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प्रियंका गांधी का फिलिस्तीन प्रेम कांग्रेस के लिए क्या फायदेमंद साबित होने वाला है? | Opinion

प्रियंका गांधी का फिलिस्तीन लिखा हुआ बैग लेकर संसद में जाना उन्हें खबरों में तो बनाए रखेगा पर इसका असल फायदा बीजेपी को ज्यादा हो सकता है. पर प्रियंका भी यूं ही नहीं बवाल मोल ले रही हैं. इसके पीछे उनकी रणनीतिक भी कम खतरनाक नहीं है.

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प्रियंका के फिलिस्तीन लिखा बैग ने राजनीतिक हलचल मचा दिया.
प्रियंका के फिलिस्तीन लिखा बैग ने राजनीतिक हलचल मचा दिया.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आज सोमवार को Palestine लिखा बैग लेकर संसद पहुंची हैं. फिलिस्तीन को लेकर उन्होंने जो प्रेम दिखाया है वो यूं ही नहीं है. कुछ दिनों पहले पेलेस्टाइन को लेकर पूरी दुनिया के सेलेब्रेटी इस तरह के एक्ट के द्वारा इजरायल हमले में घायल लोगों विशेषकर बच्चों को लेकर अपना समर्थन दे रहे थे. पर इस बीच देश और दुनिया में और भी बहुत समस्याएं आ चुकी हैं. कहा जा सकता है कि प्रियंका गांधी सांप के गुजरने के बाद लकीर को पीट रही हैं. पर प्रियंका के गेम को समझना इतना आसान भी नहीं है. चूंकि ऐसा पहली बार नहीं कि प्रियंका गांधी ने फिलिस्तीन का समर्थन किया है. इजरायल के हमले के दौरान भी लगातार वो ट्वीट करके फिलिस्तीन पीड़ितों के लिए अपनी संवेदना प्रकट करती रही हैं. हाल ही में भारत में आए फिलिस्तीन के राजदूत Abed Elrazeg Abu Jazer से भी मुलाकात की थी. फिलिस्तीनी राजदूत ने प्रियंका गांधी को वायनाड लोकसभा चुनाव में जीत की बधाई दी थी.

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प्रियंका का फिलिस्तीन प्रेम अखिलेश यादव , ममता और अरविंद केजरीवाल के लिए संकेत

ऐसा नहीं है कि प्रियंका गांधी को यूं ही फिलिस्तीन प्रेम जग गया है. प्रियंका को पता है कि उनकी लड़ाई पहले बीजेपी से नहीं है, विपक्ष से है. प्रियंका और राहुल आजकल बीजेपी के बजाय विपक्ष को खत्म करने की रणनीति पर ज्यादा काम कर रहे हैं. दरअसल कांग्रेस को कमजोर करने के पीछे क्षेत्रिय दलों की प्रमुख भूमिका रही है. समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आरजेडी और आम आदमी जैसी पार्टियों ने मुस्लिम और दलित वोटों पर कब्जा करके कांग्रेस को उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल , बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों से बेदखल कर दिया. इस सूची में और भी बहुत से राज्य हैं. लोकसभा चुनावों में यह देखने को मिला कि मुस्लिम और दलित समुदाय ने कांग्रेस उम्मीदवारों को जमकर सपोर्ट किया. कांग्रेस यह समझ रही है कि अगर उसे अपना पुराना वोट बैंक फिर से मिल जाए तो वो बीजेपी को तो नहीं कम से कम विपक्ष की जगह तो कब्जा कर ही लेगी. यही कारण रहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने यूपी में कोई चुनाव न होते हुए भी संभल और हाथरस का दौरा किया. कांग्रेस को पता है कि संभल, हाथरस, फिलिस्तीन, कोटे का दायरा बढ़ाने का वादा , जाति जनगणना आदि मुद्दे उनके पुराने कोर वोटर्स को एकजुट करने के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं. 

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बांग्लादेशी हिंदुओं की आवाज बनना ज्यादा फायदेमंद होता

हालांकि जब से ये खबर आई है कि फिलिस्तीन लिखा हुआ बैग लेकर  प्रियंका संसद में आईं हैं, तब से बीजेपी समर्थक उन्हें हिंदू विरोधी साबित करने के पीछे पड़े हुए हैं. लगातार यह कहा जा रहा है कि काश प्रियंका गांधी ने आज बांग्लादेश में मारे जा रहे हिंदुओं के लिए यह संवेदना दिखाई होती. दरअसल प्रियंका गांधी लगातार फिलिस्तीन और गाजा में पीड़ितों के लिए आवाज उठा रही हैं. इसी साल अक्टूबर में हमास और इजराइल के बीच शुरू हुई जंग को एक साल पूरे होने पर भी प्रियंका गांधी ने इजराइल पर निशाना साधा था. गाजा में बढ़ती मौतों के बीच प्रियंका ने इजराइल पर हमला बोला था. गाजा पर हर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए प्रियंका ने कहा था कि 7,000 लोगों की हत्या के बाद भी और हिंसा का सिलसिला नहीं रुका है. इनमें 3,000 मासूम बच्चे थे. वायनाड में चुनाव लड़ते समय भी लगातार प्रियंका गांधी ने फिलिस्तीन का मुद्दा उठाया था. बार-बार बांग्लादेश के हिंदुओं के लिए आवाज उठाने के बावजूद कभी व्यक्तिगत रूप से उन्होंने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे ये संकेत जाए कि उन्हें हिंदुओं की भी फिक्र है. जाहिर है कि बीजेपी यही चाहती भी है. जितना कांग्रेस एंटी हिंदू बनी रहेगी उतना ही बीजेपी को फायदा होता रहेगा. कांग्रेस की हार के पीछे का कारणों का जिक्र करते हुए एंटनी समिति जैसी बातें कितनी ही लोगों ने कही पर कांग्रेस ने हिंदू समर्थक छवि बनाने का कोई प्रयास नहीं किया. हालांकि कांग्रेस ने फिलिस्तीन लिखे बैग के विरोध को देखते हुए अपने ट्वीटर हैंडल से बांग्लादेश के हिंदुओं की चिंता व्यक्त करके डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है. पर इतने से कुछ होने वाला नहीं है.

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प्रियंका की व्यक्तिगत राजनीति के लिए फिट

हालांकि प्रियंका की व्यक्तिगत राजनीति के लिए फिलिस्तीन पीड़ितों की चिंता करना बिल्कुल फिट बैठता है. वो जितना इस तरह के एक्शन लेंगी उतना ही वो बीजेपी विरोधियों के निशाने पर होंगी. फिलहाल इस समय संघर्ष इस बात का है कि बीजेपी का सबसे बड़ा विरोधी कौन है. इस तरह की हरकतों से हो सकता है कि वो चुनाव में अपनी पार्टी को जीत न दिला सकें. पर उन्हें राजनीति में प्रमुख विपक्षी नेता के रूप में स्टैब्लिश होने और लगतार हेडलाइन में बने रहने के लिए यह सब फायदेमंद साबित होगा. जिस तरह पिछले कुछ दिनों में इंडिया गठबंधन के लोगों ने कांग्रेस पर भरोसा न करके पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नेतृत्व सौंपने की बात कर रहे थे, उन लोगों को भी समझ में आएगा कि दरअसल देश भर में बीजेपी का विरोध करने वाली पार्टी तो सही मायने में कांग्रेस ही है. कांग्रेस हर दिन कुछ इस तरह करके नेशनल मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है . मतलब साफ है कि प्रियंका गांधी बीजेपी ही नहीं विपक्ष के बीच भी अपने अस्तित्व को साबित करना चाहती हैं.

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