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MP बीजेपी संगठन का फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में बीजेपी को दिलाएगा 400 सीट?

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विधानसभा सीटों की नजर से देखा जाए तो दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की जबकि बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के अनुमान और ज्यादातर सर्वे बीजेपी के खिलाफ थे लेकिन अपने संगठन के नवाचारों और प्रबंधन ने एक प्रचंड जीत बीजेपी के खाते में डाल दी. अब संगठन की इसी ताकत को बीजेपी लोकसभा में भुना कर 400 से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है.

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वीकली डायरी
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लोकसभा चुनाव का माहौल अब धीरे-धीरे बनने लगा है और देश के दिल मध्य प्रदेश में बीते हफ्ते लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस खेमे में काफी हलचल देखी गई. खासतौर पर बीजेपी संगठन के कई ऐसे नवाचार जिसके चलते बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में एंटी इनकंबेंसी को पछाडते हुए प्रचंड जीत हासिल की उसे लेकर बीजेपी का केंद्रीय संगठन अब लोकसभा चुनाव में भी आजमाने जा रहा है, जिससे लोकसभा में उसका अबकी बार 400 पार का नारा सफल हो सके. वहीं कांग्रेस में भी लोकसभा चुनाव प्रभारियों की बैठक के साथ न्याय यात्रा के मध्य प्रदेश आने की तैयारियां शुरू हो चुकी है. 

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एमपी का संगठन फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में 

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने विधानसभा सीटों की नजर से देखा जाए तो दूसरी सबसे बड़ी जीत दर्ज की जबकि बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों के अनुमान और ज्यादातर सर्वे बीजेपी के खिलाफ थे लेकिन अपने संगठन के नवाचारों और प्रबंधन ने एक प्रचंड जीत बीजेपी के खाते में डाल दी. अब संगठन की इसी ताकत को बीजेपी लोकसभा में भुना कर 400 से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है. एमपी में प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा हैं जिनकी रणनीति इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इतनी बड़ी जीत तक ले गई.

हितानंद शर्मा सोशल मीडिया के साथ-साथ आंकड़े इकट्ठा करने के साथ ही चुनावी रणनीति को धरातल में उतारने में माहिर माने जाते हैं. मध्य प्रदेश का संगठन देश में बीजेपी का सबसे अच्छा संगठन माना जाता है जिसकी तारीफ खुद पीएम मोदी कर चुके हैं लेकिन अब आपको बताते हैं उसी संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा का वो कौन सा फार्मूला है जो बीजेपी अब लोकसभा में आजमाने जा रही है.

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- वेकअप कॉल 

इसके तहत बीजेपी ने मतदान वाले दिन सुबह पांच बजे बूथ कार्यकर्ताओं को फोन लगाकर उठाने का प्रयोग किया. इसमें 10 बूथ कार्यकर्ताओं को सुबह फोन लगाए गए और उन्हें 10 और लोगों को कॉल करने का लक्ष्य दिया गया. फोन नंबर के साथ नामों की सूची पहले ही सबको वॉट्सएप ग्रुप के जरिए सबको उपलब्ध करवा दी गई थी. यह फोन तब तक लगाने थे जब तक सभी 40 लाख बूथ वर्कर्स तक पहुंच ना जाए. इसके बाद इन सभी 40 लाख बूथ वर्कर्स को सुबह 10 बजे तक अपने परिवार और अपनी जान-पहचान के वोटरों को वोट डलवाने का टारगेट दिया गया. 

- कमजोर सीट और कमजोर बूथ को चिह्नित किया

बीजेपी संगठन ने बीजेपी के लिहाज से 89 कमजोर सीटों की लिस्ट पहले ही तैयार कर ली थी और इनके लिए खास रणनीति के तहत चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही यहां उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. इससे उम्मीदवारों को जनता के बीच जाकर प्रचार करने का ज्यादा समय मिला. संगठन और पार्टी की यह रणनीति सफल रही और इनमें से ज्यादातर कमजोर सीटों पर बीजेपी को जीत मिल गई. 

- स्वसहायता समूहों का इस्तेमाल

इस रणनीति के तहत पार्टी ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को उन लोगों के बीच जाने का जिम्मा दिया, जो लाडली बहना समेत अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लाभार्थी हैं. इनका काम था इन लोगों के साथ मतदान वाले दिन तक लगातार कई बार संपर्क करना जिससे इनके मन में बीजेपी के किए गए कामों को लगभग बैठा दिया गया और अंत में इसका फायदा बीजेपी के पक्ष में मतदान के रूप में हुआ.  

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लोकसभा के लिए कांग्रेस ने कसी कमर, फरवरी में आ सकती है उम्मीदवारों की सूची

कांग्रेस के लिए भी बीता हफ्ता व्यस्तता भरा रहा. मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार तय करने को लेकर कांग्रेस में मंथन का दौर शुरू हो गया है. बीते हफ्ते कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी अध्यक्षा रजनी पाटिल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष समेत वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा की. इस बैठक में वरिष्ठ नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ाने का भी सुझाव आया है. बैठक के बाद स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षा रजनी पाटिल ने कहा कि अभी एक बैठक और होगी जिसके बाद एमपी के लोकसभा उम्मीदवारों के नामों का पैनल दिल्ली भेजा जाएगा. फरवरी में ही कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची जारी करने की कोशिश की जाएगी. हालांकि दिग्विजय सिंह और अजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के चुनाव लड़ने से इनकार कर देने के मामले में कांग्रेस की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. 

बीजेपी ने बदले क्लस्टर के नेता

बीते हफ्ते भोपाल में बीजेपी की अहम बैठक हुई, जिसमें बीजेपी ने सभी क्लस्टर प्रभारियों के प्रभार क्षेत्र को बदल डाला. शनिवार को हुई इस बैठक में तय हुआ कि कोई भी स्थानीय नेता अपने क्षेत्र में क्लस्टर लीडर नहीं रहेगा इसलिए सभी नेताओं के प्रभार बदलकर नए क्लस्टर दिए गए. बदलाव के बाद उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को भोपाल, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को ग्वालियर, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को जबलपुर, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग को उज्जैन, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को इंदौर, कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल को रीवा और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को सागर क्लस्टर का प्रभारी बनाया गया है

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पहली बार लगी मंत्रियों की पाठशाला

बीते हफ्ते मध्य प्रदेश की सियासत में एक नवाचार की खूब चर्चा रही. यह था मोहन यादव सरकार के मंत्रियों की पाठशाला. दरअसल, मंत्रिमंडल की दो दिवसीय इस कार्यशाला में लीडरशिप और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट से संबंधित कई सत्र आयोजित किए गए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में सभी मंत्रियों ने हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी का कहना था कि सुशासन के दिशा में सभी विभागों को कार्य करना चाहिए और आज के बदलते दौर में नई तकनीक के साथ जनता के बीच अपनी विचारधारा से जुड़कर जनता के बीच गवर्नेंस की छाप दिखाई देना चाहिए. इसलिए पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्यों के लिए इस तरह की पाठशाला का आयोजन किया गया.

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