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महाराष्ट्र में क्या चल रहा है, एकनाथ शिंदे से छुटकारा पाना चाहती है बीजेपी?

महाराष्ट्र की राजनीति में जितने ध्रुव हैं उतने पूरे भारत की राजनीति में कहीं नहीं हैं. यही कारण है कि यहां की राजनीति को समझना आसान काम नहीं है. महायुति और महाविकास अघाड़ी दोनों के भीतर उठापटक चल रही है और दोनों एक दूसरे में सेंध लगाने में भी व्‍यस्त हैं. खैर, ताजा फोकस एकनाथ शिंदे पर है, जिनके भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है.

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एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस
एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र की राजनीति इस समय पूरे देश में सबसे जटिल है. यहां राजनीतिक दल और नेताओं की नियत को समझना टेढ़ी खीर है. किसके मन में क्या चल रहा है यह कहना बहुत मुश्किल है. फिलहाल अभी मुश्किल से 2 महीने पहले ही महाविकास अघाड़ी को हराकर महायुति गठबंधन ने फिर से सरकार बनाई थी. शिवसेना- एनसीपी और बीजेपी की नई सरकार में शामिल होने के लिए एकनाथ शिंदे को बहुत मुश्किल से मनाया गया था. पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके एकनाथ शिंदे को डिप्टी सीएम बनना शायद रास नहीं आ रहा है. वो अनमने ढंग से सरकार के साथ हैं. शपथ ग्रहण समारोह से ही वो सामान्य नहीं दिख रहे हैं. पिछले दिनों कई बार वो प्रदेश कैबिनेट की बैठकों से नदारद रहे . इसके बाद से ही ऐसा माना जा रहा था कि शायद प्रदेश के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पर पिछले दिनों के घटनाक्रम ऐसा संकेते दे रहे हैं कि जैसे बीजेपी अब उनसे छुटकारा ही पाना चाह रही है. आइये देखते हैं कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है.

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1-फडणवीस की यूबीटी और एमएनएस नेताओं के साथ बैंठकें

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य की अस्थिर राजनीतिक स्थिति में सोमवार सुबह एक और हलचल पैदा कर दी. सोमवार को फडणवीस महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के आवास पर मुलाकात के लिए पहुंचे. महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसा कम ही होता है कि मुख्यमंत्री खुद चलकर किसी नेता से मिलने उसके घर जाते हो. सोमवार शाम को ही फडणवीस ने अपने आवास पर शिवसेना यूबीटी के 3 नेताओं का स्वागत किया. चूंकि इस बीच लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि डिप्टी सीएएम एकनाथ शिंदे सीएम फडणवीस से नाराज चल रहे हैं . इसलिए ये मुलाकात और महत्वपूर्ण हो जाती है. दरअसल सभी जानते हैं कि राज्य में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव होने वाले हैं. बीएमसी का चुनाव महाराष्ट्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. जब तक शिवसेना एकजुट थी, तब तक यह धनाढ्य नगर निगम उसका गढ़ बना रहा. पर अब बीएमसी चुनावों में महाराष्ट्र की कई पार्टियां अपने गठबंधनों महायुति और महा विकास अघाड़ी से अलग हटकर मैदान में उतरना चाहती हैं. माना जा रहा है कि फडणवीस की राज ठाकरे और शिवसेना यूबीटी के नेताओं से मुलाकात का असली उद्दैश्य एकनाथ शिंदे को संदेश पहुंचाना था कि वे यह न समझें कि बीजेपी के पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है.

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2-शिंदे की योजनाएं बंद करके उन्हें घेरने की कोशिश

महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे यूं ही नाराज नहीं हैं. ऐसा माना जा रहा है कि कहीं न कहीं जानबूझकर भी एकनाथ शिंदे को परेशान किया जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार अभी कुछ दिन पहले ही उद्योग मंत्री और शिंदे सेना के नेता उदय सामंत का एक पत्र सामने आया था, जिसमें उन्होंने अपने विभाग के अधिकारियों को उनकी जानकारी के बिना कोई निर्णय न लेने का निर्देश दिया था.इस घटनाक्रम को महायुति सरकार के भीतर बीजेपी और शिंदे सेना के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखा जा रहा है.  शिंदे के कार्यकाल में शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना जिसमें बुजुर्गों के लिए मुफ्त तीर्थ यात्रा की सुविधा थी, फिलहाल रोक दी गई है. आनंदाचा सिद्धा योजना, जो त्योहारों के दौरान सस्ती दरों पर किराने का सामान वितरित करने के लिए शुरू की गई थी वह भी बंद होने की कगार पर है. हालांकि शिंदे ने इस मामले में अब तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन उन्होंने पिछले पंद्रह दिनों में दो कैबिनेट बैठकों से दूरी बनाई और सोमवार को प्री-बजट चर्चा से भी नदारद रहे.  मुख्यमंत्री पद को लेकर शिंदे की शुरुआती असहमति से लेकर, अब तक वे कई मौकों पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. एक्सप्रेस लिखता है कि मंगलवार को शिंदे को राज्य आपदा प्रबंधन समिति में शामिल किया गया, जबकि कुछ दिन पहले विवादित रूप से उन्हें इस पैनल से बाहर रखा गया था, जिसमें अजीत पवार और अन्य प्रमुख मंत्री शामिल किए गए थे.

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3-क्या शिंदे अभी तक मुख्यमंत्री न बनाए जाने के सदमे में हैं

कुछ दिनों पहले सामना के संपादकीय में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे को लेकर बड़ा दावा किया है. इसमें कहा गया है कि फडणवीस और शिंदे में अनबन है. उद्धव की शिवसेना ने आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी शिंदे और उनके लोगों के फोन टैप करवा रही है. शिंदे टूट गए हैं, शून्य में चले गए हैं. शिंदे को संदेह है कि दिल्ली में एजेंसियां ​​उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं. हालांकि शिवसेना उद्धव गुट की किसी बात पर यकीन नहीं किया जा सकता क्योंकि शिवसेना को तोड़कर उनके लिए कुछ नहीं छोड़ने वाले एकनाथ शिंदे के लिए कभी भी वो शुभ नहीं चाहेंगे. पर जैसी परिस्थितियां बन रही हैं या जिस तरह शिंदे आजकल महायुति सरकार और कैबिनेट के साथ व्यवहार कर रहे हैं उससे यही लगता है कि सामना में छपी बातें सही हो सकती हैं. संजय राउत का कहना है शिंदे की पार्टी के एक विधायक ने उन्हें विमान यात्रा के दौरान बातचीत में यह जानकारी दी.राउत कहते हैं कि शिंदे अब भी दोबारा मुख्यमंत्री न बनाए जाने के सदमे से जूझ रहे हैं और एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. वे मन से टूट गए हैं. फडणवीस इस बात से वाकिफ हैं.

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4-पवार ने की शिंदे के कार्यकाल की तारीफ और शिंदे ने मोदी-शाह में पूर्ण आस्था जताई

दिल्ली में 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार के हाथों उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को महादजी शिंदे राष्ट्र गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया.  एकनाथ की शिंदे का सम्मान करने और उनके कार्यकाल की तारीफ करने पर शरद पवार की शिवसेना यूबीटी ने आलोचना की है. पवार ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शिंदे के कार्यों की प्रशंसा की और शासन और विकास के लिए उनके समावेशी दृष्टिकोण की सराहना की.

इस घटनाक्रम ने एमवीए गठबंधन के भीतर तनाव पैदा कर दिया है, यूबीटी सेना अपने सहयोगी एनसीपी के साथ मतभेद में दिख रही है. यूबीटी सेना सांसद संजय राउत ने इस आयोजन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ऐसे पुरस्कार खरीदे और बेचे जाते हैं. राउत ने  इस आयोजन की आलोचना करते हुए इसे भाजपा और संघ द्वारा आयोजित दलालों की राजनीतिक सभा कहा. इसी सभा में शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, जिससे ढाई साल की कम अवधि में राज्य में विकास कार्य सुनिश्चित हुए.

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