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केजरीवाल भी क्या कांग्रेस के खिलाफ ममता जैसी ही खिचड़ी पका रहे हैं?

दिल्ली चुनाव में अपनी हार के लिए अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी के मुकाबले राहुल गांधी को ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं, और विपक्षी खेमे में ममता बनर्जी की तरह कांग्रेस के खिलाफ नेताओं को लामबंद करने लगे हैं - आदित्य ठाकरे से मुलाकात भी उसी मुहिम का हिस्सा है.

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अरविंद केजरीवाल भी अब ममता बनर्जी की तरह राहुल गांधी के खिलाफ अपनी मुहिम में जुट गये हैं.
अरविंद केजरीवाल भी अब ममता बनर्जी की तरह राहुल गांधी के खिलाफ अपनी मुहिम में जुट गये हैं.

विपक्षी खेमे में कांग्रेस के खिलाफ नेताओं की गोलबंदी तेज होने लगी है. ममता बनर्जी तो पहले से ही एक्टिव हैं, अब अरविंद केजरीवाल भी मुहिम में शामिल हो गये हैं - और महाराष्ट्र से उद्धव ठाकरे का भी समर्थन में खड़े हो गये लगते हैं.

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कांग्रेस के खिलाफ तो अरविंद केजरीवाल ने अपना तेवर दिल्ली चुनाव से पहले ही दिखा दिया था, जब राहुल गांधी आंबेडकर के मुद्दे पर अमित शाह के खिलाफ अभियान चला रहे थे. तब अडानी के मुद्दे पर दूरी बनाने विपक्षी नेताओं को भी दलितों के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़ा होना पड़ा था. 

मौके की अहमियत को भांपते हुए अरविंद केजरीवाल ने नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को आंबेडकर का अपमान न सहने की सलाह दी थी, और ये समझाने की कोशिश की थी कि एनडीए के साथ बने रहने के बारे में उनको गंभीरता से सोचना चाहिये. 

कहने को तो उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे का दिल्ली आकर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल दोनो से मिले हैं, लेकिन उनका जो बयान आया है, उसमें निशाने पर कांग्रेस ही लग रही है. आदित्य ठाकरे ने सत्ता की राजनीति में होकर भी दोस्ती और रिश्ता बनाये रखने की सलाह दी है - सलाह तो ऐसी ही ममता बनर्जी की तरफ से भी आई है.  

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असल में, अरविंद केजरीवाल की तरह आदित्य ठाकरे भी खुद को कांग्रेस पीड़ित मानते हैं - क्योंकि शरद पवार की ही तरह राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने भी उद्धव ठाकरे को महाविकास आघाड़ी का मुख्यमंत्री चेहरा बनाने का सपोर्ट नहीं किया था. 

महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने हाल फिलहाल अलग ही हड़कंप मचा रखा है, जिससे उद्धव ठाकरे की सेना नाराज है - ऐसे में गैर-कांग्रेस विपक्षी एकजुटता की मुहिम ममता बनर्जी की ही तरफ से चलाई जा मुहिम में अरविंद केजरीवाल को उद्धव ठाकरे का भी साथ मिल गया है. 

ध्यान देने वाली बात ये है कि पिछली बार सोनिया गांधी के कहने पर ममता बनर्जी की मुहिम को शरद पवार ने ही खत्म कर दिया था, देखना है आने वाले दिनों में शरद पवार क्या करते हैं?

कांग्रेस के खिलाफ केजरीवाल की ममता जैसी मुहिम

ममता बनर्जी ने तो दिल्ली चुनाव में बीजेपी की जीत के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनो को जिम्मेदार ठहराया है - लेकिन, जाहिर है, अरविंद केजरीवील तो ऐसा कतई नहीं मानते होंगे. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में तो पहले से ही छत्तीस का रिश्ता है, लेकिन दिल्ली की 13 सीटों पर आम आदमी पार्टी की हार के लिए तो अरविंद केजरीवाल कांग्रेस को माफ करने से रहे. 

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ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक का नेता बनना तो चाहती ही हैं, दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल का सपोर्ट करके अपना इरादा और भी साफ कर दिया है.  

अरविंद केजरीवाल को ममता बनर्जी का साथ मिला होने के बावजूद महाराष्ट्र में ताजा राजनीतिक टकराव के बीच शरद पवार की भूमिका बढ़ गई है, और संभव है आगे चलकर विपक्षी खेमे में पहले की तरह निर्णायक साबित हो. 

देखा जाये तो आदित्य ठाकरे ने भी विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस और राहुल गांधी का नेतृत्व खारिज कर दिया है. आदित्य ठाकरे का कहना है, INDIA ब्लॉक में कोई एक नेता नहीं है, गठबंधन का नेतृत्व संयुक्त है… कोई एक नेता नहीं है… ये अहंकार या किसी के फायदे की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के भविष्य की लड़ाई है.

2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने के बाद ममता बनर्जी कांग्रेस मुक्त विपक्षी एकजुटता की मुहिम चला रही थीं, और अब लगता है अरविंद केजरीवाल भी उसी लाइन पर काम कर रहे हैं. फर्क ये है कि ममता बनर्जी ने चुनाव जीतने के बाद अभियान चलाया था, और अरविंद केजरीवाल हारने के बाद वही काम कर रहे हैं.

शरद पवार अब कौन सा पावर दिखाने वाले हैं?

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को सम्मानित किये जाने पर उद्धव ठाकरे गुट ने सख्त नाराजगी जताई है. आदित्य ठाकरे कह रहे हैं, जो लोग महाराष्ट्र विरोधी हैं, वे देश के भी विरोधी हैं… ऐसे लोगों को सम्मानित करना हमारी नीति के खिलाफ है… मैं शरद पवार की सोच से सहमत नहीं हूं.

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संजय राउत ने भी कहा है, शरद पवार को उस कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिये, क्योंकि एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली एमवीए की सरकार गिरा दी थी. उद्धव ठाकरे और उनके समर्थक एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित करता है.  

ममता बनर्जी की कांग्रेस विरोधी मुहिम की हवा तो शरद पवार ने ही निकाल दी थी, इस बार भी शरद पवार की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. उद्धव ठाकरे तब शरद पवार के साथ हुआ करते थे, लेकिन एकनाथ शिंदे के सम्मान समारोह के बाद अब ठाकरे परिवार शरद पवार से इसलिए नाराज चल रहा है - और इसी बीच आदित्य ठाकरे की अरविंद केजरीवाल से मुलाकात हुई है. 

विपक्षी दलों के मौजूदा समीकरण में राहुल गांधी और शरद पवार दोनो ही अलग अलग मोड़ पर खड़े नजर आ रहे हैं - क्या आगे भी राहुल गांधी के लिए शरद पवार ही मददगार बनेंगे?

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