युवावस्था वह जीवन है जिसका सृजन अभी भी हो रहा है. अभी भी यह ऐसी अवस्था में है जहां यह बहुत अधिक अभिमानी और खोया हुआ नहीं है. युवावस्था ऐसा जीवन है जो आशा, खोज और जीवन के बारे में सच्चाई जानने की लालसा का संकेत करता है.
‘सत्य’ शब्द का इस्तेमाल कई तरीकों से किया गया है और ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सत्य दूसरी दुनिया की कोई चीज है तो आखिर सत्य क्या है? इसे इस तरह से देखें: जीवन के किसी भी क्षेत्र में जो सचमुच काम करता है, वह सत्य है. उदाहरण के लिए, अगर आप चलना चाहते हैं तो क्या अपने पैरों पर चलना बेहतर है या अपने सिर पर? अगर आप अपने सिर के बल चलेंगे तो आप ज्यादा दूर नहीं चल पाएंगे. आप बस गंजे हो जाएंगे. जाहिर है, अपने पैरों पर चलना बेहतर है. मैं एक बहुत ही सरल उदाहरण दे रहा हूं, लेकिन सत्य का सार यही है. जीवन के अलग-अलग आयामों में, ऐसा क्या है जो वाकई काम करता है? इसे तलाशना ही सत्य की तलाश है.
भारत एक ऐसी संस्कृति रही है जो हमेशा से साधकों की भूमि रही है, कभी विश्वास करने वालों की भूमि नहीं रही. प्रश्न यह है: क्या आपके पास हर चीज के बारे में धारणाएं और ठोस विचार हैं या आप जीवन के किसी भी पहलू के बारे में सत्य की तलाश करने के लिए तैयार हैं क्योंकि आप चाहते हैं कि वह सर्वोत्तम संभव तरीके से घटित हो?
युवाओं को सत्य का खोजी बनना चाहिए
भारत का सौभाग्य है कि देश की 50 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है. धरती पर किसी दूसरे देश के पास ऐसा सौभाग्य नहीं है, लेकिन इसे एक वास्तविक सौभाग्य बनाने के लिए युवाओं को सत्य का खोजी बनना चाहिए. उन्हें किसी विचारधारा, विश्वास प्रणाली या दर्शन से चिपके नहीं रहना चाहिए. युवा होने का यही अर्थ है: आप उस चीज से समझौता करने को तैयार नहीं हैं जो झूठ है. आप यह पता लगाना चाहते हैं कि आपके शरीर, आपके मन, आपकी भावना, आपकी जीवन ऊर्जा, बाकी दुनिया के साथ आपके रिश्ते - जीवन के हर क्षेत्र में क्या चीज वाकई काम करती है.
अगर यह खोज और तलाश छोड़ दी जाती है तो आप युवा नहीं रहेंगे. आप युवा होते हुए भी बूढ़े हो जाते हैं. आप ठहर जाते हैं और कब्र के लिए तैयारी करते हैं. आपकी जन्मतिथि तय नहीं करती कि आप युवा हैं या बूढ़े. क्या आपने जीवन के बारे में निष्कर्ष निकाल लिए हैं या आप अभी भी जीवन की प्रकृति को जानने के लिए खुले हैं और खोज रहे हैं - यही आपको युवा या बूढ़ा बनाता है. यह महत्वपूर्ण है कि हर जीवन युवा बना रहे. खासतौर पर इस देश और दुनिया के युवाओं के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप सत्य के खोजी हों, तभी आप युवा बने रहेंगे.
जिम्मेदारी की ओर आगे बढ़ें युवा
अब समय आ गया है कि दुनिया की आबादी, खासतौर पर युवा, धर्म से जिम्मेदारी की ओर बढ़ें. आप अपने जीवन से क्या बनाते हैं, वो 100% आपकी जिम्मेदारी है. वो सितारों, ग्रहों या ऊपर की शक्तियों की जिम्मेदारी नहीं है. इस जीवन को वैसा बनाना जैसे आप चाहते हैं, आपके हाथ में है. युवा होने की यही बुनियादी चीज है - आप जो कुछ भी हैं, आप उसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं. आप ऐसा जीवन नहीं बन गए हैं जो इस बारे में सितारों की ओर देखता है, "मैं दुखी क्यों हूं? मैं सफल क्यों नहीं हूं?" मेरा जीवन सुंदर क्यों नहीं है?" आप ऊपर की ओर नहीं देख रहे हैं. आप भीतर की ओर देखने और उत्तर खोजने के इच्छुक हैं. इसका मतलब है कि आप सत्य की खोज में हैं.
कई साल पहले स्वामी विवेकानंद ने कहा था, "मुझे 100 ऐसे युवा दीजिए जो सचमुच प्रतिबद्ध हों. मैं इस देश की सूरत बदल दूंगा." हमें ऐसे लाखों युवा पैदा करने के काबिल होना चाहिए जो वास्तव में यह जानने के लिए प्रतिबद्ध हों कि हमारे अस्तित्व की सच्चाई क्या है, हमारी सफलता और असफलताओं की सच्चाई क्या है, हमारे जीवन के सुंदर पहलुओं और कुरूपता की सच्चाई क्या है. अगर आप खोज नहीं करते, तो आप युवा नहीं हैं. जब आप युवा हैं तो बूढ़े मत बन जाइए.