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BJP आंबेडकर विवाद से निकलना चाहती है, लेकिन कांग्रेस और विपक्ष को काउंटर करना मुश्किल हो रहा है | Opinion

संसद में अमित शाह के बयान से शुरू हुआ आंबेडकर विवाद बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है, निकल पाना मुश्किल हो रहा है. कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने बीजेपी को घेर लिया है - और मुसीबत की इस घड़ी में बीजेपी को एनडीए की याद आई है.

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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की बुलाई मीटिंग में जुटे एनडीए के नेता, अमित शाह ने समझाई आंबेडकर विवाद पर विपक्ष को काउंटर करने की रणनीति.
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की बुलाई मीटिंग में जुटे एनडीए के नेता, अमित शाह ने समझाई आंबेडकर विवाद पर विपक्ष को काउंटर करने की रणनीति.

आंबेडकर विवाद बीजेपी को बुरी तरह परेशान कर रहा है. बीजेपी को उम्मीद थी कि अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस के साथ ही विवाद खत्म हो जाएगा, लेकिन वो गहराता ही जा रहा है. 

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बीजेपी को लगा होगा कि कांग्रेस तो INDIA ब्लॉक में पहले से ही अकेली पड़ चुकी है, भला कहां तक आंबेडकर विवाद को हवा दे पाएगी. इसलिए अमित शाह और दूसरे बीजेपी नेताओं ने आंबेडकर के नाम पर ही कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया था, लेकिन बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. 

भारतीय जनता पार्टी की अपेक्षा के विपरीत आंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस को समाजवादी पार्टी और दूसरे विपक्षी दलों का साथ मिल गया है. मजबूरी भी ऐसी कि कांग्रेस नेताओं के खिलाफ हमेशा ही आक्रामक रहने वाली बीएसपी नेता मायावती भी हमलावर हो गई हैं - और बीजेपी नेता अमित शाह से बयान वापस लेने के साथ ही, पश्चाताप करने की भी मांग कर रही हैं. 

हालात बेकाबू होते देख बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को अपने आवास पर एनडीए नेताओं की बैठक बुलानी पड़ी. बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए. 

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करीब 50 मिनट तक चली एनडीए की इस बैठक में टीडीपी अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू, जेडीयू से राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी, एकनाथ शिंदे की शिवसेना से प्रताप राव जाधव, निषाद पार्टी से संजय निषाद, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से जीतन राम मांझी, अपना दल से अनुप्रिया पटेल सहित एनडीए के और भी नेता शामिल हुए.

एनडीए की इस अति महत्वपूर्ण बैठक में बीजेपी की तरफ से सहयोगी दलों को कांग्रेस के फेक नैरेटिव में न उलझने की सलाह दी गई, और आने वाले दिनों में बेहतर सहयोग और समन्वय पर गंभीर चर्चा हुई.

आंबेडकर विवाद बीजेपी की चुनौती, एनडीए पर असर

आंबेडकर विवाद ऐसे वक्त हो रहा है, जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने हैं, और उसके बाद बिहार की बारी है. बिहार चुनाव से पहले बीजेपी को नीतीश कुमार की पैंतरेबाजी अलग ही परेशान कर रही है. 

फिर भी बीजेपी नेता अमित शाह की सहयोगी दलों के नेताओं को समझाइश है कि कांग्रेस की तरफ से उठाये गये मुद्दों पर भटकने की जरूरत नहीं है. बल्कि, काम करते रहना है, और सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ने पर ही फोकस रहना चाहिये. 

एनडीए की बैठक में अमित शाह ने दोहराया कि कैसे कांग्रेस और उसकी सरकारें संविधान का उल्लंघन करती रही हैं, इसलिए कांग्रेस की तरफ से जिन मुद्दों पर उलझाने के प्रयास हो रहे हैं, उसमें फंसने की जरूरत नहीं है. 

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बैठक में ये भी तय हुआ कि आंबेडकर के मुद्दे पर कांग्रेस की मंशा को काउंटर करने के लिए अलग अलग ग्रुप बनाये जाएंगे, जो लगातार संपर्क में रहेंगे और मुद्दों से खड़ी हो रही समस्याओं को सुलझाने की कोशिश होगी. इस काम में एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री सांसदों से अलग अलग संवाद करेंगे ताकि बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस की दुष्प्रचार की कोशिशों को नाकाम किया जा सके.  

बीजेपी को मालूम है कि मौजूदा एनडीए सरकार सहयोगी दलों की बैसाखी पर टिकी है, लिहाजा एकजुट रखने की चुनौती पिछली दो सरकारों के मुकाबले ज्यादा है. और, यही वजह है कि बीजेपी पहले से ही सतर्क हो गई है. 

आंबेडकर विवाद से उबरने की तैयारी

जुलाई, 2024 में भी बीजेपी संसदीय दल की जगह संसद सत्र के दौरान एनडीए संसदीय दल की बैठक बुलाई गई थी, और उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सभी एनडीए पार्टियों को अपना प्रवक्ता नियुक्त करना चाहिये, और उनके बीच समन्वय होना चाहिये ताकि सरकार की बात एक साथ एक आवाज में जा सके.

1. बीजेपी की कोशिश है कि एकजुट एनडीए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्ष के आंबेडकर पर नैरेटिव को हर हाल में काउंटर किया जाये, और राजनीतिक विरोधियों को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास हो. 

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लेकिन, बीजेपी की ऐसी मुहिम तब तक कामयाब नहीं हो सकती, जब तक कांग्रेस को किसी और मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में न ला दिया जाये. बीजेपी की तरफ से ऐसी कोशिशें अक्सर होती हैं, और सफलता भी मिलती है. 

हाल ही में जब प्रियंका गांधी अलग अलग बैग लेकर संसद जाने लगी थीं, तो बीजेपी की तरफ से उनको 1984 के दंगे को दर्शाता एक बैग गिफ्ट किया गया था. हालांकि, संसद सत्र ही खत्म हो गया. पहले भी जब कांग्रेस की तरफ से 2020 में दिल्ली दंगे को लेकर बीजेपी को घेरने की कोशिश हुई तो, बीजेपी नेताओं ने 1984 के दिल्ली दंगों की याद दिलाकर हमले की धार कमजोर कर दी थी. 

2. गनीमत है कि आंबेडकर विवाद से पहले महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं. लेकिन, बीजेपी को नुकसान तो दिल्ली और बिहार चुनाव में भी हो सकता है. ऐसे में बीजेपी को जल्दी से जल्दी आंबेडकर विवाद से निजात पानी होगी. 

3. आंबेडकर विवाद से छुटकारा पाने के लिए बीजेपी में नया अध्यक्ष दलित समुदाय से बनाने की भी चर्चा चल रही है. हाल फिलहाल कांग्रेस ने इस मामले में पहले ही लीड ले रखी है. 

बीजेपी और अमित शाह के लिए अच्छी बात ये भी है कि आंबेडकर विवाद में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी एंट्री हो गई है. राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बाबा साहेब का अपमान तो कांग्रेस और नेहरू ने किया है. कांग्रेस को अपने अनैतिक काम के लिए देश से माफी मांगनी चाहिये... विपक्ष को केवल मुसलमानों की ही चिंता है, कांग्रेस शासन में आंबेडकर का स्मारक तक नहीं बनने दिया गया.  

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ऐसे दौर में जब बीजेपी नेतृत्व और योगी आदित्यनाथ के बीच टकराव की खबरें आती रहती हैं, योगी आदित्यनाथ का ये कहना काफी महत्वपूर्ण है कि अमित शाह के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. 

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