हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और यूपी में सिराथू विधायक पल्लवी पटेल ने मिलकर पीडीएम न्याय मोर्चा बनाया है. ये मोर्चा अखिलेश यादव की पीडीए पॉलिटिक्स के खिलाफ बनाया गया है. पहले सुनने में आया था कि मोर्चा में स्वामी प्रसाद मौर्य भी शामिल होंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस मोर्चे में यूपी के दो और भी राजनीतिक दल शामिल हैं - राष्ट्र उदय पार्टी और प्रगतिशील मानव समाज पार्टी.
कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन कर लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरे अखिलेश यादव पीडीए की मदद से बीजेपी से मुकाबला कर रहे हैं. पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटर को साधने की कोशिश है.
अखिलेश यादव के खिलाफ गठबंधन से बगावत कर अपना दल कामेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने पीडीएम मोर्चा बनाया है. पीडीएम में पी और डी तो पिछड़े और दलित के लिए ही है, एम मुस्लिम समुदाय के लिए है. दोनों में फर्क अल्पसंख्यक और मुस्लिम नाम का ही है. अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल भले ही मुस्लिम समुदाय के लिए प्रचलन में आ गया हो, लेकिन उसका दायरा बड़ा है, जिसमें क्रिश्चियन और ऐसे दूसरे समुदाय भी आ जाते हैं.
पल्लवी पटेल यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थीं, और सिराथू विधानसभा सीट पर उन्होंने यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराकर जीत हासिल की थी. राज्यसभा चुनाव के दौरान पल्लवी पटेल और अखिलेश यादव की लड़ाई हो गई और वो अलग हो गईं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में पीडीएम की पहली रैली हुई है. ये रैली शहर के नाटी ईमली इलाके की बुनकर कालोनी के मैदान में हुई है. रैली में लोगों की अच्छी खासी भीड़ जमा थी. करीब 40 मिनट के ओवैसी के भाषण में लोगों ने खूब ताली बजाई.
असदुद्दीन ओवैसी की यूपी की राजनीति में दिलचस्पी क्यों?
पीडीएम न्याय मोर्चा में ओवैसी एक पार्टनर जरूर हैं, लेकिन न तो AIMIM का कोई उम्मीदवार यूपी में चुनाव लड़ रहा है, न ही उन्होंने सिंबल ही शेयर किया है. पल्लवी पटेल को भी इसके लिए जूझना पड़ रहा है, लेकिन ओवैसी एक सीमित दायरे तक हिस्सेदारी निभा रहे हैं.
लोकसभा चुनाव के लिए पल्लवी पटेल ने कुछ लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की सूची भी जारी की है, जिसमें चंदौली भी शामिल है, और वाराणसी से भी चुनाव लड़ने की चर्चा है, लेकिन अभी तक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं हुई है - वाराणसी में पीडीएम की पहली रैली करने की वजह भी यही लगती है.
ओवैसी की नजर में कौन हैं 'ओरिजिनल' मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने उनकी 'ओरिजिनल जबान' का खासतौर पर जिक्र किया. बोले, लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान पहुंचे... वहां उनकी जबान अपनी ओरिजिनल जबान पर आ गई.
बांसवाड़ा में मोदी के भाषण का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा, 17 करोड़ मुसलमान घुसपैठिये हैं... और वो ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं... मोदी की एक ही गारंटी है मुसलमानों से नफरत.
ओवैसी ने ये भी याद दिलाया कि उनकी पारिटी को बीजेपी की बी-टीम कहा जाता है, और सवाल उठाया - अगर हम बी-पार्टी हैं, तो अखिलेश यादव 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव और 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव बीजेपी से क्यों हार गये? क्या उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या योगी आदित्यनाथ से कोई डील कर रखी है?
AIMIM नेता ओवैसी का कहना है कि अखिलेश यादव का आधा परिवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठकर चाय पीता है... और वो हमसे कहते हैं कि जान दे दो.
अखिलेश यादव से इतने खफा क्यों हैं
ओवैसी के भाषण में अखिलेश यादव के साथ साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के चुनावी गठबंधन का भी जिक्र आया. अतीक अहमद का जिक्र करते हुए बोले, पूर्व सांसद को हथकड़ी में गोली मारी जाती है... मदरसों के बंद कराने की बात आती है... मगर, अखिलेश यादव की जबान से एक शब्द नहीं निकलता... वो बस इतना ही चाहते हैं कि भैया के लिए जान दो, पीछे चलो, और दरी बिछाओ.
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार बदले जाने की बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि मुरादाबाद से एचटी हसन को टिकट सिर्फ इसलिए नहीं दिया गया, ताकि वो दोबारा जीत कर मजबूत न हो जायें.
अखिलेश यादव पर ओवैसी का इल्जाम है कि वो पिछड़ों और मुसलमानों के बारे में पूछने पर वो कुछ बोल नहीं पाते हैं. बोले, समाजवादी पार्टी या कांग्रेस ने कभी हम लोगों के साथ न्याय नहीं किया... हम यूपी की राजनीति के एक बड़े तबके के लिए एक विकल्प लेकर आये हैं... सपा और भाजपा से छुटकारा पाना है तो पीडीएम न्याय मोर्चा को मजबूत करना होगा.
ओवैसी ने माफिया मुख्तार को 'शहीद' करार दिया है
अतीक अहमद की तरह ही, ओवैसी ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को ज्यूडिशियल कस्टडी में मार दिये जाने का इल्जाम लगाया. मुख्तार को 'शहीद' बताते हुए ओवैसी ने कहा, ऐसे लोग कभी मरा नहीं करते, वो जिंदा रहते हैं.
ओवैसी के भाषण पर बीजेपी की तरफ से चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है. शिकायत करने वाले बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ के पदाधिकारी शशांक शेखर त्रिपाठी का कहना है कि असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से लगातार भड़काऊ भाषण और बयान दिये गये, जो धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले हैं.
शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि ओवैसी की तरफ से मुख्तार अंसारी की मौत पर भी सवाल उठाया गया. जबकि, जांच में ये साफ हो गया है कि मुख्तार अंसारी की मौत हार्ट अटैक से हुई है.
असदुद्दीन ओवैसी भले दावा करते फिरें कि वो बीजेपी की बी-टीम नहीं हैं, लेकिन उनकी गतिविधियां ही उनके इरादे पर सवाल खड़ा कर देती हैं. न तो वो यूपी में अपना उम्मीदवार खड़ा कर रहे हैं, न सिंबल दे रहे हैं - आखिर उनका मकसद क्या है?