scorecardresearch
 

पंजाब में डेरा जमाए केजरीवाल क्या अब पूरी तरह सुपर CM की भूमिका में आ गए हैं?

विपश्यना साधना से तरोताजा होकर अरविंद केजरीवाल पंजाब में खासे एक्टिव नजर आ रहे हैं. फील्ड में भी और आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं की मीटिंग में भी. लगता तो ऐसा है जैसे दिल्ली की हार के बाद अरविंद केजरीवाल ने पंजाब का कामकाज संभाल लिया है.

Advertisement
X
अरविंद केजरीवाल ने विपश्यना से आते ही पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है, और भगवंत मान की टीम उसे सफल बनाने में जुटी है.
अरविंद केजरीवाल ने विपश्यना से आते ही पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है, और भगवंत मान की टीम उसे सफल बनाने में जुटी है.

किसी भी राजनीतिक दल में नेता की ताकत उसके दबदबे से तय होती है. ऐसी सूरत में संवैधानिक पद पर बैठा हुआ नेता की हैसियत भी ताकतवर नेता के सामने कम हो जाती है. और, यही वजह रही कि कांग्रेस में सोनिया गांधी के दबदबे के चलते मनमोहन सिंह को 'एक्सीडेंटल पीएम' तक करार दिया गया था. 

Advertisement

हाल फिलहाल ऐसी ही तस्वीर पंजाब में भी देखने को मिल रही है, जहां विपश्यना साधना के बाद अरविंद केजरीवाल पूरे दमखम से डटे हुए नजर आ रहे हैं. अरविंद केजरीवाल के पंजाब में हद से ज्यादा सक्रिय होने की वजह से मुख्यमंत्री भगवंत मान की भूमिका काफी सीमित लगने लगी है - क्योंकि अरविंद केजरीवाल एक बार फिर पंजाब के सुपर सीएम के तौर पर व्यवहार करने लगे हैं. 

भगवंत मान के लिए राहत की बात बस इतनी ही है कि अरविंद केजरीवाल ने बोल दिया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार में मुख्यमंत्री तो वही रहेंगे. अपने कार्यकाल तक भी, और अगला चुनाव जीतने के बाद भी. पंजाब में विधानसभा के चुनाव 2027 में होने हैं.  

पंजाब की कमान किसके हाथ में है?

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीनियर अफसरों की मीटिंग बुलाई थी, जिस पर उनके विरोधियों ने घेर लिया था - तब पंजाब के विपक्षी नेताओं ने अरविंद केजरीवाल पर दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिये पंजाब चलाने का आरोप लगाया था, और अरविंद केजरीवाल को पंजाब का सुपर सीएम तक कहा जाने लगा था. उन दिनों वो दिल्ली के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, लेकिन सारा कामकाज डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के जिम्मे हुआ करता था. 

Advertisement

पंजाब के अफसरों को दिल्ली बुलाकर मीटिंग करने को लेकर पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू , बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा और अकाली दल के दलजीत चीमा ने सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल को घेरा था. और ऐसा करने की बड़ी वजह ये भी रही कि जब अरविंद केजरीवाल पंजाब के मुख्य सचिव और बिजली विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ मीटिंग कर रहे थे, तब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान वहां मौजूद नहीं थे.  
 
और, दिल्ली चुनाव में हार के बाद भी अरविंद केजरीवाल ने भगवंत मान और उनके मंत्रियों, विधायकों दिल्ली बुलाया तो फिर से वो वाकया याद आ गया था. तब तो भगवंत मान को हटाकर किसी और को मुख्यमंत्री बनाये जाने की भी जोरदार चर्चा चल पड़ी थी - लेकिन, पंजाब पहुंच कर अरविंद केजरीवाल ने साफ कर दिया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार के मुखिया भगवंत मान ही रहेंगे. 

लेकिन, भगवंत मान तो लगता है कहने भर को ही मुख्यमंत्री रह गये हैं. भले ही भगवंत मान के पास कैबिनेट मीटिंग का अधिकार बरकरार हो, लेकिन बाकी सारी मीटिंग और फील्ड में तो हर जगह अरविंद केजरीवाल ही नजर आ रहे हैं.

Advertisement

दिल्ली से रिमोट के जरिये पंजाब को कंट्रोल करने की बात तो बहुत पुरानी हो चुकी है, अब तक लगता है अरविंद केजरीवाल ने मौके पर मौजूद होकर ही पूरी कमान अपने हाथ में ले लिया है. 

पंजाब में कितने CM हैं?

2012 से 2017 के बीच जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तो सत्ता के गलियारों में ‘ढाई मुख्यमंत्री’ के किस्से सुनाये जाते थे. उस दौरान मुख्यमंत्री तो अखिलेश यादव ही हुआ करते थे, लेकिन समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं का बहुत ज्यादा दखल महसूस किया जाता था. 

मजे की बात ये थी कि ढाई मुख्यमंत्री के कंसेप्ट में अखिलेश यादव का हिस्सा आधा ही माना जाता था, क्योंकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव और उनके भाई और मित्रों का हद से ज्यादा दबदबा और दखल हुआ करता था. 

अब अगर तब के यूपी के हिसाब से देखें तो सवाल उठता है कि पंजाब में फिलहाल कितने सीएम हैं? 

यूपी वाली थ्योरी तो यही बताती है कि अखिलेश यादव की तरह भगवंत मान ही आधे वाली कैटेगरी में आते होंगे - क्योंकि, अरविंद केजरीवाल के अलावा भगवंत मान के सलाहकार बिभव कुमार और पंजाब के प्रभारी मनीष सिसोदिया भी तो पंजाब में ही डटे हुए हैं. 

Live TV

Advertisement
Advertisement