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व्‍यंग्य: हरीश साल्वे की तीसरी शादी और मिडिल क्लास आदमी के सपने

आदमी हरीश साल्वे हो तो 69 साल की उम्र में तीसरी शादी और बीवी के माथे पर किस करना मुमकिन है. वरना हम आप होते तो हमारा मामला इसके ठीक विपरीत रहता. मैटर बस ये है कि हम जैसे आम लोगों के जीवन के अलग अलग मोर्चों में चुनौतियां ही इतनी हैं कि किसी एक लफड़े में पड़ने के बाद किसी दूसरे या तीसरे में पड़ने की न तो हमारी हिम्मत होती है, और न ही मन.

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वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने तीसरी बार शादी कर आम लोगों को कॉम्प्लेक्स दे दिया है
वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने तीसरी बार शादी कर आम लोगों को कॉम्प्लेक्स दे दिया है

देश के नामी और महंगे वकील हरीश साल्वे ने अपनी देशभक्ति से उस वक़्त लोगों को दांतों तले अंगुली दबाने पर मजबूर कर दिया था, जब उन्होंने पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव का केस लड़ा और फीस के नाम पर सिर्फ एक रुपए लिए. साल्वे की इस अदा को देखकर देश भाव विभोर हो उठा और कहा गया कि भई वाह, आदमी हो तो ऐसा. बात भी सही है. वकील जब हरीश साल्वे के लेवल का हो और ऐसा कुछ करे, तो लाजमी था कि वो सुर्खियां बटोरेगा ही. उस घटना को भले ही ठीक ठाक वक़्त बीत चुका हो. लेकिन आज भी लोग साल्वे को भूले नहीं हैं. साल्वे पुनः ट्रेंड में हैं और वजह बनी है उनकी तीसरी शादी. उम्र के लिहाज से साल्वे 69 बसंत देख चुके हैं. और तृणा नाम की महिला से अपनी तीसरी शादी कर, साल्वे ने देश के कई लोगों को कॉम्प्लेक्स दे दिया है. एक ऐसे वक़्त में जब आप और हम अपनी पहली ही शादी में तरह-तरह के चैलेन्ज झेल रहे हों. कभी परास्त होकर तो कभी किला जीतकर अपनी अपनी जिंदगी जी रहे हों साल्वे की ये तीसरी शादी और इस शादी का भौकाल विचलित करता है.

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तृणा को ब्रिटेन का बताया जा रहा है. हरीश से उनकी नजदीकियां तब बढ़ी जब हरीश साल्वे वेल्स और इंग्लैंड की अदालतों में रानी के वकील के रूप में काम कर रहे थे. फ़िलहाल ट्रिना को लेकर ज्यादा कुछ जानकारी सामने नहीं आई है. सिवाय इसके कि साल्वे और तृणा  के बीच उम्र का अंतर ठीक ठाक है. लेकिन इस केस में ये अंतर इसलिए भी मैटर नहीं करता, क्योंकि साल्वे सिर्फ कामयाब नहीं, बहुत कामयाब और नामचीन आदमी हैं.  ऐसा जिसकी तीसरी शादी में अंबानी और ललित मोदी जैसे बड़े और हाई फाई लोग आए.

हरीश ने ये तीसरी शादी की है तो जाहिर है पहले की दो बीवियों को तलाक दिया होगा और सब कुछ हंसते मुस्कुराते हुए सैटेल हो गया होगा लेकिन हम आम भारतीयों के मामले में कभी भी ऐसा नहीं होता. वैसे तो जैसा हम भारतीयों का मिजाज है हमारे में तलाक की गुंजाइश बहुत कम है. लेकिन बावजूद इसके,अगर हमारे मामले में तलाक हो गया, तो जो हमारा समाज है वो तलाक़शुदा महिला और पुरुष के जीवन में पुदीना करने की कोई टेक्नीक छोड़ता नहीं है.

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बीवी या पति से तलाक के बाद, हम आम आदमियों को समाज से इतने ताने मिल जाते हैं कि उसे लगने लग जाता है कि वो अपने ऊपर गुनाह की पोटली धर कर चल रहा है.साथ ही वो ये भी महसूस करता है कि उसे कोई हक़ नहीं है कि तमाम अच्छे लोगों के बीच वो सांस ले सके. खैर ये आम आदमियों की समस्या है 'बड़े लोगों' के मामले में ऐसा नहीं होता तलाक हो भी गया तो कपल दोस्त होते हैं उन्हें पार्टियों में जाम से जाम लड़ाते और हंसते मुस्कुराते हुए देखा जाता है.

अच्छा एक बात है. आदमी कुछ कह ले लेकिन कौन नहीं चाहता कि उसकी भी कई शादियां हों लेकिन बच्चों के डायपर, उनकी स्कूल फीस से लेकर पत्नी के खर्च और बाकी की जिम्मेदारियां उसपर इतना टेंशन रहता है कि वो भली प्रकार जानता है कि शादी के गुण दोष क्या होते हैं. मान लिया जाए कि उसका तलाक हो गया है तो अपना इतिहास उसे पता ही रहता है, चूंकि वो पहले ही एक लफड़े से मुक्त हो चुका है जानता है कि दूसरे या तीसरे लफड़े में पड़ने में रिस्क भी है और साथ ही उसकी अपनी चुनौतियां अलग हैं.

हमें याद रखना चाहिए कि अमीर शादी भौकाल के लिए करते हैं. वहीं हम जैसे लोग शादी सिर्फ इसलिए करते हैं कि क्योंकि हम जहां रहते हैं वहां इसे हर कोई करता है और दिलचस्प ये कि हमारे समाज में इसे करने के लिए अलग अलग बहाने लोगों द्वारा दिए जाते हैं. मानिये न मानिये मगर बहुत ज्यादा अमीर लोगों का जो शादी के प्रति नजरिया है वो बहुत जटिल और बहुआयामी विषय तो है ही साथ ही कई फैक्टर भी होते हैं  जिन्हें ध्यान में रखकर कोई सुपर रिच व्यक्ति शादी करने को बेक़रार रहता है. 

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अमीर लोग बार बार, कई बार इसलिए शादी करते हैं कि ये चीज उनके स्टेटस सिंबल पर सीधा असर डालती है. वहीं जब बात हमारी होती है तो हमें तो हमारा परचून वाला भी ढंग से उधार नहीं देता तो हमारे में तो स्टेटस सिंबल का तो कोई कांसेप्ट ही नहीं है. हम फिर इस बात को कहेंगे कि हमारे में शादी सिर्फ इसलिए होती है क्योंकि हमारे आस पास जितने लोग होते हैं उन्होंने शादी की होती है. 

क्योंकि अमीरों के केस में तलाक के मामले हमारे आपके अनुपात में कहीं अधिक होते हैं. अक्सर ही उन्हें अपनी जायदाद की टेंशन में देखा गया है. वो पहले ही इसके लिए समझौते कर देते हैं और निपटारा सहमति और हंसी ख़ुशी से होता है लेकिन हमारे में ऐसा नहीं है. हम पहले ही इस बात को कह चुके हैं कि हमारे समाज में पति पत्नी भले ही एक दूसरे को एक फूटी आंख न भा रहे हों लेकिन घर वाले बाहर वाले अड़ोसी पड़ोसी सब बस इसी जुगत में रहते हैं कि सब ठीक हो जाए बाकी हमारे में कोई खास समझोता इसलिए भी नहीं होता क्योंकि हमें आटा, दाल, दूध और नमक जैसी सभी चीजों की कीमतें पता हैं.

तमाम बड़े लोग इसलिए बार बार लगातार शादी करते हैं क्योंकि उन्हें अपनी ब्लड लाइन की बड़ी फ़िक्र रहती है. वैसे शादी कर वंश बढ़ाने की परंपरा का पालन तो हम भी करते हैं लेकिन ये हमारे लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. ध्यान रहे हममें तमाम लोग हैं जो आज भी यही मानते हैं कि बच्चे भगवान की देन हैं. 

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बात शादी और अमीरों और उन अमीरों की  हम आदमियों से तुलना पर हुई है. तो अकसर ही देखा जाता है कि अमीर लोग देर से शादी करते हैं. कारण बनता है उनका करियर कमिटमेंट. ये लोग अपने करियर के प्रति हमारे आपके मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर होते हैं. बाकी गंभीर तो हम भी हैं लेकिन जीवित रहते हमारे यहां मां बाप को पोते पोतियों का सुख देना होता है. जोर जबरदस्ती में हमारे यहां शादी करा दी जाती है. 

हरीश साल्वे के मामले ने हमें अमीरों या बड़े आदमियों की उस अदा से फिर परिचित करा दिया जिसमें वो कई बार शादी करते हैं. ऐसा करते हुए ये अलग अलग कारणों का हवाला देते हैं. मगर बात जब हमारी आती है तो हम अपनी एक ही शादी में इतना कुछ भोग चुके होते हैं कि आगे किसी तरह के रिष में पड़ने की न तो हमारी हिम्मत ही होती है और न ही मन. 

बड़े लोगों द्वारा शादी करने की एक बड़ी वजह उनका वो नजरिये रहता है जिनमें वो कोई बड़ा सामाजिक परिवर्तन लाना चाहते हैं. ऐसे में जब केस हमारा रहता है तो हमारी तो खुद हमारे घर वाले नहीं सुनते. सीधी बात ये है कि परिवर्तन टाइप चीजें न तो हमारे लिए हैं और न ही ये हमें शोभा ही देती हैं.

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इस चीजों के अलावा भी तमाम कारण हैं जिनके चलते अमीरों में न केवल शादी बल्कि कई-कई करने की इच्छा होती है. हरीश साल्वे को ही देख लीजिये इन्होंने 69 जैसी उम्र में शादी की. भरपूर मीडिया अटेंशन भी मिला. और साथ ही ये शादी सोशल मीडिया पर ही ट्रेंड बनी हुई है. खुद सोच के देखिये अगर साल्वे की जगह हम लोग होते तो क्या होता? अरे भाई साहब घर मुहल्ले के अलावा बात रिश्तेदारों में जाती. तरह तरह की बातें होती. अलग अलग ओपिनियन बनते और उनका सार यही होता कि इस दुनिया में लंका अगर किसी की ;लगी है तो वो हम हैं. 

कुल मिलाकर हरीश साल्वे और तृणा को शादी के बंधन में बंधा देखने वाले हम लोग भी अंतर्मन के किसी कोने से कुछ ऐसा ही मिलता जुलता और तूफानी करना चाहते हैं. लेकिन हमारा जीवन इतना कुछ झेल चुका होता है कि फिर कोई नया रिस्क लेने का मन नहीं करता और हम ये सोचकर खुश हो जाते हैं कि शादी का लड्डू है ही ऐसा जो खाए वो पछताए, जो न खाए वो पछताए. बाकी हरीश साल्वे को बधाई, बतौर आम आदमी हमें उम्मीद है 69 साल की उस उम्र में वो अपनी शादी में बंधे रहेंगे मगर क्योंकि वो 'बड़े आदमी' हैं टिके रहें वो बड़ी बात है. 

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