7 अक्टूबर को शुरू हुआ हमास की दरिंदगी का खेल: सुबह 6.35 मिनट पर गाजा की ओर से दक्षिणी और सेंट्रल इजरायल पर अचानक रॉकेट हमले शुरू हुए. और उसी दौरान हमास के लीडर मुहम्मद जैफ ने दस मिनट का वीडियो संदेश ऑनलाइन जारी किया, जिसमें कहा गया कि उनका संगठन इजरायल पर बड़ा हमला करने जा रहा है. हमास की अल-कासिम ब्रिगेड ने जमीन और पैराग्लाइडर के सहारे अपने आतंकी दक्षिण इजरायल की यहूदी बस्तियों और उनके आसपास की सुरक्षा चौकियों पर हमला करने भेजे थे. इसे हमास ने Operation Al-Aqsa Flood का नाम दिया. इस बर्बर हमले में औरतों, बच्चों, बूढ़ों समेत किसी को नहीं बख्शा गया. इजरायल जब तक संभल पाता तब तक करीब 1300 लोग मार दिये गए. सबसे खौफनाक मंजर दक्षिणी इजरायल में हो रहे संगीत समारोह का था, जहां आतंकियों ने 260 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. करीब 200 लोगों को अगवा करके गाजा ले जाया गया, जो अब भी उनकी कैद में हैं. इजरायली लाशों को गाजा में घुमाया गया. खूब जश्न मना.
आतंकियों ने अपने बर्बर कारनामे खुद रिकॉर्ड किये और सोशल मीडिया और इंटरनेट पर शेयर किये. इसके बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा कि हमास के इस हमले को हम साधारण हमला नहीं मानते हैं. इसका जवाब भी कोई साधारण ऑपरेशन से नहीं दिया जाएगा. यह युद्ध है, और हम इस युद्ध की घोषणा करते हैं.
हमास के इस हमले को भारत समेत पश्चिमी दुनिया ने आतंकी हमला माना. और इजरायल के प्रति सहानुभूति जताई. लेकिन, कई इस्लामिक मुल्कों और फिलिस्तीन से सहानुभूति रखने वालों ने इस बर्बर हमले को इजरायल की कथित ज्यादतियों से जोड़ दिया.
8 अक्टूबर से इजरायल ने शुरू किया हमास के खिलाफ जंगी अभियान: यह संयोग ही था कि जिस दिन 1973 के यौम किपूर वॉर को 50 साल पूरे हो रहे थे, उसी दिन इजरायल ने अपने संविधान के आर्टिकल 40A के प्रावधान के तहत युद्ध की घोषणा की. हमास के खिलाफ इजरायली सैन्य अभियान को Operation Iron of Swords का नाम दिया गया. इस दिन एक ओर गाजा से इजरायल की तरफ रॉकेट हमले होते रहे, तो दूसरी तरफ इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमास के ठिकानों को निशाना बनाया. गाजा युद्ध भूमि में बदल चुका था.
लेकिन, दुनिया में इस जंग को लेकर डिप्लोमेटिक युद्ध भी छिड़ गया. एक तरफ पश्चिमी देश थे, तो दूसरी तरफ रूस और चीन के आरोप. इस्लामिक देशों में भी दो फाड़ नजर आई. ईरान, कतर ने फिलिस्तीन की आड़ में हमास का बचाव किया. सऊदी अरब, जॉर्डन ने संयम बरता. जबकि यूएई ने इजरायल के मारे गए नागरिकों के प्रति संवेदना जताई. इन सबके बीच अमेरिका ने अपने जहाजी बेड़े USS गेरार्ड फोर्ड को इजरायल की सुरक्षा के लिए पूर्वी भूमध्यसागर की ओर रवाना कर दिया.
9 अक्टूबर को हिजबुल्ला जंग में कूदा, इधर गाजा की नाकेबंदी का एलान : ईरान समर्थित लेबनान का शिया आतंकी संगठन हिजबुल्ला हमेशा से हमास को समर्थन देता आया है. हमास पर हमला किया गया तो हिजबुल्ला ने उत्तरी इजरायल पर मोर्टार दागे. इस सबके बीच इजरायल के रक्षामंत्री योव गेलांट ने गाजा पट्टी की पूरी तरह घेराबंदी का एलान कर दिया. साथ ही यह भी कहा कि वे गाजा को बिजली, खाना-पान और फ्यूल की आपर्ति बंद करने जा रहे हैं.
10 अक्टूबर से गाजा की तबाही की तस्वीरें आने लगीं: पूरे गाजा पर इजरायली वायुसेना ने हमले तेज किये. गाजा में रह रहे संयुक्त राष्ट्र के चार कर्मचारी भी इसका शिकार बने. हमास का ठिकाना रहीं कई बहुमंजिला ईमारतें जमींदोज़ कर दी गईं. इधर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इजरायल का साथ देने का वादा फिर दोहराया. और हमास के हमले को 'दरिंदों की हरकत' बताया.
11 अक्टूबर को गाजा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी तबाह: इजरायल पर हमले के बर्बर वीडियो हमास जारी करता रहा. तो दूसरी तरफ इजरायल से फ्यूल सप्लाई न होने के कारण गाजा के पावर प्लांट ने काम करना बंद कर दिया. इजरायली लड़ाकू विमानों ने गाजा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी को ढहा दिया. कहा जा रहा था कि यहीं पर हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमले की योजना बनाई और प्रैक्टिस की थी. गाजा से रिफ्यूजी को मिस्र भेजने की अमेरिका कोशिश कर रहा था, उसी दौरान इजरायल ने गाजा-मिस्र की राफा बॉर्डर क्रॉसिंग पर हमला कर दिया.
12 अक्टूबर तक इजरायल में हुए हमास आतंकियों के एनकाउंटर: इजरायल पर 7 अक्टूबर को हुए हमास के हमले के निशान 12 अक्टूबर तक मिटाए जाते रहे. कई बस्तियों में हमास के आतंकी छुपे हुए थे, जिन्हें ढूंढ ढूंढ कर मारा गया. इस ऑपरेशन में करीब 1500 आतंकी मारे गए. इजरायल ने इसी दिन सीरिया के एलेप्पो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया.
13 अक्टूबर को उत्तरी गाजा खाली करने की चेतावनी: इजरायल ने हमास के खिलाफ अपना अभियान तेज करते हुए उत्तरी गाजा में रह रहे लोगों को 24 घंटे का अल्टीमेटम जारी करते हुए दक्षिण गाजा की ओर चले जाने को कहा. यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली हमले से करीब ढाई लाख गाजा निवासी बेघर हो गए थे. इजरायल के अल्टीमेटम पर एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने मानवीय त्रासदी की चेतावनी दी.
14 अक्टूबर को इजरायल के साढ़े तीन लाख रिजर्व सैनिक मोर्चे पर जाने को तैयार: हमास के खिलाफ कार्रवाई जैसे जैसे तेज हुई, इजरायली नागरिकों में इसे लेकर भावनाएं भी उबाल लेती चली गईं. इजरायली सेना से रजिस्टर्ड करीब तीन लाख 60 हजार रिजर्व सैनिकों ने मोर्चे पर जाने के लिए कूच किया. गाजा से सटी सीमा पर कई रिजर्व सैनिक अपनी कारों से पहुंचे.
15 और 16 अक्टूबर को गाजा पर हमलों के बीच कूटनीति भी तेज: अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट्स एंटनी ब्लिंकन ने मिस्र, जॉर्डन की यात्रा कर अरब देशों के मिजाज जाने और इजरायल के समर्थन में हवा बनाई. जबकि, दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री कतर पहुंचे और वहां हमास की लीडरशिप से भी मिले. इन मुलाकातों के बीच अमेरिका ने अपने एक और विमान वाहक पोत USS आइजेनहावर को इजरायल की सीमा के नजदीक तैनाती पर भेज दिया.
17 अक्टूबर को गाजा के अस्पताल पर हमला और फिर आरोपों के वार: उत्तरी गाजा के अल अहली अस्पताल पर रात में अचानक हुए हमले ने करीब 500 लोगों की जान ले ली. इजरायली हवाई हमलों से बचने के लिए कई लोगों ने यहां शरण ले रखी थी. हमास ने इस हमले के लिए इजरायल को जिम्मेदार कहा, जबकि इजरायल ने रडार से जुटाए गए सबूतों के आधार पर कहा कि यह फिलिस्तीन इस्लामिक जेहाद संगठन (PIJ) के रॉकेट हमले का परिणाम है. यह रॉकेट इजरायल की ओर दागा गया था, लेकिन रास्ता भटककर अस्पताल पर गिर गया. अस्पताल पर यह हमला ऐसे समय हुआ, जबकि उसके अगले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के इजरायल, मिस्र, जॉर्डन और लेबनान दौरे का एलान किया गया था. वे फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास से भी मिलने वाले थे. इस हमले के बाद बाइडेन को अपना मिस्र, जॉर्डन और लेबनान दौरा निरस्त करना पड़ा है. फिलिस्तीनी राष्ट्रपति से मिलने का कार्यक्रम भी रद्द हो गया है.
18 अक्टूबर को इजरायल पहुंचे बाइडेन ने युद्ध का रुख निर्णायक बना दिया: गाजा अस्पताल पर हमले की पृष्ठभूमि में बाइडेन ने अमेरिका से इजरायल तक का सफर तय किया. तेल अवीव पहुंचकर उन्होंने इजरायल का समर्थन तो किया, लेकिन युद्ध के नियमों का हवाला भी दे डाला. साथ ही गाजा की मानवीय मदद के लिए सौ मिलियन डॉलर का एलान भी कर दिया. इस सबके बावजूद इजरायल ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह इजरायली सीमा से कोई मदद गाजा तक नहीं पहुंचने देगा. हमास की कैद में मौजूद सभी इजरायली बंधकों को बिना शर्त रिहा करना होगा. और सबसे पहले बंधकों के लिए इलाज के लिए रेड क्रॉस को इजाजत देनी होगी. बाइडेन की मौजूदगी में इजरायल के इस सख्त रुख ने बता दिया कि आने वाले दिनों में गाजा के हालात क्या होने वाले हैं. इन सबके बीच खबर आई कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी इजरायल दौरे पर जाएंगे.
19 अक्टूबर, यानी आज सुनक इजरायल पहुंच गए हैं. पश्चिमी देश और इजरायल का सहयोग बरकरार है. गाजा पर हमले जारी हैं. हमास की कैद में मौजूद इजरायलियों की रिहाई के अभी कोई आसार नहीं हैं. गाजा के नागरिकों का पलायन दक्षिण की ओर जारी है, लेकिन वे कहां जाएंगे अभी इस पर सवाल है. अमन की अनिश्चितता के बीच, तबाही का राज बुलंद है.