झारखंड से 2004 में कांग्रेस के 6 सांसद जीतकर संसद पहुंचे थे. इसके अलावा पार्टी का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में भी था. 2009 में भी कांग्रेस की झारखंड से मौजूदगी संसद में बरकरार रही. 2014 में भी अपर या लोअर हाउस में कांग्रेस रही. वहीं 2019 में गीता कोड़ा अगर लोकसभा में थीं तो राज्यसभा में पार्टी के साथ धीरज साहू थे.
अब पहली बार ऐसा हुआ है कि कांग्रेस का झारखंड से प्रतिनिधित्व न तो फिलहाल राज्यसभा में है और न ही लोकसभा में. लगभग 15 दिन पहले पार्टी की एकमात्र सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस के हाथ को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. बीजेपी ने गीता को सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार भी बनाया है. वहीं धीरज साहू का राज्यसभा का टेन्योर पूरा हो चुका है. यानी जो अभी सीटें खाली हुई हैं, उस पर कायदे से कांग्रेस की सीट खाली हुई था और पार्टी का वाजिब हक था.
यहां जेएमएम नेतृत्व वाली सरकार में कांग्रेस गठबंधन का अहम घटक भी है. पार्टी के पास 17 विधायक भी हैं, लेकिन उसकी वास्तिविक दावेदारी को किनारा कर दिया गया. उम्मीदवार INDIA गठबंधन के तरफ से जेएमएम के सरफराज अहमद को बनाया गया. सरफराज ने 11 मार्च को पर्चा भरा और निर्विरोध चुने भी गए यानी टेन्योर कांग्रेस राज्यसभा सांसद का पूरा हुआ लेकिन चयन जेएमएम के सफराज का हुआ. हालांकि सरफराज का बैकग्राउंड कांग्रेस का रहा है. वो बीपीसीसी के अध्यक्ष भी रहे हैं.
दरअसल, हेमंत सोरेन और पार्टी के निर्देश पर उन्होंने जब जेएमएम नेतृत्व वाली सरकार को जरूरत थी, तब गांडेय विधानसभा सीट को खाली किया था. बताया जा रहा है कि महागठबंधन विधायक दल की बैठक में कांग्रेस ने अपनी दावेदारी जताई थी, जिसको 29 विधायको वाली जेएमएम ने ठुकरा कर अपना उम्मीदवार राज्यसभा में उतारा. लिहाजा कांग्रेस का प्रतिनिधित्व झारखंड से राज्यसभा में भी खत्म हो गया. लोकसभा में रिप्रेंस्ट करने वाली गीता कोड़ा ने पहले ही पार्टी छोड़ दी है.
अब आने वाले लोकसभा चुनावों में भी सीट शेयरिंग में हो रही देरी पर कांग्रेस विधायक दल नेता आलमगीर आलम ने आजतक को बुधवार यानी 13 मार्च को बताया कि फॉर्मूला तय है. सीटों पर समझौता और बंटवारा भी हो चुका है. सिर्फ चंद दिनों की बात है, आधिकारिक घोषणा भी कर दी जाएगी. हालांकि सूत्र कहते हैं कि यहां भी जेएमएम ने बड़ा शेयर मांगा है. 14 में से 5 सीटों पर जेएमएम लड़ना चाहती है, जबकि 1-1 सीट वाम दल और आरजेडी को दिए जाने की बात है. यानी कांग्रेस के हिस्से 7 सीट आ सकती हैं.
बता दें कि कांग्रेस हर हाल में बीजेपी से टक्कर लेने के लिए जेएमएम का साथ चाहती है और जेएमएम के पास संख्या बल है. इसके चलते हर मामले में बीते कुछ समय से जेएमएम अपनी शर्तों पर हर कदम उठाती दिखती है. कांग्रेस के विधायकों के लाख विरोध के बावजूद पार्टी को चंपई सोरेन के मंत्री मंडल विस्तार के दौरान भी हेमंत कैबिनेट के तरह ही सिर्फ 4 बर्थ मिली, जबकि पार्टी विधायक 5वीं बर्थ, जो खाली पड़ी है, उसपर दावेदारी करते दिखे थे. साफ है कि जेएमएम अब INDIA गठबंधन में कम से कम झारखंड में तमाम फैसले लेने के मामले में अपना दबदबा रखती है. कांग्रेस को वर्तमान परिस्थितियों में समझौता करना पड़ रहा है.