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राजस्थान में कन्हैया लाल हत्याकांड को मुद्दा बनाना BJP के लिए क्यों हो गई मजबूरी?

टेलर कन्हैया लाल हत्याकांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अचानक आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है? क्या इस मुद्दे को गरम कर बीजेपी हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण में सफल हो सकेगी?

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कन्हैया लाल (बीच में) , और उसके हत्यारोपी दोनों तरफ
कन्हैया लाल (बीच में) , और उसके हत्यारोपी दोनों तरफ

राजस्थान विधानसभा चुनावों में पिछले कुछ दिनों में जिस तरह बीजेपी ने टेलर कन्हैया लाल हत्याकांड के मुद्दे को उठाया है वो आश्चर्यजनक नहीं है. पर चुनावी कैंपेन की शुरूआत में इस मुद्दे को लेकर पार्टी उतना उत्साहित नहीं थी जितना पिछले 2-3 हफ्तों में अचानक हो गई है. आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि पार्टी को जोर शोर से इस मुद्दे को उठाना पड़ रहा है? क्या कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी हों या यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सभी ने कन्हैया हत्याकांड को बड़े मुद्दे के रूप में ले लिया है? क्या बीजेपी इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ ले सकेगी?

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पेशे से टेलर कन्हैया लाल की 28 जून, 2022 को बर्बर तरीके से हत्या कर दी गयी थी. हमलावर कपड़े सिलवाने के बहाने दुकान में घुसे और धारदार हथियार से कन्हैयालाल का गला काटा और वीडियो भी बनाया था. हमलावर बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी का सपोर्ट करने से नाराज थे. दरअसल कन्हैयालाल ने किसी वट्सग्रुप पर पैगंबर मोहमद साहब पर की गई टिप्पणी का समर्थन किया था. घटना के कुछ देर बाद ही राजस्थान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में मामला NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया. आरोपियों की गिरफ्तारी में उदयपुर के 2 युवकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण थी. जिन्होंने हत्यारोपियों का पीछा किया और पुलिस को इन्फार्म करते रहे.

राजस्थान में कन्हैयालाल की हत्या पर राजनीति घटना के बाद ही शुरू हो गयी थी, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को हत्या के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे. अब जब चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, ये मुद्दा फिर से सुर्खियां बन रहा है - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्हैयालाल की हत्या के लिए कांग्रेस की राजनीति और सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हत्या का कनेक्शन बीजेपी से जोड़ रहे हैं. फिलहाल राजस्थान की राजनीति का विश्लेषण करने पर 6 कारण ऐसे निकलते हैं जिसके चलते बीजेपी को अचानक इस हत्याकांड में अपने लिए फायदा नजर आने लगा है.

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1- कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने का मौका

कन्हैया लाल ने अपनी हत्या के पहले स्थानीय पुलिस से अपनी सुऱक्षा की गुहार लगाई थी. उन्हें बार-बार धमकी मिल रही थी. एक मुस्लिम टेलर की शिकायत पर उन्हें 2 रात हवालात में भी जाना पड़ा था. वापस आने के बाद भी नूपुर शर्मा का वट्सऐप ग्रुप में समर्थन करने के चलते उन्हें धमकियां मिल रही थीं. बीजेपी इस बहाने आरोप लगा रही है कि राज्य में पुलिस की कार्यप्रणाली निकम्मी हो चुकी है.कानून व्यवस्था दिन प्रति दिन खराब होने का खमियाजा था कन्हैया लाल हत्याकांड . अगर जरा भी पुलिस एक्टिव होती तो यह हत्याकांड नही होता. इस हत्याकांड के बहाने बीजेपी राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रही है. 

2- ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण

कन्हैया लाल तेली जाति से थे. तेजी जाति उत्तर भारत के कई राज्यों में ओबीसी समुदाय में आता है. इस हत्याकांड के बहाने बीजेपी ओबीसी जातियों की भी हमदर्दी लेने की फिराक में है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी ओबीसी हैं. उनकी अन्य पिछड़ा समुदाय में पैठ भी अच्छी है. बीजेपी की प्लानिंग है कि इस मुद्दे को जितना उठाया जाएगा ओबीसी वोटों की ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में हो सकता है.

3- उदयपुर संभाग में दांव पर प्रतिष्ठा

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उदयपुर में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं. पिछली बार के विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस ने सरकार बनाई थी तब भी यहां की 8 में से 6 विधानसभा सीटें बीजेपी ने जीती थी. यही कारण है कि इस इलाके को बीजेपी का इलाका कहा जाता है. इसलिए पार्टी के ऊपर सभी सीटें जीतने का दबाव भी है. अगर कन्हैया लाल हत्याकांड मुद्दा बन जाता है तो बीजेपी यहां की सभी सीटें जीत सकती है. उदयपुर की ही एक सीट से कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. वल्लभ चुनाव कैंपनिंग के दौरान लगातार मंदिरों के दर्शन कर रहे हैं. जो सबूत है कि वो नहीं चाहते कि कन्हैया लाल हत्याकांड पर हिंदुओं का कांग्रेस के खिलाफ ध्रुवीकरण हो जाए.

4- कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व से बीजेपी को चिंता 

अपने इस कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड खेलते रहे हैं. उन्होंने कई ऐसी स्कीम्स और योजनाओं पर कार्य किया है जो उन्होंने केवल हिंदुओं का बीजेपी के पक्ष में ध्रुवीकरण न हो इसके लिए किया है. बीजेपी को यह डर भी है कि अगर हिंदुओ का कुछ वोट भी अशोक गहलोत कांग्रेस की ओर कर ले गए तो बीजेपी का खेल बिगड़ जाएगा. यही कारण है कि कन्हैया लाल हत्याकांड के जरिए बीजेपी यह साबित करना चाहती है कि हिंदुओं की असली हितैषी पार्टी बीजेपी ही है.यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, आसाम के सीएम हिमंता और स्वयं पीएम मोदी ने यह कहा कि अगर बीजेपी की सरकार होती तो कन्हैया लाल की हत्या नहीं होती. हत्या अगर हो जाती तो दोषियों को अब तक सजा मिल चुकी होती.

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5- बीजेपी और कांग्रेस की एक जैसी गारंटी स्कीम्स

 बीजेपी और कांग्रेस की गारंटी स्कीम्स और जनता को बांटी जाने वाली रेवड़ियों का वादा एक जैसा हो चुका है.अब अगर बीजेपी को वोटरों को कोई और प्रलोभन नहीं मिलेगा तो उनका वोट भटक सकता है. इस परेशानी से दोनों पार्टियों जूझ रही हैं. शायद यही कारण है कि बीजेपी कन्हैया लाल हत्याकांड, एंटी रोमियो स्क्वॉड आदि की बात करने लगी है. हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण ही कांग्रेस के मुकाबले पार्टी को बढ़त दिला सकती है. 

6- गुलाब चंद्र कटारिया का इन चुनावों से दूर होना

राजस्थान बीजेपी के कद्दावर नेता गुलाबचंद्र कटारिया उदयपुर से करीब 9 बार विधायक रह चुके हैं.राजस्थान सरकार में कई मंत्रालयों को उन्होंने सुशोभित किया है. आसाम का राज्यपाल बनाए जाने के ऐन पहले तक वो राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता थे. राजस्थान में उन्हें भावी सीएम के रूप में देखा जा रहा था. राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से उनका छत्तीस का आंकड़ा था. उदयपुर में पिछले विधानसभा चुनावों में 8 में से 6 सीट जीतने में उनकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है. करीब 2 दशक के बाद उनकी अनुपस्थिति में पार्टी उदयपुर में चुनाव लड़ रही है. पार्टी का टार्गेट इस बार सभी सीटें जीतने की है. शायद यही कारण है कि पार्टी चाहती है कि कन्हैया लाल हत्याकांड मुद्दा बन जाए तो पार्टी अपनी जीत को दुहरा सकेगी.

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