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रमेश बिधूड़ी क्या सचमुच बन सकते हैं दिल्ली के सीएम, कितनी है संभावना?

वैसे तो रमेश बिधूड़ी ने खुद कहा है कि वह मुख्यमंत्री पद की दौड़ में दूर-दूर तक नहीं हैं. पर बीजेपी में जिसे सीेएम बनना होता है उसे वास्तव में नहीं पता होता है. जैसी परिस्थितियां बन रही हैं कोई आश्चर्य नहीं होगा कि सीेएम आतिशी को यदि बिधूड़ी हरा देते हैं तो उन्हें सीएम पद से पुरस्कृत कर दिया जाए.

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दिल्ली बीजेपी नेता रमेश बिधूड़ी की फाइल फोटो
दिल्ली बीजेपी नेता रमेश बिधूड़ी की फाइल फोटो

दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी किसी चेहरे को सामने रखकर चुनाव नहीं लड़ रही है.दरअसल हरियाणा से लेकर महाराष्ट्र तक मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान और छत्तीसगढ़ तक बीजेपी बिना सीएम कैंडिडेट तय किए  विधानसभा चुनाव लड़ती रही और सफल होती रही है. पर इस बार बीजेपी के सीएम कैंडिडेट हर रोज आम आदमी पार्टी तय कर रही है. आम आदमी पार्टी नेता और कालकाजी से विधायक का चुनाव लड़ रहीं मुख्यमंत्री आतिशी ने शुक्रवार को दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी अपने कालकाजी उम्मीदवार पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी को सीएम बनाने जा रही है. इसके पहले प्रवेश वर्मा के नाम का भी शोर मचा था. आम आदमी पार्टी चाहे जिस मकसद से रमेश बिधूड़ी का नाम आगे बढ़ा रही हो पर अब इस नाम की चर्चा तो सीएम के रूप में हो ही चुकी है.अब देखना यह है कि क्या वास्तव में उनके सीएम बनने की कुछ संभावना है भी या नहीं? वैसे भी भारतीय जनता पार्टी में जिसको कोई संवैधानिक पोस्ट मिलनी होती है उसे खुद भी उस बारे में न कोई उम्मीद होती है और न ही जानकारी होती है. 

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रमेश बिधूड़ी की किससे है प्रतिस्पर्धा

 वैसे रमेश बिधूड़ी के बारे में तो नहीं कह सकते हैं कि उन्हें सीएम बनाया जा सकता है या नहीं पर भारतीय जनता पार्टी में किसके नाम की लॉटरी लग जाए ये कहा नहीं जा सकता है. रमेश बिधूड़ी ओबीसी समाज से आते हैं. अगर वो सीएम को हराकर दिल्ली विधानसभा में पहुंचते हैं तो जाहिर है कि उनको कोई बड़ी पोस्ट मिल सकती है. वो पोस्ट सीएम की भी हो सकती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता है. दिल्ली बीजेपी में वैसे तो मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में मनोज तिवारी, मीनाक्षी लेखी ,प्रवेश वर्मा और बांसुरी स्वराज आदि का नाम चल रहा है. पर बिधूड़ी के लिए टॉप कांप्टिटीटर हैं प्रवेश वर्मा और बांसुरी स्वराज . प्रवेश वर्मा की लड़ाई नई दिल्ली सीट पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे धुरंधर से मुकाबला है. इस सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व सीएम शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित भी चुनाव लड़ रहे हैं. जाहिर है कि यहां मुकाबला टफ है.

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 यह हो सकता है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली चुनाव हार जाए पर अरविंद केजरीवाल अपनी नई दिल्ली सीट जीत सकते हैं. इस तरह प्रवेश वर्मा का नाम तो मुख्यमंत्री के लिए कट जाता है. दूसरे बांसुरी स्वराज का ब्राह्मण होना उनके लिए नेगेटिव हो सकता है. बीजेपी लगातार 2 ब्राह्रमण नेताओं को सीएम बना चुकी है. राजस्थान में भजनलाल शर्मा और महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के रूप में बीजेपी 2 ब्राह्मण सीएम ताबड़तोड़ बना चुकी है. जाहिर है कि तीसरी बार फिर ब्राह्मण सीएम बनाने से पार्टी की ओबीसी समर्थक छवि को धक्का लग सकता है. इस तरह रमेश बिधूड़ी के नाम पर मुहर लग जाए तो कोई आश्चर्य नहीं है.रमेश बिधूड़ी की जाति गुर्जर है. गुर्जरों का वोट दिल्ली एनसीआर के लिए बहुत खास है. 

अरविंद केजरीवाल से मुकाबला के लिए बीजेपी को बिधूड़ी और कपिल मिश्रा जैसों की जरूरत

अब सवाल उठता है कि बीजेपी रमेश बिधूड़ी जैसे बड़बोले नेता को सीएम क्यों बनाएगी. जाहिर है भारतीय जनता पार्टी एक अनुशासन में रहने वाले कार्यकर्ताओं की पार्टी रही है. पार्टी की पहचान रही है उसका चाल-चरित्र और चेहरा. पर भारतीय जनता पार्टी यह समझ चुकी है कि सिर्फ चाल-चरित्र और चेहरा मिलकर सत्ता नहीं दिला सकते हैं. वह भी जब अरविंद केजरीवाल जैसे नेता सामने हों.
 भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुकी है. अगर चौथी बार भी सफलता मिलती है तो जाहिर यह उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी.बीजेपी चाहेगी कि दिल्ली की सत्ता पर कम से कम 15 सालों तक लगातार उनका ही वर्चस्व रहे. इसके लिए ऐसे लोगों की जरूरत होगी जो आम आदमी पार्टी के खिलाफ ताल ठोंककर मैदान में उतरें और उनकी भाषा में ही उन्हें जवाब दें. बीजेपी में कपिल मिश्रा को भाव भी इसलिए ही मिलता है, क्योंकि जिस तरह वो पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमलावर होते थे, आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद वो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उससे कहीं ज्यादा आक्रामक नजर आते हैं. 

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यही कारण रहा कि कपिल मिश्रा को बीजेपी ने ऐसी सीट सौंपी है जहां से उनका जीतना तय हो सके.बीजेपी यहां से पुराने उम्मीदवार को मोहन सिंह बिष्ट को भी लड़ाया होता तो वो जीत गए होते. पर बीजेपी इस बार केवल जीत को आधार मानकर चुनाव नहीं लड़ रही है. वो ऐसे लोगों की दिल्ली में टीम खड़ी करना चाहती है जो आम आदमी पार्टी से भी ज्यादा सक्रिय रहने वाले हों और आक्रामक राजनीति करने वाले हों.

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