प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नया नारा दिया है, 'एक हैं, तो सेफ हैं.' नये स्लोगन में भी वही भाव है, जो योगी आदित्यनाथ के नारे में है - लेकिन मोदी का नया नारा पुराने वाले जैसा तो बिलकुल नहीं है.
केंद्र की सत्ता में आने के बाद से भले ही चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी को वोट दिलाने के लिए लोगों को 'श्मशान और कब्रिस्तान' जैसी बहसों में उलझाते रहे हों, लेकिन बाकी दिनों में ज्यादा जोर 'सबका साथ सबका विकास' पर ही देखने को मिलता रहा है. बाद के दिनों में भी उस नारे में कभी 'सबका विश्वास' तो कभी 'सबका प्रयास' जोड़ दिया जाता रहा है - लेकिन नये नारे का भाव तो बिलकुल यू-टर्न लेने जैसा है.
'एक हैं, तो सेफ हैं', दरअसल, योगी आदित्यनाथ के 'बंटेंगे तो कटेंगे' जैसी ही ध्वनि पेश करता है - और ये दोनों ही स्लोगन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से हिंदुत्व और हिंदुओं की एकजुटता पर जब तब जोर देने वाली बातों को लगातार प्रमोट करने की की रणनीति का हिस्सा लगता है.
'एक हैं तो सेफ हैं'
चुनाव कैंपेन के तहत महाराष्ट्र के धुले पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नये नारे 'एक हैं तो सेफ' का मतलब मिसाल देकर समझाने की कोशिश की. कह रहे थे, कांग्रेस द्वारा एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने का खतरनाक खेल खेला जा रहा है... और ये खेल इसलिए खेला जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस कभी दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों को आगे बढ़ते नहीं देख सकती.
प्रधानमंत्री मोदी अपने तरीके से समझाने की कोशिश कर रहे थे, आजादी के समय बाबा साहेब अंबेडकर ने बहुत कोशिश की थी कि शोषितों-वंचितों को आरक्षण मिले. लेकिन नेहरू जी अड़े हुए थे कि किसी भी कीमत पर दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को आरक्षण नहीं दिया जाएगा... बड़ी मुश्किल से बाबा साहेब दलितों और पिछड़ों के लिए आरक्षण का प्रावधान करा पाये... नेहरू जी के बाद इंदिरा जी आईं, आरक्षण के खिलाफ उनका भी वैसा ही रवैया रहा... उनका भी मकसद यही था कि किसी भी कीमत पर एससी, एसटी, ओबीसी को प्रतिनिधित्व न मिलने पाये.
और फिर बोले, सोचिये... अलग-अलग जातियों में टूटने से आप कितने कमजोर हो जाएंगे... इसलिए मैं कहता हूं... एक हैं तो सेफ हैं... हमें एकजुट रहकर कांग्रेस के खतरनाक खेल को नाकाम करना है... और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते रहना है.
योगी आदित्यनाथ ने भी उत्तर प्रदेश के उपचुनावों को देखते हुए 'बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा दिया था, जिसके बाद यूपी के अलावा महाराष्ट्र के कई शहरों में उनके स्लोगन वाले पोस्टर लगाये गये थे, और जब उसी बात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी स्टाइल में 'एक हैं तो सेफ हैं' बोल कर पेश किया तो बीजेपी की तरफ अखबारों में विज्ञापन भी दिये गये. विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान अब इस बात पर कुछ ज्यादा ही जोर देखने को मिल रहा है - और धीरे धीरे स्लोगन का मतलब भी साफ होता जा रहा है, और अहमियत भी समझ में आने लगी है.
जातीय राजनीति का असर
2023 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान पहली बार जातीय राजनीति पर जोर देखा गया था. चुनावों से पहले ही बिहार से जातिगत गणना की मांग उठी थी, और चुनाव कैंपेन के दौरान राहुल गांधी कांग्रेस की तकरीबन हर रैली में जोर शोर से उठाते रहे - लेकिन कांग्रेस को तेलंगाना छोड़कर किसी भी राज्य में कामयाबी नहीं मिल पाई थी.
बीजेपी सतर्क जरूर थी, लेकिन तब उसे लगा नहीं कि जातीय राजनीति कोई खास असर दिखा सकती है. विचार विमर्श के लिए बीजेपी ने ओबीसी नेताओं की कुछ बैठकें भी बुलाई, और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक सभाओं में कहा भी कि बीजेपी को जातीय जनगणना से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सही वक्त पर फैसला लिया जाएगा.
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की कुछ कुछ बेरुखी देखकर बीजेपी को करीब करीब यकीन हो गया कि कुछ होने जाने वाला नहीं है - लेकिन जैसे ही लोकसभा चुनाव के नतीजे आये, बीजेपी के सारे ही दिग्गजों के पैरों तले जमीन धंस गई.
बीजेपी सतर्क तो हरियाणा विधानसभा चुनाव से ही हो गई थी, लेकिन ज्यादा अलर्ट झारखंड और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर नजर आ रही है - क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी जातीय जनगणना को लेकर जोश से लबालब नजर आ रहे हैं.
हाल ही में राहुल गांधी ने सोशल साइट X पर लिखा था, 'मोदी जी, आज से तेलंगाना में जातिगत सर्वे शुरू हो गया है... इससे मिलने वाले डेटा का इस्तेमाल हम प्रदेश के हर वर्ग के विकास के लिए नीतियां बनाने में करेंगे... जल्द ही ये महाराष्ट्र में भी होगा.'
महाराष्ट्र में होगा लिखने का मतलब तो यही हुआ की चुनाव में महाविकास आघाड़ी की जीत होगी, और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनेगी. राहुल गांधी ने इसी बीच ये भी आरोप लगाया कि बीजेपी देश में जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती है.
बीजेपी को चैलेंज करते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोले, 'मैं मोदी जी से साफ कहना चाहता हूं... आप देश भर में जातिगत जनगणना को रोक नहीं सकते... हम संसद में जातिगत जनगणना को पास करके दिखाएंगे... और आरक्षण पर से 50 फीसदी की दीवार को तोड़ देंगे.'
राहुल गांधी ने नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन में भी कहा था, 'ये प्रक्रिया देश में होगी और ये दलितों... ओबीसी और आदिवासियों के साथ हुए अन्याय को सामने लाएगी... जाति जनगणना का सही अर्थ न्याय है... कांग्रेस पार्टी आरक्षण सीमा की 50 फीसदी की दीवार को भी गिरा देगी.'
राहुल गांधी के बयानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया झारखंड में सुनने को मिली, कांग्रेस सत्ता के लालच में छोटी-छोटी जातियों को बांटकर उनको आपस में लड़ाना चाहती है... इसलिए वे जातिगत जनगणना कराने की बात करते हैं... याद रखिये हम 'एक रहेंगे, सेफ रहेंगे'.