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निज्जर पर भारत को घेरने वाला अमेरिका आईना देखेगा तो दिखेंगी ये 8 लाशें!

अमेरिका दूसरे देशों में घुसकर अपने दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है. अमेरिका का तर्क है कि उसके ऑपरेशन रूस जैसे देशों की कार्रवाई के समान नहीं हैं. अमेरिका का दावा है कि उसके ऑपरेशन में तमाम कानूनी समीक्षा और खतरे का आकलन लिया जाता है. साथ ही जब संदिग्ध को पकड़ना या गिरफ्तार करना संभव नहीं रहता, तब ऐसे ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जाता है.

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सुलेमानी, बगदादी, अल जवाहिरी और लादेन (फाइल फोटो)
सुलेमानी, बगदादी, अल जवाहिरी और लादेन (फाइल फोटो)

कनाडा और भारत के बीच तनाव चरम पर है. वजह खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या. निज्जर की हत्या इस साल जून में कनाडा के सरे में एक गुरुद्वारे के बाहर अज्ञात हमलावरों ने की थी. कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर को कनाडाई नागरिक बताते हुए, उसकी हत्या में भारत का हाथ बताया. चौंकाने वाली बात ये है कि ट्रूडो जिन 'कथित सबूतों' के आधार पर भारत पर ये आरोप मढ़ रहे हैं, वे उन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं. हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सरासर झूठा और राजनीति से प्रेरित बताया है. 

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भारत के खिलाफ कनाडा के आरोपों पर अमेरिका की अब तक की मौन प्रतिक्रिया विरोधाभासी स्थिति को दर्शाती है. अमेरिका ने कनाडा के आरोपों पर भारी चिंता जताई है और पूरी जांच सुनिश्चित करने की बात कही है. जहां अमेरिका एक ओर कनाडा को आतंकी निज्जर की हत्या के कथित इनपुट मुहैया करा रहा है, वहीं अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां खुद दूसरे देशों में जाकर ऑपरेशन्स को अंजाम देती रही हैं. 

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सुलेमानी, बगदादी, लादेन... अमेरिका ने दूसरे देशों में इन ऑपरेशन्स को दिया गया अंजाम
 
ईरानी सैन्य कमांडर सुलेमानी: 4 जनवरी 2020... इराक की राजधानी बगदाद में एयरपोर्ट के बाहर हवाई हमला होता है. इस हमले में ईरानी सैन्य कमांडर और कुद्स फोर्स के चीफ सुलेमानी समेत 10 लोगों की मौत हो जाती है. हमले की जिम्मेदारी दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका लेता है. अमेरिका ने कुद्स फोर्स को 2007 में आतंकवादी घोषित किया था. सुलेमानी की मौत के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रिश्तों में और तल्खी आ गई. ईरानी संसद ने अमेरिकी सेना को आतंकवादी और पेंटागन को आतंकवादी संगठन घोषित करार दिया था और बदला लेने की बात कही थी.

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अबू बकर अल बगदादी: यह पहला मामला नहीं था, जब अमेरिका ने इस तरह से दूसरे देश में इस तरह की कार्रवाई की हो. इससे पहले अक्टूबर 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया था, सीरिया के इदलिब में अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज की कार्रवाई में इस्लामिक स्टेट सरगना अबू बकर अल बगदादी को मार गिराया गया. 

अल-जवाहिरी: अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में दावा किया था कि उसने अलकायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी को एक ड्रोन हमले में ढेर कर दिया. अल-जवाहिरी और ओसामा बिन-लादेन ने ही अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमलों की साजिश रची थी. 

अनवर अल-अवलाकी: अमेरिका ने 2019 में यमन में ड्रोन हमले में अमेरिकी नागरिक और मुस्लिम मौलवी अनवर अल-अवलाकी को मार गिराया था. अमेरिका ने अवलाकी पर साजिश रचने और आतंकियों की भर्ती का आरोप लगाया था. 

ओसामा बिन-लादेन: अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने 2011 में पाकिस्तान के ऐब्टाबाद में ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था. ओसामा अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमलों का मास्टर माइंड था. 

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मैहर अल-अगल: जुलाई 2022 में अमेरिकी सेना ने ऐलान किया कि इस्लामिक स्टेट के आतंकी मैहर अल-अगल को ड्रोन हमले में मार गिराया गया. अमेरिका का आरोप था कि अगल इराक और सीरिया के बाहर आईएसआईएस नेटवर्क बनाने के लिए काम करता था. 

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 हमजा बिन लादेन: ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन को अमेरिकी सेना ने सितंबर 2019 में आतंकवाद विरोधी अभियान में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास मार गिराया था.

अबू इब्राहिम अल-हाशमी अल-कुरैशी: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले साल फरवीर में ऐलान किया था कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेस ने सीरिया में आतंकी विरोधी अभियान के तहत IS कमांडर अबू इब्राहिम अल-हाशमी को मार गिराया है. कुरैशी ने अमेरिकी फोर्स से गिरने के बाद खुद को बम से उड़ा लिया था. 

अमेरिका दूसरे देशों से अलग बताता है अपने ऑपरेशन्स  

अमेरिका के अलावा रूस, उत्तर कोरिया, ईरान और इजराइल की एजेंसियों पर दूसरे देश में टारगेट किलिंग के आरोप लगते रहे हैं. हालांकि, अमेरिका लंबे वक्त से तर्क देता रहा है कि उसके ऑपरेशन रूस जैसे देशों की कार्रवाई से बहुत कम समानता रखते हैं. अमेरिका का दावा है कि उसके ऑपरेशन में तमाम कानूनी समीक्षा और खतरे का आकलन लिया जाता है. साथ ही जब संदिग्ध को पकड़ना या गिरफ्तार करना संभव नहीं रहता, तब ऐसे ऑपरेशन्स को अंजाम दिया जाता है. 

 

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