प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एक बार फिर सनातन धर्म की आलोचना करने वालों पर हल्ला बोला है. मध्य प्रदेश के बीना में एक सभा को संबोधित करते हुए पीएम ने विपक्षी गठबंधन INDIA को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि कुछ दल समाज को विभाजित करने में लगे हैं. भारत की संस्कृति पर हमला करना उनका मकसद है. एक बार पहले भी सनातन धर्म विवाद पर बोलते हुए पीएम ने भाजपा नेताओं से कहा था कि वो इस विवाद का सख्ती से जवाब दें. पीएम ने दुबारा सनातन मुद्दे पर बोलकर यह जता दिया कि अब 2024 में इस मुद्दे को बीजेपी इसे ब्रह्मास्त्र के तरीके से इस्तेमाल कर सकती है.
आखिर वे कौन से कारण हैं जिसके चलते बीजेपी को लगता है कि अगर इस मुद्दे को 2024 के चुनावों में हथियार बनाएं तो वह कारगर साबित हो सकता है? बीजेपी जानती है इस मुद्दे पर लगातार हमलावर होने से इंडिया गठबंधन में फूट पड़ सकता है. इसके साथ ही हिंदुत्व के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में मदद मिलेगी. सबसे बड़ी बात बीजेपी इस मुद्दे को आधार बनाकर तमिलनाडु में अपने ओबीसी कार्ड को और मजबूत कर राज्य में अपनी जड़ें जमा सकती है.
डीएमके क्यों बैकफुट पर आई
सनातन धर्म विवाद में बीजेपी के मौका लपकते देख द्रमुक बैकफुट पर है. बुधवार को द्रमुक के सर्वे सर्वा और तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि सनातन धर्म पर अब बयानबाजी खत्म करें, क्योंकि इसका फायदा बीजेपी उठा रही है.आए दिन बीजेपी का कोई न कोई मंत्री इस मुद्दे पर बोल रहा है. स्टालिन ने कहा, इस मुद्दे पर बात करने के बजाय एनडीए गवर्नमेट के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मुद्दे जनता के सामने लाएं. शुरूआत में जब बीजेपी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हुई है तो द्रमुक नेताओं ने उदयनिधि से भी ज्यादा खतरनाक बयान दिए. कोई एड्स बताने लगा तो खूंखार जानवरों से तुलना करने लगा. बता दें कि विवाद की जड़ तमिलनाडु चीफ मिनिस्टर के बेटे और सरकार में मंत्री उदयनिधि का वह बयान था जिसमें उन्होंने कहा था कि सनातन का सिर्फ विरोध नहीं किया जाना चाहिए. बल्कि, इसे समाप्त ही कर देना चाहिए. सनातन धर्म सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है. कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जा सकता, उन्हें खत्म ही कर देना चाहिए. हम डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना का विरोध नहीं कर सकते. हमें इसे मिटाना है. इसी तरह हमें सनातन को भी मिटाना है.' अचानक डीएमके का बैकफुट पर आना क्या यही संकेत नहीं देता है कि पार्टी को लगता है कि गलती हो गई?
खुद को मॉडरेट दिखा रहे स्टालिन, क्या डैमेज कंट्रोल की कोशिश है
पिछले एक हफ्ते से सनातन मुद्दे पर खुद को मॉडरेट दिखा रहे तमिलनाडु के सीएम स्टालिन शुरू में तो अपने बेटे के बचाव में इस तरह से आए जैसे लगा कि उदयनिधि को सनातन विरोधी साबित कर वो तमिल राजनीति में अपने बेटे को स्थापित कर देंगे. उन्होने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बयान बताकर ये साबित करने की कोशिश की कि सनातन धर्म सनातन काल से शोषण पर आधारित रहा है. उनके बाद डीएमके के कई नेताओं के भी उसी तरह के बयान आए जिससे ऐसा लगा कि वास्तव में यह एक रणनीति के तहत हो रहा है. पर जिस तरह पिछले दिनों स्टालिन हिंदू-हिंदू , मंदिर-मंदिर खेल रहे हैं वो बताता है कि स्टालिन को अब लग रहा कि उनसे गलती हो गई. वो डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में हैं.
तमिलनाडु में बीजेपी का ओबीसी कार्ड
2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की कुल आबादी लगभग 7.21 करोड़ है जिसमें अनुसूचित जाति करीब 20.01 फीसद है. जो वोटर्स के हिसाब से करीब 18 प्रतिशत हैं. इसीलिए राज्य की 7 लोकसभा सीटें आरक्षित हैं. बीजेपी के टार्गेट में अनुसूचित जातियों की वे सात उप जातियां हैं जो अनुसूचित जाति की कैटेगरी से बाहर आना चाहती हैं. 2019 के चुनावों में ही बीजेपी ने इन जातियों पर फोकस किया था. ये उपजातियां अपने को किसान कहती हैं और दशकों से इस कैटेगरी से निकलने की मांग कर रही हैं. दूसरे तमिलनाडु के बीजेपी अध्यक्ष अन्नामलाई पिछड़ी जाति से आते हैं .कभी सिंहम के नाम से मशहूर आईपीएस अफसर रहे अन्नामलाई बहुत तेजी से राज्य की जनता में लोकप्रिय हो रहे हैं. तमिलनाडु की जनता उत्तर के मुकाबले में धर्म को कुछ ज्यादा ही मानने वाली होती है. शायद यही कारण है कि डीएमके अब बैकफुट पर है और लगातार मंदिर-मंदिर खेल रही है.
इंडिया गठबंधन में सनातन मुद्दे पर पड़ सकती है फूट
बुधवार को जिस तरह आम आदमी पार्टी का बयान सनातन मुद्दे पर आया वो क्लियर इंडिकेशन है कि अगर यह मुद्दा गरम होता है तो इंडिया से कई दल छिटक सकते हैं. आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि ''मैं सनातन धर्म से हूं. मैं ऐसे बयानों की निंदा और विरोध करता हूं. किसी को भी इस तरह के बयान नहीं दिए जाने चाहिए. किसी को भी धर्म पर ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए. उन्होंने उदयनिधि की भी निंदा की ऐसे बयानों के लिए. शिवसेना की तरफ से भी इस तरह के बयानों की निंदा की गई थी. कांग्रेस के अंदर भी इस बयान को लेकर दो तरह के विचार हैं. बीजेपी की यही कोशिश होगी कि कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेर सके.