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फुलेरा पर कमेंटबाजी पड़ी बीजेपी को भारी, पंचायत के फैन्स को ये बातें क्यों नहीं आईं रास

पंचायत वेब सीरीज के फुलेरा गांव की शांति और वहां की हल्की फुल्की राजनीतिक चुहलबाजी ही पब्लिक को पसंद आती है. यही कारण है कि लगातार तीसरे पार्ट में भी यह सीरीज लोकप्रिय हो रही है. पर बीजेपी के मीडिया सेल को इस गांव में जंगलराज कहां से दिखता है?

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पंचायत के फुलेरा पर राजनीति
पंचायत के फुलेरा पर राजनीति

पंचायत वेबसीरीज के फुलेरा गांव पर ट्वीट कर बीजेपी फंस गई है. लगता है बीजेपी आईटी सेल पर शनि की साढ़े साती चल रही हो. उसका हर दांव उल्टा पड़ जा रहा है. अब यह कह कर कि गांव फुलेरा में अगर बीजेपी का नेतृत्व होता तो गांव की तस्वीर कुछ और होती, दर्शकों और सोशल मीडिया पर उपस्थित लोगों को नाराज कर दिया है. दरअसल 15 जून शाम को चार बजकर 2 मिनट पर भारतीय जनता पार्टी के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल पर एक ट्वीट हुआ . इस ट्वीट को बाद में बीजेपी के अन्य हैंडल से भी रिट्वीट किया गया है. इस ट्वीट के बाद लोग भारतीय जनता पार्टी के पीछे पड़ गए. सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी का किसी भी हद तक जाकर फेवर करने वाले कई ट्वीटर हैंडल्स को भी यह नागवार लगा. उन्होंने भी इसके लिए बीजेपी के मीडिया सेल की क्वास लगाई. जाहिर है कि अब चुनाव खत्म हो गए हैं, इस तरह बेवजह का ट्वीट करके बीजेपी का मीडिया हैंडल करने वाले लोग अपनी हंसी उड़वा रहे हैं. चुनावों में भी कांग्रेस का मीडिया सेल बीजेपी के मीडिया सेल पर हावी हो गया था. लगता है बीजेपी की हार की समीक्षा अभी तक हुई नहीं, या हुई भी तो उसमें मीडिया सेल को कहीं से जिम्मेदारी नहीं माना गया है. अन्यथा इस तरह का ट्वीट करने वालों से पार्टी अब तक तौबा कर चुकी होती.

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फुलेरा में किसी पार्टी का नेतृत्व नहीं है

ट्वीट की पहली स्लाइड में दावा किया गया है कि यदि फुलेरा में बीजेपी नेतृत्व होता तो... ये होता. जिन लोगों ने इस लोकप्रिय वेबसीरीज को देखा है उन्हें पता है कि फुलेरा में पंचायत चुनाव होते हैं पर राजनीतिक दलों की भागीदारी नहीं हैं.सीरीज की कहानी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की है. उत्तर प्रदेश के गांवों में भी बहुत पहले से ही चुनाव राजनीतिक सिंबल पर नहीं होते रहे हैं. उत्तर प्रदेश में पिछली बार भी जो पंचायत चुनाव हुए हैं वो भी बिना राजनीतिक दलों के नेतृत्व के ही लड़े गए. स्थानीय निकाय चुनावों में जरूर राजनीतिक दलों ने अपना समर्थन दिया था.बीजेपी के ट्वीट करने वालों को शायद गांवों के बारे में पता ही नहीं है या तो ट्वीट करने वालों ने पंचायत सीरीज को देखा नहीं होगा. अगर देखा होतो शायद इस तरह का ट्वीट करते ही नहीं.

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फुलेरा पर्याप्त डेवलप लगता है

इस ट्वीट में यह बताने की कोशिश की गई है कि फुलेरा में यदि बीजेपी के चुने हुए पंच होते तो यह गांव पिछड़ा नहीं होता. पंचायत वेब सीरीज का फुलेरा गांव पर्याप्त डिवेलप दिखता है. गांव में साफ सुथरा पंचायत घर बना हुआ है. पंचायत घर के बगल में पानी की टंकी दिख रही है. गांव में बिजली के पोल हैं. सड़क भी है. जहां पंचायत प्रधान की बाइक की गिरती है वहां जरूर गड्डा है. पर सड़कों पर गड्डा तो देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश का शोविंडो कहे जाने वाले नोएडा में भी कहीं कहीं मिल जाएगा. दूसरी बात यह है कि कहानी में फुलेरा यूपी में है. यहां पिछले सात साल से बीजेपी की ही सरकार है. दूसरे जिस गांव में शूटिंग हुई है वह गांव मध्य प्रदेश में है वहां भी बीजेपी की सरकार पिछले 20 साल से अधिक समय से है. कायदे से तो बीजेपी को किसी कांग्रेस शासित राज्य को दिखाना चाहिए था. अगर ट्वीट करने वाली टीम को इतनी  भी समझ नहीं है तो क्‍या ही कहा जाए. 

जंगलराज तो कहीं से भी नहीं है फुलेरा में

बीजेपी के इस ट्वीट के एक स्लाइड में फुलेरा में जंगलराज खत्म करने की बात कही गई है. फुलेरा में कहीं से भी जंगलराज तो कम से  कम नहीं ही है. सीरीज की कहानी में जितनी शांति दिखाई गई है वास्तव में उतनी शांति तो कम से कम उत्तर प्रदेश के गांव तो नहीं ही हैं. गांव में मुकदमेबाजी, खेत खलिहान के नाम पर मारपीट,  ठीका पट्टा को लेकर लंबा संघर्ष , सरकार योजनाओं को लेकर दलाली चरम पर होती है. फुलेरा इन सब से बहुत दूर है. फुलेरा में एक गरीब आदमी को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक कमरा का मिल चुका है. उसे लगता है कि अपनी मां के नाम पर एक मकान और ले सकता है. एक मकान और लेने के लिए उसे कितने झूठ बोलने पड़ते हैं. कितनी जांच पड़ताल होती है. अंत में जांच पड़ताल के चलते ही उसका आवंटन रद्द हो जाता है. कहीं भी रिश्वत या कमीशन जैसी चीजें नहीं दिखती हैं. 

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ट्वीट में जिस बुजुर्ग महिला को झोपड़ी से निकलते दिखाया गया है उसके भी बेटे के नाम से पक्का मकान मिल चुका है. चूंकि एक परिवार को एक ही मकान मिल सकता है इसलिए वो झोपड़ी में रहने का नाटक करती है.जरूर इस ट्टवीट को करने वाला बंदे ने सीरीज नहीं देखी होगी. उसे अपने ट्वीट का टार्गेट पूरा करना होगा. कुछ अलग किस्म के ट्वीट काआइडिया नहीं मिल रहा होगा. प्रेशर में इस तरह की फर्जी बात बना दी.  

लगातार बीजेपी आईटी सेल की भद पिट रही है

लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी के मीडिया सेल और आईटी सेल की लगातार भद पिटी है . चुनावों के दौरान हर दिन कांग्रेस का मीडिया सेल एजेंडा सेट करता था और बीजेपी दिन भर उस पर सफाई देती रहती थी. बीजेपी लगातार पुराने लीक पर चल रही है जबकि कांग्रेस के ट्वीटर हैंडल से लगातार इनोवोटिव आइडिया की भरमार नजर आ रही है. नेहरू और नरेंद्र मोदी की तुलना करते हुए बाप तो बाप होता है सीरीज कांग्रेस ने शुरू किया तो बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को वैसा ही बनाकर पेश कर दिया. इसके पहले भी बीजेपी के कई ऐड कैंपेन ने पार्टी की भद पिटवाई थी. पा-पा 'वॉर रुकवा दिया' वाला ऐड तो मजाक का पात्र बन गया.उसके मुकाबले कांग्रेस के ट्वीट्स में बेहतर सेंस ऑफ ह्यूमर नजर आ रहा है. जैसे चुनाव परिणाम आने के बाद केरल कांग्रेस का ट्वीट अखिलेश और चंद्रबाबू की मुलाकात की एक तस्वीर के साथ कैप्शन था कि मोदी जी चिंता न करिए ये पुरानी तस्वीर है.

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