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मनमोहन बनाम इंदिरा: कांग्रेस मुख्‍यालय भवन के नाम और पते पर दिलचस्प राजनीति

कांग्रेस पार्टी पर आरोप रहा है कि गांधी परिवार से अलग हटकर वो सोचती ही नहीं है. पर पिछले दिनों मनमोहन सिंह की मृत्यु के बाद उनके स्मारक बनाने को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर हमले किए थे. कांग्रेस ने अपने नए मुख्यालय का नाम इंदिरा गांधी के नाम पर करके यह दिखा दिया है कि पार्टी में गांधी फैमिली के लोगों को ही सर्वोच्च सम्मान मिलता है.

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कांग्रेस मुख्यालय भवन पर लगे मनमोहन भवन के पोस्टर
कांग्रेस मुख्यालय भवन पर लगे मनमोहन भवन के पोस्टर

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने बुधवार को अपना पता बदल लिया. 46 साल बाद कांग्रेस का ठिकाना 9-A कोटला रोड, नई दिल्ली हो गया. इससे पहले कांग्रेस मुख्यालय अकबर रोड पर था. कांग्रेस के नए दफ्तर का उद्घाटन तो हो गया, पर अब उसके नाम को लेकर घमासान शुरू हो गया है. मनमोहन सिंह के सरकारी स्मारक के लिए मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस के पास एक ऐसा मौका था यह दिखाने का कि पार्टी की सोच अब बदल चुकी है. राहुल गांधी बार-बार कहते हैं कि पुरानी बातों से अलग राह देखनी होगी पर पार्टी पर शायद उनका जोर नहीं चलता. कांग्रेस गांधी फैमिली के आगे सोचना ही नहीं चाहती है. दरअसल कांग्रेस  के नए मु्ख्यालय का नाम इंदिरा भवन रखा गया है. पर मुख्यालय के बाहर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम वाला बैनर दिखने के बाद ऐसा लगा कि जैसे कांग्रेस में कुछ लोग चाहते हों कि इस नए भवन का नाम मनमोहन भवन रखा जाए. जाहिर है कि भाजपा को बैठे बिठाए मौका मिल गया है. भाजपा का भी सवाल यही है कि आखिर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के नाम पर कांग्रेस के नए दफ्तर का नाम क्यों नहीं?

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कांग्रेस गांधी परिवार से आगे सोचती ही नहीं?

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पर यह आरोप रहा है कि आजादी के बाद यह एक परिवार की पार्टी में बदल गई. कांग्रेस पर यह आरोप यूं ही नहीं रहा है. पीएम और कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर गांधी परिवार का ही कब्जा रहा है. देश में अधिकतर संस्थानों, एयरपोर्ट, चौक-चौराहों, कॉलोनियां, योजनाएं आदि का नाम गांधी-नेहरू परिवार के किसी न किसी सदस्य के नाम पर ही रखा जाता रहा है. देश के पिछले 60 साल के इतिहास में यह बहुत सामान्य रहा. सिर्फ पिछले 11 सालों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है इसलिए इस बीच परिवार के नाम से नामकरण का कोई उदाहरण नहीं मिला. अन्यथा गांधी परिवार के संजय गांधी तक के नाम पर देश में दर्जनों संस्थानों का नामकरण हुआ है. उल्लेखनीय है कि संजय गांधी के नाम से न कई उपलब्धि है और न ही वो किसी संवैधानिक पोस्ट पर रहे. सिर्फ इंदिरा गांधी के पुत्र होना ही कांग्रेस के लिए काफी हुआ करता था. गांधी परिवार के पास मौका था कि वो कांग्रेस भवन का नाम इंदिरा गांधी के अलावा किसी और कांग्रेसी नेता के नाम पर कर सकती थी. सबसे बड़ा नाम तो मनमोहन सिंह का ही था जिन्होंने लगातार दस साल प्रधानमंत्री बनकर देश चलाया.

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भाजपा को भी मिल गया मनमोहन के नाम पर सियासत का मौका 

भाजपा आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने एक्स पर कुछ पोस्टर्स वाला एक वीडियो डाला है. वीडियो के मुताबिक, कुछ पोस्टर्स में कांग्रेस के नए दफ्तर का नाम सरदार मनमोहन सिंह भवन रखने की मांग की गई है. भाजपा के शहजाद पूनावाला ने भी पूछा कि कांग्रेस मनमोहन सिंह के नाम पर इस भवन का नाम क्यों नहीं रख रही है. भाजपा के हमलों का कांग्रेस ने जवाब दिया है. कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला का कहना है कि इंदिरा भवन नाम पर तो मनमोहन सिंह परिवार और किसी को आपत्ति नहीं है. इंदिरा भवन नाम सबको स्वीकार है. 

सवाल यह है कि क्या कांग्रेस में इंदिरा भवन के नाम पर मनमोहन सिंह के परिवार को आपत्ति हो सकती है? क्या यह संभव लगता है? भारतीय जनता पार्टी सरकार से कांग्रेस चाहती है कि वह मनमोहन सिंह का सम्मान करे और लेकिन खुद ऐसा करने के लिए तैयार नहीं है. मनमोहन सिंह देश की अर्थव्यस्था को मजबूत बनाने के आधार स्तंभ रहे हैं. मनमोहन ने कांग्रेस को सबसे बुरे दौर में 10 साल सत्ताधारी पार्टी बनाए रखा. इंदिरा गांधी के नाम पर तो देश और कांग्रेस में बहुत से भवन और संस्थान आदि हैं. कांग्रेस के हाथ में अपने मुख्यालय का नाम रखने का अधिकार था. अगर पार्टी चाहती तो मनमोहन सिंह की सेवाओं के लिए उनको सबसे बड़ी श्रद्धांजलि दे सकती थी. 

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कांग्रेस प्रवक्ता पवन बंसल कहते हैं कि ये नाम 10 साल पहले से तय हुआ हुआ है. हर बात पर विवाद नहीं उठना चाहिए. ये नाम बहुत पहले से तय है. बंसल को समझना चाहिए कि 10 साल पहले का नाम बदल भी तो सकता है. बस नेम प्लेट ही चेंज करना होता है. दरअसल सच्‍चाई ये है कि कांग्रेस आज भी गांधी फैमिली से आगे कुछ सोचती ही नहीं है.

कांग्रेस मुख्यालय के पते में दीन दयाल उपाध्याय मार्ग का नाम न आए इसके लिए देखिए क्या किया कांग्रेस ने

ये कितनी दिलचस्प बात है कि नया कांग्रेस मुख्यालय, इंदिरा भवन, नई दिल्ली में दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय से मुश्किल से एक किलोमीटर की दूरी पर है. एक ही सड़क पर होने के बावजूद, कांग्रेस मुख्यालय का पता कोटला मार्ग है, न कि दीन दयाल उपाध्याय मार्ग. है न आश्चर्य की बात?

ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस, जो दीन दयाल उपाध्याय - एक हिंदुत्व विचारक, आरएसएस प्रचारक और प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के आदर्श माने जाने वाले नेता के नाम से जुड़ने से बचना चाहती है, ने अपने पिछले दरवाजे को मुख्य प्रवेश द्वार बना लिया है. कांग्रेस नए भवन में कोटला रोड पर स्थित प्रवेश द्वार का उपयोग करेगी, जो दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के समानांतर है. इससे नए कांग्रेस मुख्यालय, इंदिरा भवन, का पता 9 ए, कोटला मार्ग होगा.

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