बिहार में शराबबंदी लागू किया जाना तो नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है, और तेजस्वी यादव की इस मुद्दे पर कभी कोई स्पष्ट राय भी नहीं दिखी है - लेकिन प्रशांत किशोर ने बिलकुल अलग स्टैंड ले लिया है.
शराबबंदी के मुद्दे पर तेजस्वी यादव और बीजेपी या कांग्रेस के रुख में कभी भी ज्यादा फर्क नहीं नजर आया है. जिस तरह से प्रशांत किशोर ने ये पहल की है, किसी ने भी न तो कभी खुल कर सपोर्ट किया है, और न ही साफ तौर पर आगे आकर मुखालफत ही की है..
बेशक बीजेपी अभी नीतीश कुमार के पीछे खड़ी है, लेकिन बिहार में लड़ाई PK बनाम तेजस्वी यादव होती जा रही है.
शराबबंदी पर स्पष्ट स्टैंड लेकर पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ने बिहार की सियासी लड़ाई को एक लेवल ऊपर पहुंचा दिया है - और अभी से ये तस्वीर भी साफ हो गई है कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में शराबबंदी का भी प्रमुख मुद्दा बनना तय है.
शराबबंदी पर प्रशांत किशोर का चुनावी वादा
बिहार को घूम घूम कर देखने और समझने के बाद, चुनाव रणनीतिकार से अब जन सुराज के नेता बन चुके प्रशांत किशोर ने शराबबंदी को लेकर बड़ा चुनावी वादा किया है.
मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार बनने के एक घंटे के भीतर शराबबंदी को समाप्त कर दिया जाएगा.
प्रशांत किशोर की ये घोषणा तेजस्वी यादव के 2020 के चुनावी वादे जैसी ही है. तब तेजस्वी ने आरजेडी के सत्ता में आने पर कैबिनेट की पहली बैठक में पहली दस्तखत से बिहार के युवाओं को 10 लाख नौकरियां देने का आदेश जारी करने का वादा किया था.
प्रशांत किशोर से जब पत्रकारों ने सवाल किया कि शराबबंदी को कैसे खत्म करेंगे, तो प्रशांत किशोर ने कहा कि ये जानकारी तभी दी जाएगी जब हमारी सरकार बनेगी. नये वादे से पहले भी प्रशांत किशोर शराबबंधी की खामियां गिना चुके हैं.
प्रशांत किशोर का बड़ा दावा: सरकार बनती है तो एक घंटा के भीतर शराबबंदी खत्म कर देंगे. सिर्फ शराब की दुकानें बंद हुई हैं होम डिलीवरी चालू है.@PrashantKishor #Bihar #Biharnews pic.twitter.com/jAp1WV294h
— FirstBiharJharkhand (@firstbiharnews) September 14, 2024
तेजस्वी यादव 2020 में सत्ता में नहीं आ सके थे, लेकिन बाद में नीतीश कुमार के पाला बदलने पर जब वो डिप्टी सीएम बने तो कुछ नौकरियां देने की कोशिश जरूर हुईं. हालांकि, उस पर तेजस्वी यादव के साथ साथ मुख्यमंत्री होने के नाते नीतीश कुमार की भी पूरी दावेदारी रहती है.
प्रशांत किशोर का कहना है कि शराबबंदी का फैसला नीतीश कुमार की तरफ से ढकोसला है, और ये बेअसर साबित हुआ है.
जन सुराज नेता का दावा है कि शराबबंदी के कारण अवैध घरेलू शराब वितरण बढ़ गया है, और बिहार को 20,000 करोड़ रुपये के संभावित उत्पाद शुल्क के राजस्व से वंचित कर दिया है. प्रशांत किशोर ने नेताओं और नौकरशाहों पर भी अवैध शराब के कारोबार से फायदा उठाने का आरोप लगाया है.
शराबबंदी लागू किया जाना गलत नहीं है, और ऐसा भी नहीं है कि बिहार देश का अकेला ऐसा राज्य है. लेकिन जिस तरह से बिहार में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला नहीं थमा है - और न ही अवैध शराब का कारोबार.
बिहार के शराबबंदी कानून को लेकर विवाद भी काफी हुए हैं, यहां तक कि अदालतों में इतने ज्यादा केस पहुंच गये कि सुनवाई करना दूभर हो रहा था. फिर शराबबंदी कानून में संशोधन किया गया. देखा जाये तो शराबबंदी से फायदे से ज्यादा नुकसान ही हुआ है.
तेजस्वी पर निशाना, नीतीश तो बहाना हैं
सवाल है कि शराबबंदी अगर नीतीश कुमार का प्रोजेक्ट है तो तेजस्वी यादव की राजनीति पर प्रशांत किशोर के इस कदम से क्या असर पड़ेगा?
सबसे बड़ा असर तो यही पड़ेगा कि नीतीश कुमार के खिलाफ एक बड़े मुद्दे को प्रशांत किशोर ने लपक लिया है, और अब वो घूम घूम कर लोगों को समझाएंगे कि तेजस्वी यादव को तो बिहार के लोगों की कोई फिक्र ही नहीं है.
फिक्र क्यों नहीं है, ये समझाने के लिए ही तो प्रशांत किशोर पहले से ही ‘नौवीं फेल नेता’ मुहिम चला रहे हैं - जाहिर है, आगे भी प्रशांत किशोर यही समझाएंगे कि तेजस्वी यादव को शराबबंदी से हो रहे नुकसान का अंदाजा ही नहीं है.
महिलाओं की नाराजगी का कितना जोखिम
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए ही 2015 के चुनाव में सत्ता में लौटने पर शराबबंदी लागू करने का ऐलान किया था, और तब प्रशांत किशोर उनके चुनाव अभियान की निगरानी कर रहे थे. बाद में वो मुख्यमंत्री के सलाहकार और फिर जेडीयू में उपाध्यक्ष भी बनाये गये थे. आखिर में निकाल भी दिये गये.
असल में, शराबबंदी के नाम पर बिहार में महिलाओं का वोट हासिल करने के साथ साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए हथियार बनाया था. पहली बार एनडीए छोड़ने के बाद जब वो लालू यादव के साथ महागठबंधन के नेता हुआ करते थे, मोदी को देश भर में शराबबंदी लागूू करने की चुनौती देते फिर रहे थे. लगे हाथ ये भी याद दिलाना नहीं भूलते थे कि जब गुजरात में लागू है, और बिहार में भी लागू हो गया है, तो पूरे देश में शराबबंदी लागू क्यों नहीं कर दी जाये - लेकिन गुजरते वक्त के साथ नीतीश कुमार को मजबूरन शराबबंदी को ढोना पड़ रहा है.
प्रशांत किशोर ने पहली बार शराबबंदी पर एक स्टैंड लिया है - और जाहिर है, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में ये एक मुद्दा तो बनेगा ही.
बड़ा सवाल ये है कि प्रशांत किशोर के शराबबंदी खत्म किये जाने के मसले पर बिहार के महिलाएं क्या सोच रही हैं? वैसे प्रशांत किशोर ने महिलाओं का वोट पाने के लिए 40 महिलाओं को चुनाव में टिकट देने की बात पहले से ही कह रखी है.