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राहुल गांधी बार-बार मायावती को कटघरे में क्यों खड़ा कर रहे हैं?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सवाल है, ‘मायावती ठीक से चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं?’ और बीएसपी नेता ने जवाब में X पर 6 पोस्ट लिखी है - सवाल है कि राहुल गांधी को जवाब मिला क्या?

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मायावती के साथ राहुल गांधी विपक्षी खेमे के अन्य नेताओं से अलग व्यवहार क्यों कर रहे हैं?
मायावती के साथ राहुल गांधी विपक्षी खेमे के अन्य नेताओं से अलग व्यवहार क्यों कर रहे हैं?

क्या मायावती को टार्गेट करके राहुल गांधी दलित वोटों को कांग्रेस के पक्ष में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. जैसे आंबेडकर के मुद्दे पर संसद में मुहिम चलाई थी. अमित शाह के आंबेडकर को लेकर दिये एक बयान के बाद राहुल गांधी ने काफी तेज अभियान चलाया था. और, अभियान को धार देने के लिए वो सफेद छोड़कर नीली टी-शर्ट पहनने लगे थे. साथ में प्रियंका गांधी वाड्रा नीली साड़ी में नजर आती थीं.

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हाथ में संविधान की कॉपी लिये तो राहुल गांधी अब भी जहां तहां देखे ही जाते हैं, आंबेडकर का नाम लेने से एक ही तीर से दो निशाने साध लिये जाते हैं. दलितों वोटर और संविधान - और मायावती का जिक्र भी उसी मुहिम का एक्सटेंशन लगता है. 

दलित छात्रों के साथ संवाद के दौरान राहुल गांधी ने संविधान की कॉपी दिखाते हुए कहा कि इस किताब में जो विचार हैं, वे तीन हजार साल पुराने हैं. राहुल गांधी ने मायावती की तारीफ भी की और उनकी राजनीतिक शैली पर गंभीर सवाल भी उठाये. 

राहुल गांधी ने कहा, कांशीराम ने दलितों के लिए काम किया... बाद में मायावती ने उनके काम को बढ़ाया... मायावती ठीक से चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं?

राहुल गांधी ये सवाल 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी के विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक से दूरी बनाने पर है. 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के बाद भी राहुल गांधी ने मायावती पर जांच एजेंसियों के दबाव में राजनीति करने का इल्जाम लगाया था, और तब भी राहुल गांधी ने दावा किया था कि कांग्रेस की तरफ से बीएसपी नेता को मुख्यमंत्री पद का ऑफर भी दिया गया था. हालांकि, तब राहुल गांधी को यूपी चुनाव से दूरी बनाते ही देखा गया था. यूपी में वो अमेठी के कैंपेन तक सीमित नजर आये थे, और पंजाब में ही ज्यादा सक्रिय देखे गये थे. और, यूपी प्रभारी रहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव अकेले लड़ने की ही बात कही थी.
 
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी आखिर बार बार बीएसपी नेता मायावती पर कांग्रेस के साथ आने के लिए डोरे क्यों डाल रहे हैं? 

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दिल्ली में कांग्रेस का स्टैंड अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के खिलाफ होता है. बिहार में भी, अभी से वैसी ही संभावना तेजस्वी यादव की आरजेडी के खिलाफ लगता है. हाल फिलहाल अखिलेश यादव से टकराव की भी झलक मिलती है, और पश्चिम बंगाल में तो ममता बनर्जी ने नो-एंट्री का बोर्ड फिर से लगा दिया है. 

राहुल गांधी बार बार मायावती को कठघरे में क्यों खड़ा कर रहे हैं?

अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी ने दावा किया कि अगर मायावती विपक्षी गठबंधन के साथ आ जातीं, तो बीजेपी हार जाती. बोले, मैं चाहता था… बहनजी लोकसभा चुनाव हमारे साथ मिलकर लड़ें, लेकिन वो साथ नहीं आईं… हमें काफी दुख हुआ… अगर तीनो पार्टियां एक साथ हो जातीं तो रिजल्ट कुछ और ही होता. 

अप्रैल, 2022 में भी एक किताब के विमोचन के मौके पर मायावती को लेकर राहुल गांधी ने कहा था, कांग्रेस ने मायावती को विधानसभा चुनाव में गठबंधन और मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन वो हमसे बात तक नहीं कीं.

तब राहुल गांधी ने बीएसपी नेता पर बेहद गंभीर आरोप भी लगाया था,  ‘मायावती ने सीबीआई, ईडी और पेगासस के कारण से बीजेपी को चुनाव में खुला रास्ता मुहैया कराया.’

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राहुल गांधी के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए मायावती ने तब कड़ा ऐतराज जताया था. ऐतराज तो अब भी जताया है, लेकिन उसमें सफाई ज्यादा नजर आ रही है. 

मायावती ने सोशल साइट X पर इस सिलसिले में कुल 6 पोस्ट लिखे हैं. तीन पहले, और लगातार तीन बाद में. 

पहले की ही तरह राहुल गांधी को अपने गिरेबां में झांकने की सलाह देते हुए मायावती ने कांग्रेस को जातिवादी पार्टी बताते हुए लोकसभा चुनाव और दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बी टीम करार दिया है.

विपक्षी खेमे की पार्टियों के साथ चुनावी गठबंधन न करने को लेकर मायावती हमेशा ही उनके वोट ट्रांसफर न होने की बात करती रही हैं. ऐसा ही समाजवादी पार्टी को लेकर भी कहा था, और कांग्रेस को लेकर भी उनकी वैसी ही दलील है. 

मायावती से राहुल गांधी को सवाल का जवाब मिला क्या?

X पर मायावती ने लिखा है, बीएसपी ने यूपी और अन्य राज्यों में जब भी कांग्रेस जैसी जातिवादी पार्टियों के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा है, तब हमारा बेस वोट उन्हें ट्रांसफर हुआ है, लेकिन वे पार्टियां अपना बेस वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं करा पाई हैं… ऐसे में बीएसपी को हमेशा घाटे में ही रहना पड़ा है.

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बीएसपी नेता ने कांग्रेस पर दलितों के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया है, खासकर उन राज्यों में जहां कांग्रेस मजबूत है या फिर उसकी सरकार है. मायावती ने अपनी पोस्ट में सवाल किया है, यूपी जैसे राज्य में जहा कांग्रेस कमजोर है वहा बीएसपी से गठबंधन की बरगलाने वाली बातें करना… ये उस पार्टी का दोहरा चरित्र नहीं तो और क्या है?

निश्चित तौर पर मायावती को अपने तरीके से अपना पक्ष रखने और रिएक्ट करने का हक है, लेकिन मायावती ने जो कुछ कहा है, उसके बाद भी सवाल यही बच रहा है कि बीएसपी नेता ने कांग्रेस नेता के सवाल का जवाब दिया है क्या?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सवाल है, ‘मायावती ठीक से चुनाव क्यों नहीं लड़ रही हैं?’

और मायावती की तरफ से ठीक से जवाब नहीं आने की वजह से ये भी सवाल उठता है कि क्या बीएसपी भी बीजेपी के खिलाफ वैसे ही चुनाव लड़ती है, जैसे विपक्षी खेमे की बाकी राजनीतिक पार्टियां?

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के बावजूद मायावती के कैंपेन शुर न करने पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और केंद्रीय मंत्री अमित शाह बार बार सवाल उठा रहे थे. तब मायावती की तरफ से जवाब आया था कि बीएसपी के पास बीजेपी और कांग्रेस की तरह संसाधन नहीं हैं, इसलिए उनकी पार्टी आखिरी दौर में कैंपेन के लिए उतरती है.

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अमित शाह और प्रियंका गांधी की ही तरह मायावती ने राहुल गांधी को भी जवाब दिया था जब कांग्रेस नेता ने मायावती सीबीआई, ईडी और पेगासस से डरा हुआ बताया था. 

राहुल गांधी के आरोपों पर मायावती ने कहा था, सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स के डर से बीजेपी के खिलाफ नरम रहने के आरोप में बिल्कुल सच्चाई नहीं है… इन सबसे जुड़े मामले हमने केंद्र में रही किसी भी सरकार की मदद से नहीं, बल्कि सरकारों के खिलाफ जाकर सुप्रीम कोर्ट में जीते हैं.

राहुल गांधी के संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गले मिलने और फिर आंख मारने वाली घटना की याद दिलाते हुए मायावती ने कहा था, राहुल गांधी संसद में अचानक उठकर प्रधानमंत्री मोदी के गले से चिपक जाते हैं… हमारी पार्टी इस तरह के नाटक नहीं करती है… गली कूचों पर बैठ जाना, बस या घाट यात्रा निकालना हमारी पार्टी की शैली में शामिल नहीं है.

मायावती का कांग्रेस को जातिवादी पार्टी बताना भी बिल्कुल वैसा ही है जैसे राहुल गांधी तेलंगाना चुनाव के दौरान बीआरएस नेता के. चंद्रशेखर राव पर  परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगा रहे थे.

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