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मध्य प्रदेश चुनाव में भाजपा की कमजोर नस क्या वही है जो कर्नाटक में थी?

मध्य प्रदेश चुनाव भी कांग्रेस कर्नाटक वाले तरीके से ही लड़ने जा रही है. चुनाव प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला की बातों से तो ऐसा ही लगता है - और ये भी लगता है कि बीजेपी को भी बचाव की मुद्रा में वैसे ही आना पड़ेगा.

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क्या रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस नेतृत्व को कर्नाटक जैसा तोहफा दे पाएंगे?
क्या रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस नेतृत्व को कर्नाटक जैसा तोहफा दे पाएंगे?

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला की भूमिका कुछ दिनों से थोड़ी बदली हुई है. फिलहाल वो मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी बनाये गये हैं. इससे पहले मिशन कर्नाटक को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुके हैं. 

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पंचायत आज तक के मंच पर जब वो आये तो उनके गले में अलग ही गमछा दिखा. बातों बातों में बता भी दिया कि वो महाकाल का प्रसाद है. वैसे बीजेपी की शिवराज सिंह चौहान सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते महाकाल घोटाले पर भी उनका उतना ही जोर रहा.

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गले में जो गमछा डाल रखा था, उस पर त्रिशूल बना हुआ था. और हाथ में लेकर वो दिखाये भी - दरअसल, ये सनातन धर्म पर कांग्रेस का पक्ष रखने का उनका अपना तरीका है. कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व के प्रयोगों की वकालत करते हुए रणदीप सुरजेवाला ने कैसे राहुल गांधी को जनेऊधारी हिंदू शिवभक्त बताया था, आपको याद होगा ही. 

कांग्रेस नेता बड़े दिनों बाद टीवी पर काफी देर तक दिखे. करीब करीब पुराने अंदाज में ही कांग्रेस का बचाव करते हुए. एक दौर था जब कांग्रेस के हर कार्यक्रम में सामने ही नजर आते रहे. भारत जोड़ो यात्रा से पहले कांग्रेस के मीडिया मैनेजमेंट में जो तब्दीली हुई, रणदीप सुरजेवाला शिकार हो गये.

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हरियाणा को लेकर पूछे गये सवाल पर रणदीप सिंह सुरजेवाला थोड़ा ठिठक गये - क्योंकि बात हरियाणा में हुड्डा परिवार की जगह कमान संभालने को लेकर जो था.

शिवराज सरकार के भ्रष्टाचार पर फोकस

कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना कर मध्य प्रदेश चुनाव में उतरने जा रही कांग्रेस बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगा रही है. कर्नाटक चुनाव में भी कांग्रेस ने यही तरीका अपनाया था. 

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनवा चुके रणदीप सिंह सुरजेवाला मध्य प्रदेश में भी वैसे ही प्रयोग कर रहे हैं. मौका मिलते ही शुरू हो जाते हैं - एक एक कर गिनाने लगते हैं. पोषण घोटाले से लेकर महाकाल घोटाले तक. कांग्रेस के कुछ नेता इस क्रम में व्यापम घोटाले की भी याद दिला रहे हैं.

शिवराज सिंह सरकार पर कांग्रेस महाकाल घोटाले का आरोप लगाती है. आपको याद होगा उज्जैन में तेज आंधी और तूफान के दौरान महाकाल लोक में स्थापित सप्तऋषि की मूर्तियां गिरकर टूट गयी थीं. 

कांग्रेस के आक्रामक रूख को देखते हुए सरकार की तरफ से जो जानकारियां शेयर की गयीं, उससे तो यही लगा कि मूर्तियों की स्थापना से जुड़े भुगतान कांग्रेस और बीजेपी दोनों के शासन में हुआ था. 

जब रणदीप सुरजेवाला से कर्नाटक और मध्य प्रदेश चुनाव में फर्क पूछा जाता है तो कहते हैं, वहां 40 फीसदी कमीशन था, यहां 50 फीसदी है. 

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ये तो साफ है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मध्य प्रदेश में बीजेपी शासन के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर मुद्दा बनाने वाली है.

पिछले चुनाव की तरह एग्री बिजनेस को लेकर एजेंडा

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मध्य प्रदेश के भारी कर्ज में डूबे होने का भी जोर देकर जिक्र किया - और पूछे जाने पर कर्ज से उबरने के कुछ उपाय भी बताये. 

सबसे ज्यादा जोर तो निवेश पर ही रहा, ताकि मध्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिल सके. कांग्रेस नेता का तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर रहा. उनका कहना है, मध्य प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का हब बनाया जा सकता है.

लेकिन जिस बात पर ज्यादा जोर दिखा वो है, मध्य प्रदेश को एग्रेरियन एक्सपोर्ट हब बनाने को लेकर. रणदीप सिंह सुरजेवाला का मानना है कि मध्य प्रदेश को फल और सब्जियों का हब बनाया जा सकता है.

कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भी ये एजेंडा आगे बढ़ाया था - और 2018 की जीत तो यही बताती है कि ये कामयाब रहा.

कांग्रेस की खेमेबंदी एक चुनौती

कांग्रेस गुटबाजी से तो पूरे देश में जूझती रही है, लेकिन चुनाव के मौके पर मध्य प्रदेश में ये चीज बहुत भारी पड़ रही है. 

बीजेपी की उम्मीदवारों की पहली सूची पहले ही आ चुकी है, लेकिन कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर अलग अलग जवाब मिल रहे हैं. कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी का कहना था कि उम्मीदवारों के नाम पर सहमति बन चुकी है. और सही समय आने पर उसकी घोषणा भी कर दी जाएगी. 

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लेकिन रणदीप सिंह सुरजेवाला के मुंह से ऐसी कोई ठोस बात सुनने को नहीं मिली. बार बार पूछे जाने पर वो यही कहते रहे कि ये सब एक रणनीति के तहत होता है, और उसी के हिसाब से फैसला लिया जाता है.

कोई दो राय नहीं कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में दूध की जली हुई है. कांग्रेस को मध्य प्रदेश में 15 साल बाद सरकार बनाने का मौका मिला था, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के झगड़े में कांग्रेस ने उसे 15 महीने में भी गंवा दिया था. 

ज्योतिरादित्य सिंधिया तो बीजेपी में चले गये, लेकिन दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ के गुट तक सब अपने अपने इलाके के क्षत्रप बने हुए हैं - और इस झगड़े में आम राय बनाना सबसे बड़ी चुनौती है. 

लाड़ली बहना की फिलहाल काट नहीं

बस एक स्कीम है जो बीजेपी के लिए संजीवनी बूटी साबित हो सकती है - लाड़ली बहना योजना. इस योजना के तहत शिवराज सिंह चौहान सरकार ने 23 साल से 60 साल तक की महिलाओं के खाते में पैसे देना शुरू कर दिया है. 

ये योजना हर महीने 1000 रुपये से शुरू की गयी थी, और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कह चुके हैं कि जैसे जैसे पैसों का इंतजाम होता जाएगा, हर महीने ये राशि 3000 रुपये हो जाएगी. 

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मुकाबले में कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ की नारी सम्मान योजना भी चुनाव मैदान में होगी. कांग्रेस की सरकार बनने पर हर महीने 1500 रुपये देने का वादा किया गया है - देखना होगा लोगों को क्या पसंद आता है? जो मिल रहा है, या फिर जो मिलने का सपना दिखाया जा रहा है?

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