झारखंड में लगातार चले आ रहे राजनीतिक उथल-पुथल और अनिश्चितता के बादल तो छंट गए हैं, लेकिन 5 फरवरी को फ्लोर टेस्ट जीतने के बाद भी BJP और JMM के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा की मुश्किलें भी कम होती नहीं दिख रही हैं. पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने विश्वासमत के दौरान अपनी गिरफ्तारी को लेकर ईडी-बीजेपी और राजभवन को कठघरे में खड़ा किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी में राजभवन भी साजिश में शामिल है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अब किसी जनप्रतिनिधि की गिरफ्तारी राष्ट्रपति भवन, संसद भवन और विधानसभा से भी हो सकती है. हेमंत सोरेन ने यहां तक कहा कि जिस जमीन के घोटाले के आरोप में उनकी गिरफ्तारी की गई है, उसके दस्तावेज ईडी या बीजेपी दिखा दे तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे. साथ ही झारखंड भी छोड़ देंगे.
बता दें कि 7 फरवरी को ईडी ने हेमंत सोरेन की 5 दिनों की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद पीएमएलए कोर्ट में पेश किया तो कारोबारी विनोद सिंह की सोरेन के साथ की गई चैट्स को भी कोर्ट के सामने पेश किया. लिहाजा कोर्ट ने हेमंत सोरेन की रिमांड 5 दिनों के लिए और बढ़ा दी थी. अब बताया जा रहा है कि हेमंत सोरेन को विनोद सिंह, राजस्व कर्मचारी भानुप्रताप और पूर्व मीडिया सलाहकार अभिषेक पिंटू को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की गई है. भानुप्रताप को बरियातू स्थित उस जमीन पर भी ले जाया गया, जिसके आधार पर सोरेन की गिरफ्तारी हुई थी.
बता दें कि ईडी की टीम ने हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास से बीएमडब्ल्यू बरामद की थी. उस बीएमडब्ल्यू का रजिस्ट्रेशन कांग्रेस सांसद धीरज साहू के गुरुग्राम स्थित मानेसर आवास के एड्रेस पर था. लिहाजा 10 फरवरी को सांसद धीरज साहू को भी समन भेजा गया है.
12 फरवरी को हेमंत सोरेन की रिमांड अवधि कोर्ट बढ़ाती है या नहीं, ये फिलहाल तय नहीं है. लेकिन ये तय माना जा रहा है कि ईडी रिमांड बढ़ाने की मांग जरूर करेगी. ईडी कई चैट्स के तेजी से जांच कर रही है और उसके तार जिस तरह जोड़ रही है, जानकार बताते है कि हेमंत सोरेन को तुरंत राहत मिल जाए, ऐसा होते नहीं दिख रहा है.
जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन अगर जल्द ही जेल से बाहर नहीं निकलते हैं, तो आने वाले लोकसभा चुनाव और साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी गहर असर पड़ सकता है. क्योंकि पिछले चुनाव में हेमंत सोरेन ने अकेले ही प्रचार की कमान संभाली थी. अगर हेमंत सोरेन जल्द जेल से बाहर नहीं निकलते हैं तो पार्टी को उनकी फिजिकल तौर पर गैर मौजूदगी निश्चित तौर पर खलेगी.
जेएमएम सहानभूति कार्ड खेलकर हेमंत सोरेन के खिलाफ हो रही कार्रवाई को भुनाने में लगी हुई है, लेकिन बीजेपी भी जेएमएम और कांग्रेस के खिलाफ इस नैरेटिव को सेट करने में लगी है कि आदिवासियों के हित की बात करने वाली ये पार्टियां ही आदिवासियों को ही ठग रही हैं. साफ है कि बीजेपी आने वाले चुनाव में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जेएमएम और कांग्रेस को घेरेगी. धीरज साहू भी ईडी जांच के लपटे में आ गए हैं. उनके ठिकानों से आईटी ने 351 करोड़ रुपए बरामद किए थे. एक ओर जहां एजेंसी कनेक्शन ढूंढ रही है, वहीं बीजेपी ने भ्रष्टाचार का मुद्दा ढूंढ निकाला है.