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संजय सिंह की गिरफ्तारी को बड़ा मुद्दा बनाने से चूक गया INDIA गठबंधन!

आप नेता संजय सिंह राज्य सभा के सदस्य हैं. इंडिया गठबंधन के लिए एक्टिव भी रहे हैं. इंडिया गठबंधन ने कोशिश की होती संजय सिंह की गिरफ्तारी एक बहुत बड़ा मुद्दा बन गया होता. विपक्ष अपनी ताकत दिखाने का मौका चूक गया.

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आप नेता संजय सिंह
आप नेता संजय सिंह

आप नेता और राज्य सभा सदस्य संजय सिंह की गिरफ्तारी को बड़ा मुद्दा बनाकर इंडिया गठबंधन एनडीए सरकार को बैकफुट पर ला सकता था. पर गठबंधन में शामिल दलों के बीच आपसी तालमेल का अभाव और एक संगठन का भाव डिवेलप न हो सकने के चलते इंडिया ब्लॉक एक बहुत बड़ा मौक चूक गया. गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के रूप कांग्रेस पार्टी अपनी व्यकितगत लाभ दरकिनार करके बड़े भाई की भूमिका में आने से वंचित रह गई. कांग्रेस ने बदले के भाव से काम किया और पंजाब में कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का बदला लेती दिखी. दूसरी तरफ इंडिया में शामिल अन्य दलों ने भी ऐसी प्रतिक्रिया नहीं दी जिसे सरकार पर दबाव बन सके.आश्चर्यजनक है कि न्यूजक्लिक पत्रकारों पर हुई कार्रवाई पर भी इंडिया ब्लॉक का कोई ज्वाइंज स्टेटमेंट नहीं आया.

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कांग्रेस ने अपना मन बनाने में 24 घंटे का समय लिया

संजय सिंह की गिरफ्तारी के 24 घंटे बाद आए कांग्रेस के रस्‍मी बयान ने पार्टी का मंतव्य स्पष्ट कर दिया है. इसके पहले कांग्रेस ने मनीष सिसौदिया की गिरफ्तारी पर चुप रहना ही बेहतर समझा था. मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर समूचा विपक्ष मिलकर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर पीएम को पत्र लिखा था, जिस पर कांग्रेस ने हस्ताक्षर नहीं किए. यही नहीं दिल्ली कांग्रेस ने तो सिसोदिया के जेल पहुंचने पर खुशी के पोस्टर भी लगाए थे. पर वो उन दिनों की बात थी जब इंडिया गठबंधन अस्तित्व में नहीं आया था. इंडिया गठबंधन बनने के बाद आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच स्थितियां उस समय खराब हो गईं जब पंजाब कांग्रेस के नेता सुखपाल सिंह खैरा को आप सरकार ने गिरफ्तार कर लिया. कांग्रेस ने उसी समय आम आदमी पार्टी को चेताया था कि इंडिया गठबंधन के सदस्यों को बीजेपी जैसे प्रतिशोध की राजनीति से बचना होगा. कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने कहा कि हम हर तरह की प्रतिशोध की राजनीति का विरोध करते हैं, चाहे वो संजय सिंह की गिरफ्तारी हो या पंजाब में किसान नेता खुखपाल खैरा और पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सैनी की गिरफ्तारी हो.

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विपक्ष के किसी भी दल ने धरना प्रदर्शन लेवल या बंद की बात नहीं की

विपक्ष की ओर से तमाम बयान आए वो केवल केंद्र की मोदी सरकार की निंदा तक ही सीमित रहे. यह आम आदमी पार्टी का दूसरे दलों से कटा होना है या अपने सहयोगी दलों के साथ उसका व्यवहार ही है कि संजय सिंह की गिरफ्तारी के खिलाफ कहीं से कोई ऐसी आवाज नहीं आई जिससे केंद्र सरकार पर दबाव बनता. एक राष्ट्रीय गठबंधन में शामिल एक पार्टी का मुखर सदस्य जो हर गठबंधनों में शामिल रहा हो और विपक्ष की एकता की कोशिश में लगतार लगा रहा हो उसके लिए कहीं से भी मजबूत आवाज न आना इंडिया गठबंधन की इमेज को कमजोर करने के लिए काफी है. ऐसे मौके पर इंडिया गठबंधन कम से कम एक बैठक बुलाकर सर्वसम्मत से कोई प्रस्ताव तो पारित ही कर सकता था. यही नहीं इस मौके को हथिया लेना चाहिए था. सरकार पर इतना दबाव बनाया  जा सकता था कि उसकी बोलती बंद हो जाए. पूरे देश में सभी पार्टियां मिलकर धरना प्रदर्शन कर सकतीं थीं. भारत बंद का आह्वान किया जा सकता था. एक सांसद की गिरफ्तारी वो भी ऐसे मामले में जिसमें देश की सर्वोच्च कोर्ट कह रही है कि इसके पहले गिरफ्तार किए गए दिल्ली सरकार के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई मामला बनता दिख ही नहीं रहा है. इंडिया गठबंधन के सामने एक बहुत बड़ा मौका आया था एनडीए गठबंधन से आगे निकलने का जिसे वो खो चुका है. अगर संजय सिंह के लिए सभी दल एक हो कर लड़े होते तो हो सकता था कि आगे के दिनों में सरकार इस तरह ईडी और सीबीआई का तथाकथित दुरुपयोग करने से पहले  सौ बार सोचती.

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आम आदमी पार्टी इंडिया इंडिया करने लगी

संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी में गुणात्मक बदलाव दिखा है. गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शनों में संजय सिंह की गिरफ्तारी को इंडिया गठबंधन पर हमला बताया गया. आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा कि जबसे इंडिया गठबंधन अस्तित्व में आया सरकार चिढ़ कर ऐसे हमले कर रही है. अरविंद केजरीवाल ने भी अपने बयान में इंडिया गठबंधन को जोड़ा. अब सवाल वही है कि क्‍या इंडिया गठबंधन भी संजय की गिरफ्तारी को अपने ऊपर हमला मानता है?

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