लॉरेंस बिश्नोई के नाम से हाल फिलहाल वैसी ही दहशत है, जैसे कभी अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम का हुआ करती थी. लेकिन, दोनों में एक बुनियादी फर्क है कि दाऊद देश से बाहर होकर अपराधों को अंजाम देता था. जबकि लॉरेंस बिश्नोई देश में रहकर.
दाऊद इब्राहिम के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ माना जाता रहा है. वो तो अब भी आईएसआई के संरक्षण में ही है, लेकिन पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा है.
लॉरेंस बिश्नोई का साथी गोल्डी बराड़ जरूर विदेश में है, लेकिन वो तो देश की ही जेल में बंद है - और जब जेल में बंद है तो भला कैसे बड़ी बड़ी हत्याओं को अंजाम दे रहा है?
अप्रैल, 2024 में जब सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग के बाद गैंग के शूटर पकड़े गये थे, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया था कि मुंबई में किसी की दादागिरी नहीं चलेगी, लेकिन 6 महीने ही बीते हैं और लॉरेंस बिश्नोई के शूटर ने बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या कर डाली है.
सबसे बड़ा सवाल है कि कैसे लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ खुफिया तंत्र सहित पूरे सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर अपने आपराधिक मंसूबों को एक के बाद एक बड़े आराम से अंजाम दे रहे हैं - ये सीधे सीधे सिस्टम और सरकार की नाकामी नहीं तो क्या है?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग के आतंक का बढ़ता दायरा
देखने में आ रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई का गिरोह पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय होने से लेकर प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को पुलिस कस्टडी में सरेआम गोलियों से उड़ा देता है - ये सब लॉरेंस बिश्नोई तब कर रहा है जब वो जेल में बंद है, और जेल से ही वो सुपारी किलिंग, जबरन वसूली और ड्रग्स तस्करी जैसे संगठित अपराधों को अंजाम दे रहा है.
अभी अप्रैल, 2024 की बात है. बॉलीवुड एक्टर सलमान खान के घर गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर फायरिंग हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी. गैंग की तरफ से सलमान खान और उनके परिवार को 2022 और 23 में धमकी भरी चिट्ठी भी मिली थी.
फायरिंक की घटना के बाद से सलमान खान को आर्म्स लाइसेंस दिये जाने के साथ ही, उनके घर पर 24 घंटे कड़े सुरक्षा बंदोबस्त भी किये गये हैं.
असल में, सलमान खान को मिली धमकी में कहा गया था कि उनका हश्र भी सिद्धू मूसेवाला जैसा ही होगा. पंजाब के मशहूर सिंगर सिद्धू मूसेवाला की मई, 2022 और दिसंबर, 2023 में राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
सलमान खान से लॉरेंस बिश्नोई 1998 में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान जोधपुर में काले हिरण का शिकार से खफा है. असल में काले हिरण को बिश्नोई समाज पूजता है, और यही वजह है कि लॉरेंस बिश्नोई सलमान खान को मौत के घाट उतारना चाहता है.
जेल में बंद, बाहर हत्याओं से दहशत - जिम्मेदार कौन?
सलमान खान के घर के बाहर हुई फायरिंग के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कहना था कि मुंबई में अंडरवर्ल्ड खत्म हो गया है, और वहां मुंबई पुलिस है. तब एकनाथ शिंदे ने कहा था, ‘बिश्नोई-बिश्नोई को खत्म कर देंगे… ये महाराष्ट्र है, यहां दादागिरी नहीं चलेगी’ - लेकिन 6 महीने ही बीते हैं, और उसी लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों ने मुंबई पुलिस के नाक के नीचे एनसीपी नेता बाबा सिद्धीकी का मर्डर किया है. डिप्टी सीएम अजीत पवार की एनसीपी महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है.
बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद महाराष्ट्र सरकार निशाने पर है, और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस का इस्तीफा मांगा जा रहा है.
निशाने पर सलमान खान और बाबा सिद्धीकी मर्डर केस को लेकर महाराष्ट्र सरकर कठघरे में तो खड़ी ही है - लेकिन पूरे सिस्टम में कई लूप होल भी दिखाई पड़ रहे हैं.
क्योंकि गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई अगर मुंबई में खुलेआम सत्ताधारी दल के नेता की हत्या करा देता है तो जिम्मेदारी तो सरकारों की ही बनती है - और महाराष्ट्र के साथ साथ गुजरात सरकार की भी जिम्मेदारी बनती है.
और उसमें भी खास बात ये है कि गुजरात के जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के जरायम के धंधे को कनाडा में बैठा गोल्डी बराड़ संभाल रहा है - जरा सोचिये, ये मामला महाराष्ट्र और गुजरात सरकार या पंजाब सरकार ही नहीं, बल्कि सीधे सीधे केंद्र सरकार पर भी सवाल खड़े करता है. और चौंकाने वाली खबर तो ये भी है कि मुंबई पुलिस के क्राइम ब्रांच की कस्टडी लेने की अर्जी केंद्रीय गृह मंत्रालय नामंजूर कर देता है.
गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई कॉलेज फ्रेंड हैं, और वे मिलकर इतना उत्पात तब मचा रहे हैं, जब NIA यान राष्ट्रीय जांच एजेंसी गैंग के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक लॉरेंस बिश्नोई का असली नाम सतविंदर सिंह है.
अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में NIA ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की तुलना दाऊद इब्राहिम की 'डी कंपनी' से की है. एनआईए का कहना है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसका सिंडिकेट वैसे ही फैला है जैसे 90 के दशक में दाऊद इब्राहिम ने अपना नेटवर्क खड़ा किया था.
बताते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई के पास 700 से ज्यादा शूटर हैं, जिनमें काफी शूटर नाबालिग हैं, जो देश के 11 राज्यों और 6 देशों में फैला हुआ है - और अकेले पंजाब में गैंग के करीब 300 शूटर हैं. ये गैंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और यूट्यूब पर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ की तस्वीरें और वीडियो डालकर नौजवानों को अपराध की दुनिया में खींचने की कोशिश करता है.
बिश्नोई-बराड़ की ये जोड़ी अकेले तो ये सारा काम कर नहीं सकती. जाहिर है, पूरे गैंग को जेल प्रशासन और पुलिस में बैठे इनके आदमी कदम कदम पर भरपूर मदद कर रहे हैं - और ऐसे में खुफिया तंत्र भी नाकाम लग रहा है.
लेकिन खुफिया तंत्र को लेकर सवाल ये भी है वो बिश्नोई गैंग की गतिविधियों को ट्रैक नहीं कर पा रहा है या फिर, सिस्टम में ही फल-फूल रहा एंटी-वायरस सारी सूचनाओं को कोई सेफ हाउस मुहैया करा रहा है?
बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सोशल साइट X पर लिखा है, ‘यह देश है या हिजड़ों की फौज
एक अपराधी जेल में बैठ चुनौती दे… लोगों को मार रहा है, सब मुकदर्शक बने हैं… कानून अनुमति दे तो 24 घंटे में इस लारेंस बिश्नोई जैसे दो टके के अपराधी के पूरे नेटवर्क को खत्म कर दूंगा.’
अव्वल तो ये पप्पू यादव का बड़बोलापन है, लेकिन एकनाथ शिंदे और पप्पू यादव की बातों में कोई फर्क नहीं लगता.
बड़ा सवाल ये भी है कि क्या लॉरेंस बिश्नोई अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम बनना चाहता है? या, उसके समानांतर माफिया डॉन छोटा राजन के रास्ते पर चल रहा है?