कट्टर इमानदार होने का दावा भी, कठघरे में खड़े आरोपी के बेकसूर होने के बयान जैसा ही हो सकता है - दिल्लीवालों का अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ मैंडेट, असल में, यही बता रहा है.
जिस तरह पंजाब सरकार ने एक हफ्ते में 52 पुलिस वालों को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया है, वो तो यही बता रहा है कि बयानों में किये जाने वाले दावों. और एक्शन में नजर आने वाली चीजों में भी बहुत हद तक वैसा ही फर्क हो सकता है.
जिन पुलिसवालों के खिलाफ एक्शन हुआ है, उनमें कांस्टेबल से लेकर इंसपेक्टर तक शामिल हैं. पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव के मुताबिक, ये कार्रवाई भ्रष्टाचार, आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाये जाने और लंबी गैरहाजिरी के आरोपों में की गई है.
आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल के तलब करने पर पंजाब के मंत्रियों और विधायकों के साथ दिल्ली में मीटिंग के बाद मुख्यमंत्रही भगवंत मान ने गवर्नेंस के पंजाब मॉडल की बात की थी - क्या माना जाये कि ये सब भगवंत मान की उसी घोषणा का सैंपल है?
भगवंत मान का आदेश और ताबड़तोड़ एक्शन
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि हाल ही में फरीदकोट जिले में एक एसएसओ और दो सिपाहियों को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. और ये साफ संदेश है कि पुलिस अपने अंदर की गलतियों को ठीक करने के लिए कटिबद्ध है. डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि पंजाब पुलिस में काली भेड़ों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी.
एक प्रेस कांफ्रेंस में डीजीपी ने बताया कि 13 फरवरी, 2025 को पंजाब सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये थे, और ये कार्रवाई उसी के बाद की गई है.
सरकारी कार्रवाई के शिकार 52 पुलिसकर्मियों में एक इंस्पेक्टर, 5 एएसआई, 4 हेड कांस्टेबल और 42 कांस्टेबल शामिल हैं.सभी को बर्खास्त कर दिया गया है.
डीजीपी के मुताबिक, पुलिस कमिश्नर और एसएसपी उन पुलिस अधिकारियों की पहचान कर रहे हैं जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं, या वे भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. संबंधित अधिकारी सबूतों की जांच कर रहे हैं, और हर मामले में सही प्रक्रिया का पालन करके कार्रवाई कर रहे हैं.
और सिर्फ यही नहीं, बीते दिनों में 10 डीएसपी और 8 एसपी को सस्पेंड किया गया है. पुलिसवालों के खिलाफ, जिनमें अफसर भी शामिल हैं, 400 FIR दर्ज किये हैं, और कुछ मामले कार्रवाई के लिए राज्य सरकार के पास भी भेजे जाएंगे.
क्या ये पंजाब मॉडल का पहला नमूना है
अरविंद केजरीवाल के साथ मीटिंग के बाद भगवंत मान ने गवर्नेंस के पंजाब मॉडल को मिसाल बनाने की बात कही थी. भगवंत मान का कहना था, पंजाब में हमारी सरकार लोगों के हित में बहुत सारे काम कर रही है… चाहे वो बिजली के क्षेत्र में हो, शिक्षा के क्षेत्र में हो, या स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में हो. हमें सारे कार्यों को और गति देनी है.
भगवंत मान ने ये भी कहा था कि वो दिल्ली के अनुभव का उपयोग पंजाब में करेंगे. मालूम नहीं भगवंत मान दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के कामकाज की बात कर रहे थे, या चुनाव नतीजों की, लेकिन उनके बयान में सतर्कता तो महसूस हो ही रही थी.
दिल्ली के जनादेश का सम्मान करने की बात करते हुए मान ने कहा था, हम पंजाब को एक मॉडल स्टेट के रूप में विकसित करेंगे… हम ऐसा पंजाब मॉडल बनाएंगे जिसे पूरा देश देखेगा… हमें विकास के कार्यों पर फोकस रखना होगा. हम साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं… अधिक से अधिक लोगों के दिल कैसे जीते जाएं, उस दिशा में काम करेंगे.
क्या ये दिल्ली चुनाव के नतीजों का असर है?
16 मार्च, 2022 को भगवंत मान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, और दो महीने बाद ही 24 मई को पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंघला को भ्रष्टाचाक के आरोप में बर्खास्त कर दिया था.
विजय सिंघला पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण से जुड़े ठेके देने के लिए 1 फीसदी कमीशन चाह रहे थे. मान के एक्शन के बाद पंजाब पुलिस ने सिंघला और उनके ओएसडी रहे प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, 58 करोड़ का टेंडर देने के लिए 2 फीसदी कमीशन मांगी जा रही थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने इनकार कर दिया था.
ठीक एक साल बाद भगवंत मान ने एक बयान में कहा था, एंटी करप्शन हेल्पलाइन ने नया रिकॉर्ड बनाया है, और एक साल में 300 से ज्यादा भ्रष्ट अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है.
भगवंत मान का कहना था, आम आदमी पार्टी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का नतीजा है, जिसके कारण पंजाब को भ्रष्टाचार मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है… पहले दिन से ही मेरे कार्यालय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है.
भगवंत मान ने एक बार फिर वैसा ही तेवर दिखाया है, लेकिन सवाल है कि दिल्ली में ये सब इस रूप में देखने को क्यों नहीं मिला. एक फीडबैक यूनिट की खबर जरूर आई थी, लेकिन मालूम हुआ कि वो भी जासूसी के मकसद से बनाई गई थी. अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों के मुंह से भ्रष्टाचार के मामलों में लोगों से वीडियो बनाकर भेजने की अपील जरूर की जाती रही.
समझ से परे सवाल तो ये है कि कैसे भ्रष्टाचार के खिलाफ योद्धा बनकर उभरा एक तेज तर्रार शख्स कैसे राजनीति में गच्चा खा गया? जो अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार मिटाने के मकसद से राजनीति में आये, कैसे वो शराब नीति केस में भ्रष्टाचार के आरोपी बन गये - और सबको जेल भेजने की बात करने वाले को साथियों के साथ लंबे समय तक सलाखों के पीछे भी रहना पड़ा.
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार होने के लाख दावे करें, लेकिन चुनाव नतीजे तो यही बता रहे हैं कि दिल्लीवालों को यकीन नहीं हुआ है - खतरे की घंटी की आहट सुन भगवंत मान जो कर रहे हैं, उसमें ही पूरी आम आदमी पार्टी की भलाई है.