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उदयनिधि स्टालिन के सनातन पर बयान से 'INDIA' में धर्म संकट, सभी दलों के अलग-अलग सुर

INDIA ग्रुप के लिए सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसी थी, सनातन धर्म को लेकर डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन की बातों पर तो शोले ही बरसने लगे हैं. गठबंधन के नेताओं को बोलते नहीं बन पा रहा है. कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी तक सभी अलग बगलें झांक रहे हैं - नीतीश कुमार और उद्धव ठाकरे की तो पूछिये मत.

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कांग्रेस के साथ साथ उदयनिधि स्टालिन ने INDIA के सारे नेताओं को फंसा दिया है
कांग्रेस के साथ साथ उदयनिधि स्टालिन ने INDIA के सारे नेताओं को फंसा दिया है

विपक्षी गठबंधन 'INDIA' तो पैदा होने से पहले ही बीजेपी नेतृत्व के निशाने पर आ चुका था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले तेज कर दिए थे, और बीजेपी नेता अमित शाह गठबंधन में शामिल सभी दलों को ठिकाने लगाने की तरकीबें तैयार करने लगे थे लेकिन सनातन धर्म का नाम लेकर उदयनिधि स्टालिन ने तो संघ और वीएचपी सहित सारे हिंदू संगठनों को ललकार दिया है.

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बाकी चीजें तो INDIA ग्रुप के लिए सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसी थी, उदयनिधि स्टालिन की बातों पर तो शोले ही बरसने लगे हैं. उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद INDIA के सहयोगी नेताओं को बोलते नहीं बन पा रहा है. कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी तक सभी अलग अलग बगलें झांक रहे हैं - और नीतीश कुमार तो जैसे बिलावजह ही निशाने पर आ गए हैं. इस मुद्दे पर जेडीयू की खामोशी और भी भारी पड़ रही है.

उदयनिधि अपने बयान पर कायम हैं, और अपना बचाव करने में सक्षम भी हैं. तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि स्टालिन की बातें INDIA के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं, क्योंकि डीएमके इस नए गठबंधन की एक मजबूत पार्टनर है, और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पसंदीदा पार्टी भी बनी हुई है. भारत जोड़ो यात्रा में डीएमके शुरू से लेकर आखिर तक कदम कदम पर मौजूद नजर आई थी.

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देखा जाए तो तमिलनाडु में एमके स्टालिन ने ऐसी मोर्चेबंदी तो कर ही रखी है कि बीजेपी पांव रखने की जगह बनाने के लिए भी मन मसोस कर रह जा रही है. इस पैमाने पर देखें तो डीएमके नेतृत्व, टीएमसी और JMM सहित गठबंधन के सभी दलों की तुलना में मजबूती से मोर्चा संभाल रहा है. 

असल में सनातन धर्म को लेकर उदयनिधि स्टालिन का कहना है कि ये मलेरिया और डेंगू की तरह है, और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, बजाय इसका विरोध भर करने के. उदयनिधि स्टालिन, दरअसल, क्रिश्चियन हैं - और उनको अपने धार्मिक होने पर गर्व भी है. 

जब बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने उदयनिधि स्टालिन को घेरा तो वो और खुल कर सामने आ गए, 'मैंने कभी भी सनातन धर्म का पालन करने वाले लोगों के नरसंहार का आह्वान नहीं किया...सनातन धर्म एक सिद्धांत है, जो लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटता है...सनातन धर्म को उखाड़ फेंकना मानवता और मानव समानता को कायम रखना है. मैं अपने कहे हर शब्द पर दृढ़ता से कायम हूं.'

कांग्रेस की बड़ी उलझन

उदयनिधि स्टालिन ने गठबंधन साथियों की हालत खराब कर दी है, लेकिन कुछ तो बोलना ही होगा. सबसे ज्यादा मुश्किल तो कांग्रेस को हो रही है, न उगलते बन रहा है, न निगलते बन रहा है. न सीधे सीधे सपोर्ट करते बन रहा है, न ही पल्ला झाड़ते बन रहा है. 

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कांग्रेस के बाकी नेताओं की तरह केसी वेणुगोपाल से जब उदयनिधि के स्टैंड पर सवाल पूछा जाता है तो कहते हैं, "एक्चुअली, हमारा व्यू क्लियर है... सर्व धर्म समभाव... ये कांग्रेस की आइडियोलॉजी है... लेकिन ये भी समझना होगा कि हर राजनीतिक दल को अपनी बात कहने की आजादी है... हम सभी की आस्था का सम्मान करते हैं."

जब से ये बवाल शुरू हुआ है, मल्लिकार्जुन खड़गे को भी उनके एक पुराने बयान को लेकर बीजेपी नेता घसीट ले रहे हैं. बीजेपी नेता कांग्रेस अध्यक्ष के उस बयान की याद दिला रहे हैं, जिसमें उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में लौटे तो देश में सनातनियों का, सनातन धर्म का तथा सनातन कर्मियों की सरकार बन जाएगी. 

केसी वेणुगोपाल तो 'थोड़ा बचाव और थोड़ी दूरी' बनाने वाली नीति पर चल रहे हैं, लेकिन कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम तो समझा रहे हैं कि उदयनिधि की टिप्पणी को सनातन धर्म के नरसंहार से जोड़ना शरारतपूर्ण है.

कांग्रेस के ही नेता राशिद अल्वी की बातों से तो लगता है जैसे बीजेपी की राजनीति ही उदयनिधि को ऐसी बातें करने के लिए मजबूर कर रही है. कहते हैं, 'हमारा संविधान धर्मनिरपेक्ष इसलिए है क्योंकि विभिन्न धर्मों के लोग यहां रहते हैं... लेकिन पिछले नौ साल में बीजेपी ने धर्म का राजनीतिकरण किया है... इसलिए कोई आकर धर्म को लेकर ऐसी बातें कहता है. 

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हालांकि, राशिद अल्वी दबी जुबान ये भी मानते हैं कि उदयनिधि ने गलत बात कही है. राशिद अल्वी कह रहे हैं, 'जिसने ये सब कुछ कहा है वो गलत है, लेकिन धर्म के राजनीतिकरण के लिए बीजेपी जिम्मेदार है.'

विपक्षी गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी का जुड़ना बहुत बड़ी बात है. ये बात अलग है कि अब भी किसी को पक्का यकीन नहीं है कि अरविंद केजरीवाल सबके साथ कब तक बने रहेंगे? 

आम आदमी पार्टी के लिए तो मुसीबत है

ये समझना तो मुश्किल है कि 'एकला चलो' की राह पर चलते हुए अरविंद केजरीवाल के साथी नेताओं की क्या राय रहती, लेकिन अभी तो मिजाज बदले बदले ही नजर आते हैं. ऐसा इसलिए भी क्योंकि जिस पार्टी के नेता जय श्रीराम के नारे लगाते हैं, रुपये को मजबूत करने के लिए लक्ष्मी गणेश की तस्वीर लगाने की वकालत करते हों - और जिनका चुनावों में अयोध्या दर्शन कराने पर पूरा जोर रहता हो, आप नेता संजय सिंह का बयान AAP की हालिया राजनीतिक लाइन से बिलकुल मेल नहीं खाती. 

राज्य सभा सांसद संजय सिंह अब समझाने की कोशिश कर रहे हैं, भारत में अलग-अलग धर्म, जातियां और भाषाएं हैं... ये हमारी खूबसूरती है कि इसके बावजूद हम एक साथ रहते हैं...उदयनिधि के बयान पर मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि भारत में हमें हर धर्म का सम्मान करना चाहिए - और किसी को भी दूसरे के धर्म पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिये.'

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कह सकते हैं, आम आदमी पार्टी कांग्रेस से थोड़ा अलग लाइन ले रही है. थोड़ा सख्त लाइन भी है. राशिद अल्वी की तरह संजय सिंह भी सनातन धर्म को बदनाम करने की तोहमत बीजेपी पर मढ़ रहे हैं.

आरजेडी का खुला सपोर्ट है

आरजेडी की तरफ से सलाहियत है, कभी-कभी हमें प्रतीकों और मुहावरों के भीतर जाकर चीजों को समझना चाहिये. आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा तो खुल कर उदयनिधि स्टालिन का बचाव कर रहे हैं, हिंदुस्तान का एक मिजाज है... सनातन में कई विकृतियां हैं... जाति व्यवस्था क्या अच्छी चीज है? सीवर में उतरने वाले की जाति क्यों नहीं बदलती? किसी ने कुछ कह दिया तो उसे लेकर उड़ गए!

अखिलेश यादव क्या डिंपल की बात पर कायम रहेंगे?

इसी साल जनवरी में समाजवादी पार्टी नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का वो बयान तो आपको याद ही होगा कि रामचरितमानस की चौपाइयों को बैन कर देना चाहिये - लेकिन हफ्ते भर पहले ही मैनपुरी सांसद डिंपल यादव का अलग ही बयान सामने आया था - 'हम लोग हिंदू हैं... हिंदू धर्म सनातन धर्म है... सनातन धर्म में कोई दुश्मन नहीं होता.'

उदयनिधि स्टालिन का सवाल जब सपा नेता शिवपाल यादव के सामने उठा तो ये कह कर बच निकले कि अभी उन लोगों का सारा ध्यान उपचुनाव पर है. बोले, अभी हम उसके बारे में कुछ नहीं बोलेंगे... हमें इन बातों में अभी नहीं उलझना है. केवल संगठन के साथ साथ पार्टी को मजबूत करना है, और बीजेपी को हटाना है.

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TMC ने सख्त निंदा की

तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने उदयनिधि के बयान की निंदा करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में ऐसे बयानों की कोई जगह नहीं है. हम इसकी सख्त निंदा करते हैं. जो कोई भी ऐसा बयान देता है, हमें उसकी निंदा करनी चाहिए. भारत में सभी धर्म के लोग मिलजुलकर रहते हैं. INDIA गुट का ऐसे बयानों से कोई लेना देना नहीं है.

उद्धव ठाकरे को फिर इम्तिहान देना होगा

लेकिन INDIA नेताओं की तीसरी मीटिंग होस्ट करने वाले उद्धव ठाकरे उदयनिधि स्टालिन के बयान से खफा बताए जा रहे हैं. मातोश्री में अपने गुट के शिवसेना नेताओं के साथ उद्धव ठाकरे ने चर्चा भी की है - और बताया जा रहा है कि सनातन धर्म के मुद्दे पर वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बात भी करने वाले हैं. 

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