मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन समाप्त होने के साथ एक बात स्पष्ट हो गई कि महाराष्ट्र में बने दोनों गठबंधन अव्यवहारिक हैं. महा विकास आघाड़ी और महायुति दोनों ही भिन्न भिन्न विचार वाले ऐसे दलों का समूह हैं जो सत्ता के लालच में इकट्ठा हुए हैं. यही कारण है कि महाराष्ट्र में विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) को कम से कम सात विधानसभा क्षेत्रों में 2 -2 पार्टियों के प्रत्याशी हैं. यही हाल महायुति के साथ भी हुआ है. इस गठबंधन में बीजेपी जैसी काडर वाली पार्टी भी कड़े फैसले नहीं ले सकी. कम से कम पांच सीटों पर यहां भी एमवीए जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. दोनों गठबंधनों ने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा. नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर है. पर जिस तरह दोनों ही गठबंधनों में अंदरूनी राजनीति हो रही है पक्का है कि चुनाव जीतने के बाद नए गठबंधन अस्तित्व में आएंगे.
288 विधानसभा सीटों में से महायुति के दलों ने 284 सीटों को आपस में बांट लिया है और चार सीटें छोटे सहयोगियों के लिए छोड़ी हैं. भाजपा इन सीटों में सबसे अधिक 152 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 80 सीटों पर और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को केवल 52 सीटें मिली हैं. इसी तरह MVA में कांग्रेस 101 सीट हासिल करने में सफल हुई है. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) 96 सीटों पर और शरद पवार की अगुवाई वाली NCP (SP) 87 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. MVA ने समाजवादी पार्टी (SP) और CPI(M) के लिए दो-दो सीटें छोड़ी हैं. एक समय तो ऐसा लग रहा था कि एमवीए में कांग्रेस -एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) तीनों के बीच बराबर सीट बांटी जाएगी. पर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी ने ठीक-ठाक बार्गेनिंग कर ली.
महाविकास अघाड़ी में अंतर्विरोध
महाविकास अघाड़ी में कांग्रेस और और शिवसेना यूबीटी जिस तरह एक दूसरे के खिलाफ आक्रामक हैं, वो शुरू से ही किसी से छिपा नहीं है. बस इतना ही सत्य है कि चुनाव जीतने के लिए वो एक दूसरे को बर्दाश्त कर रहे हैं. यही कारण है कि मिरज (सांगली जिला), सोलापुर दक्षिण, पंढरपुर और सांगोला (सोलापुर जिला), परांडा (धाराशिव जिला), दिग्रस (यवतमाल जिला), और धारावी (मुंबई) में दोनों ही दल एक-दूसरे के खिलाफ हैं. इन क्षेत्रों में कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के उम्मीदवारों ने चार सीटों पर नामांकन दाखिल किया है. धारावी को छोड़कर, इन सभी सीटों पर महायुति के उम्मीदवार वर्तमान में काबिज हैं. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला कहना है कि कोई भी मित्रवत लड़ाई नहीं होगी. यदि हमारे सहयोगियों ने कुछ सीटों पर नामांकन दाखिल किया है, तो आने वाले दिनों में इसे हल किया जाएगा.
पिछले हफ्ते, सीट-शेयरिंग पर बातचीत शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच मतभेदों के कारण ठप हो गई थी. बाद में दोनों दलों ने पवार से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, जिसके बाद विपक्षी गठबंधन ने 255 सीटों पर प्रारंभिक समझौता हो सका है. सोचने वाली बात यह है कि जब सीट शेयरिंग को लेकर इतनी मशक्कत है तो ये गठबंधन अगर सरकार बना लेता है तो क्या क्या नहीं होगा, यह उम्मीद किया जा सकता है. जब इतनी अधिक दूरी होगी तो चुनाव बाद अलग गठबंधन के प्रयास भी शुरू हो सकते हैं.
महायुति में मारा-मारी
शासन गठबंधन में भी मानखुर्द-शिवाजीनगर (मुंबई), पुरंदर (पुणे), मोर्शी (अमरावती), दिंडोरी ST-आरक्षित (नाशिक जिला), और अष्टी (बीड़ जिला) में आपसी संघर्ष चल रहा है. पर सबसे अधिक चर्चा है मानखुर्द-शिवाजीनगर की, जहां से NCP ने पूर्व मंत्री नवाब मलिक को मैदान में उतारा है. यहां पर शिवसेना ने पहले से ही उम्मीदवार उतारा हुआ है. जाहिर है कि बीजेपी पर दबाव बनेगा कि यहां शिंदे शिवसेना के कैंडिडेट का पक्ष लेगी. पर जिस तरह अंतिम समय में अजित पवार ने नवाब मलिक को बीजेपी के विरोध के बावजूद सिंबल दिया है उससे तो यही लगता है कि यह गठबंधन ज्यादा दिनों नहीं चलने वाला है. पिछले तीन चुनावों में SP के प्रदेश अध्यक्ष अबू आज़मी ने यह सीट जीती है. पुरंदर में, शिवसेना और NCP के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जहा विजय शिवतारे को शिवसेना का टिकट मिला है और अजित पवार ने संभाजी को उतारा है.
हालाँकि महायुति के लिए भी उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इन सीटों को लेकर मतभेद आने वाले दिनों में सुलझा लिए जाएंगे. पर जिस तरह बीजेपी में अंदर ही अंदर नवाब मलिक और उनकी बेटी को लेकर विरोध हो रहा है उससे स्पष्ट लगता है कि पार्टी में 2 गुट बन गए हैं.आशीष शेलार और किरीट सौमैया ने खुलकर नवाब मलिक का विरोध किया है.
चुनाव बाद नए गठबंधन के आसार
जिस तरह की तस्वीर महाराष्ट्र में बन रही है उससे यही लगता है कि किसी भी गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने वाला है. जाहिर है ऐसी हालत में एक बार फिऱ हॉर्स ट्रेडिंग शुरू होगी. कई पार्टियां टूटेंगी और बिखरेंगी. बीजेपी में जिस तरह अजित पवार को लेकर माहौल बन रहा है पार्टी चाहेगी उनसे किनारा किया जाए. इसी तरह कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में भी आपस में विश्वसनीयता का बेहद अभाव है. कांग्रेस की स्थानीय इकाई बिल्कुल भी नहीं चाहती थी कि शिवसेना के साथ चला जाए. जिस तरह 2004 में केंद्र में यूपीए में कई ऐसे दल भी शामिल हुए थे जो पहले यूपीए में नहीं थे. उसी तरह की संभावना महाराष्ट्र के लिए की जा सकती है.