं तो कल ऐसी चीजें अखिलेश यादव को भी राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकती हैं. 

Live TV

Advertisement
Advertisement