बिहार की राजनीति में पिछले एक सप्ताह में सबसे बड़ी खबर चिराग पासवान से जुड़ी हुई रही, जहां पर बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनाव के लिए चाचा पशुपति पारस को दरकिनार कर बिहार में चिराग पर दांव लगाया और उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 5 सीट लड़ने के लिए दी. दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी ने भी बिहार में 11 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर राजद और कांग्रेस को जबरदस्त टेंशन दे दी है.
बीजेपी को चिराग पसंद है!
आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में सीट शेयरिंग के मामले में लगातार हो रही देरी के बीच सवाल खड़े हो रहे थे कि आखिर किस कारण से सीट बंटवारे और इसकी घोषणा में देरी हो रही है. दरअसल, नीतीश कुमार के एनडीए में वापस आने के बाद चिराग पासवान गठबंधन में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं, यह बात तो सबके सामने थी लेकिन उनकी अपने चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस से तकरार के कारण ही सीटों के तालमेल और समझौते का मसौदा फंसा हुआ था.
जानकारी के मुताबिक, चिराग और चाचा पशुपति पारस दोनों ही बीजेपी से 6 लोकसभा सीट की मांग कर रहे थे और दोनों ही अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं थे. दूसरी तरफ चिराग और चाचा पारस हाजीपुर लोकसभा सीट को लेकर भी भिड़े हुए थे. चिराग पासवान आगामी लोकसभा चुनाव हाजीपुर से लड़ना चाहते थे, जो उनके पिता दिवंगत रामविलास पासवान की कर्मभूमि रही है और पशुपति पारस भी इस सीट को छोड़ने के मूड में नहीं थे जो कि फिलहाल इस सीट से मौजूदा सांसद हैं.
बीजेपी ने कई दौर की बैठक कर चाचा और भतीजे में सुलह करवाने की कोशिश की लेकिन उसमें सफल नहीं हुए. आखिरकार, बीते बुधवार को भाजपा ने कड़े तेवर इख्तियार कर चिराग पासवान में अपना भरोसा जताया. चिराग ने बुधवार शाम को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर घोषणा की कि उनका सीटों का बंटवारा एनडीए में अच्छे तरीके से हो गया है और वह इससे संतुष्ट भी हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चिराग पासवान को हाजीपुर सीट भी मिल गई है, जहां से वह चुनाव लड़ना चाहते हैं. बीजेपी ने एक तरफ जहां चिराग पर भरोसा जताया. वहीं चाचा पशुपति पारस की पार्टी को एक भी सीट गठबंधन में नहीं दी.
बताया जा रहा है कि पशुपति पारस एक भी सीट नहीं मिलने से काफी नाराज और मायूस हैं और अपनी भविष्य की राजनीति को लेकर महागठबंधन के संपर्क में भी हैं.
ओवैसी कर गए बड़ा खेल!
पिछले सप्ताह की एक और बड़ी खबर बिहार की 11 लोकसभा सीट पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम का उम्मीदवार उतारने की घोषणा करना रही. ओवैसी की पार्टी ने बुधवार को ऐलान किया कि वह बिहार के सीमांचल के चार मुस्लिम बहुल लोकसभा सीट जिसमें पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं. उसके समेत 11 लोकसभा सीट पर प्रदेश में चुनाव लड़ेगी. ओवैसी की पार्टी ने दरभंगा, भागलपुर, काराकाट, बक्सर, गया, मुजफ्फरपुर और उजियारपुर में भी उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है.
ओवैसी के इस ऐलान के बाद बिहार में राजद और कांग्रेस की टेंशन बढ़ सकती है क्योंकि यह बात बिल्कुल साफ है कि मुस्लिम बहुल लोकसभा सीटों पर ओवैसी के उम्मीदवार उतारने से महागठबंधन का खेल जबरदस्त तरीके से बिगड़ सकता है.
2020 विधानसभा चुनाव में भी ओवैसी की पार्टी ने बिहार के सीमांचल इलाके में 18 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसमें से पांच पर उसकी जीत हुई थी और इस चुनाव में भी ओवैसी ने सबसे ज्यादा नुकसान आरजेडी का ही किया था, जिसके कारण तेजस्वी यादव की उस समय सरकार नहीं बन पाई थी. राजद ने ओवैसी के फैसले पर हमला बोलते हुए उसे बीजेपी की B टीम बताया है.