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महाराष्ट्र में कांग्रेस और उद्धव सेना के बीच चल रही आतिशबाजी से BJP की दिवाली | Opinion

महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस का टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी और उसके साथियों को मिल सकता है - और यही वजह है कि कांग्रेस ने नये नेता को मोर्चे पर तैनात कर दिया है.

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महाराष्‍ट्र में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस की तकरार खत्म क्यों नहीं हो रहा है
महाराष्‍ट्र में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस की तकरार खत्म क्यों नहीं हो रहा है

उद्धव ठाकरे और कांग्रेस के बीच फसाद की जड़ लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे हैं. अगर कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा सीटें नहीं मिली होतीं, और उद्धव ठाकरे को मिली सीटों के नंबर बीजेपी के बराबर नहीं होते, तो ऐसी कोई नौबत ही नहीं आती. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 13 सीटें जीती थी, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और बीजेपी को 9-9 सीटों पर जीत मिली थी. 

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सबसे बड़ी वजय यही है, जिसने कांग्रेस को मोलभाव करने का मौका दे दिया है, और उद्धव ठाकरे को सीट शेयरिंग के मुद्दे पर मजबूती से मैदान में डटे रहने के लिए. महाराष्ट्र में हुए स्नातक और नासिक शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में विधान परिषद चुनावों को लेकर भी उद्धव ठाकरे और नाना पटोले के बीच तीखी नोकझोंक हुई थी. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले उद्धव ठाकरे की तरफ से उम्मीदवारों के एकतरफा घोषणा से नाराज थे - और ये भी सुनने में आया था कि उद्धव ठाकरे ने नाना पटोले का फोन तक नहीं उठाया था. 

चुनावों से काफी पहले शरद पवार ने भी बोल दिया था कि उनकी पार्टी लोकसभा के मुकाबले विधानसभा की ज्यादा सीटों पर दावेदारी रखेगी - जब मौका देखकर उद्धव ठाकरे ने महाविकास आघाड़ी के मुख्यमंत्री चेहरे पर दावेदारी पेश कर दी तभी से तकरार बढ़ने लगी. 

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और इस बीच से उद्धव ठाकरे की शिवसेना से बीजेपी की नजदीकियों की चर्चा अलग आग लगा रही है - अगर मुलाकातों की बातें अफवाह भी मान लें तो, प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो तारीफ की है, संजय राउत उसे तो झुठला नहीं सकते.  

कांग्रेस और उद्धव ठाकरे प्रेशर पॉलिटिक्स आजमा रहे हैं

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में लिखा है, 'अमित शाह ने संजय राउत से फोन पर बात भी की थी... इसके बाद शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा के एक साथ चुनाव लड़ने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं.'

लेकिन, उद्धव ठाकरे के साथी नेता राज्यसभा सांसद संजय राउत ऐसी बातों को खारिज करते हुए सारा ठीकरा बीजेपी नेताओं के सिर पर फोड़ देते हैं. कहते हैं, भारतीय जनता पार्टी झूठी खबरें फैला रही है... उनको हार का डर है इसलिए गलत खबरें फैलाई जा रही हैं.   

जाहिर है संजय राउत का ये बयान सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं पर भी लागू होता है, जिनमें संजय राउत के अमित शाह से, और देवेंद्र फडणवीस के उद्धव ठाकरे से मुलाकात का दावा किया जा रहा है.

लेकिन संजय राउत जिस लहजे में मुलाकात और फोन पर बात की चर्चाओं को खारिज कर रहे हैं, उनका अंदाज खबरों की पुष्टि जैसा ज्यादा लगता है - राजनीतिक बयान ऐसे ही होते हैं. खबरे मुंह से निकले शब्दों में नहीं, बल्कि नहीं कही गई बातों में होती है. 

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कहने को तो ये भी कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे अपनी वाली शिवसेना के उम्मीदवार 288 सीटों पर उतारने के बारे में भी सोच रहे हैं - और ऐसी सारी ही बातें एक चीज समझाने की कोशिश कर रही हैं कि महाविकास आघाड़ी के तीनों सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ अपने अपने तरीके से प्रेशर पॉलिटिक्स के नुस्खे आजमा रहे हैं.

कांग्रेस की दावेदारी और उद्धव ठाकरे की नाराजगी

जहां तक MVA में सीटों के बंटवारे में फंसे पेच का सवाल है, वो भी संजय राउत और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार की बातों से समझने की कोशिश की जा सकती है. नाना पटोले तो पहले ही कांग्रेस उम्मीदवारों की लिस्ट और मैनिफेस्टो को लेकर अपनी तरफ से संकेत दे चुके हैं - और वो भी सूचना कम, प्रेशर पॉलिटिक्स ज्यादा लग रही है. 

जो खबरें आ रही हैं, उनसे मालूम होता है कि मुख्य टकराव विदर्भ की 7 सीटों पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस की अपनी-अपनी दावेदारी की वजह से है. हां, कॉमन बात ये है कि सभी एक सार्वजनिक रूप से एक स्वर में बोल रहे हैं कि बीजेपी और उसके नये साथियों को मिलकर हराना है - और ये तो माना ही जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में MVA में शामिल उद्धव ठाकरे की शिवसेना, शरद पवार के पास बची एनसीपी और कांग्रेस ने एकजुट होकर साबित भी कर चुके हैं. 

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इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत का दावा है कि महाविकास आघाड़ी में महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 210 सीटों पर सहमति बन चुकी है, जिसे वो एक बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं. कह भी रहे हैं, 'हम एक ताकत के रूप में चुनाव लड़कर महाराष्ट्र को लूटने वालों को हराएंगे.'

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार भी करीब करीब संजय राउत जैसी ही बातें कर रहे हैं, 'महाविकास आघाड़ी में 17 सीटों पर चर्चा बाकी है... हमारा कुछ सीटों पर ठाकरे गुट के साथ विवाद चल रहा है... गठबंधन में तीन पार्टियां हैं... और तीन दलों के बीच सीट शेयरिंग में वक्त तो लगता है.'

2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे जूनियर पार्टनर हुआ करती थी, लेकिन पांच साल बाद महाराष्ट्र की राजनीति में इतनी उठापटक हुई की लोकसभा चुनाव होते होते कांग्रेस लोकसभा चुनाव तक साथियों से ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है. 

पांच साल पहले 2019 के चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में रहते हुए शिवसेना ने 56 सीटें जीती थी, जबकि एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी - तब की बात और थी. महाराष्ट्र में जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे तो कांग्रेस के साथ उसकी सीटों के हिसाब से ही हिस्सा मिलता था. 

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कांग्रेस नेता नाना पटोले जहां लोकसभा चुनाव की ज्यादा सीटों के दम पर आत्मविश्वास से भरे हुए हैं, उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के लोगों से मिले इमोशनल सपोर्ट से कॉन्फिडेंट नजर आते हैं - और दोनो के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह भी यही लगती है. 

तभी तो कांग्रेस आलाकमान या कहें कि राहुल गांधी ने मोर्चे पर नाना पटोले से पहले महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके बालासाहेब थोराट को उतार दिया है - लेकिन, क्या वो आखिरी वक्त में सब कुछ ठीक कर पाएंगे?

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