राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट... भक्ति भाव की बातें अपनी जगह होंगी, लेकिन चुनाव मैदान का नजारा तो ऐसा ही देखने को मिल रहा है - यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के चुनाव कैंपेन इसकी मिसाल हैं.
ये तो पहले से ही मालूम है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा बीजेपी लोकसभा चुनाव में जोर शोर से उठाएगी, लेकिन विपक्ष भी मददगार बन जाएगा ऐसा नहीं लग रहा था. निश्चित रूप से ममता बनर्जी अपने राजनीतिक हितों के मद्देनजर राम का नाम ले रही हैं, लेकिन चर्चा में तो ला ही रही हैं.
राम मंदिर बनने का सबसे ज्यादा राजनीतिक प्रभाव तो उत्तर प्रदेश में होगा, ऐसा पहले से ही माना जा रहा है, और बीजेपी के स्टार प्रचारक के रूप में योगी आदित्यनाथ देश भर में अलग जगाने लगे हैं. ताजातरीन उदाहरण योगी आदित्यनाथ की राजस्थान में हुई चुनावी रैलियां हैं.
योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के बहाने कांग्रेस को टारगेट किया है, जबकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी राम के नाम पर बीजेपी पर दंगे कराने का इल्जाम लगा रही हैं. राजस्थान और पश्चिम बंगाल अलग अलग छोर पर हैं, लेकिन दो अलग अलग पॉलिटिकल लाइन वाले नेताओं के भाषण में कॉमन बातें राम मंदिर मुद्दे के अखिल भारतीय विस्तार की तरफ इशारा कर रहे हैं - भले ही दोनों की पेशगी अपने अपने हिसाब से ही क्यों न हो.
ये भी पता चला है कि बीजेपी एक बार फिर से पूरे देश को राममय बनाने की कोशिश में जुट गई है. इसी साल 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के मौके पर बीजेपी के मनमाफिक माहौल तो बन ही गया था - और करीब करीब वैसी ही तैयारी अब 17 अप्रैल के लिए हो रही है.
असल में 17 अप्रैल को रामनवमी है. और राम मंदिर के लिए तो ये पहली रामनवमी भी है. मौका तो है ही, दस्तूर भी निभाए ही जाने चाहिये, लेकिन मान कर चलना चाहिये सब कुछ पॉलिटिकल ही होगा - और ये भी सुनने में आ रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मौके पर अयोध्या का दौरा कर सकते हैं.
खास बात ये है कि रामनवमी के दो दिन बाद ही 19 अप्रैल को पहले फेज के वोट डाले जाएंगे. रामनवमी को ही पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार का आखिरी दिन होगा. ऐसा संयोग बार बार तो आता नहीं. जब संयोग बना है, तो प्रयोग करने में भला कोई क्यों पीछे रहे.
अपना अपना फायदा, अपना अपना हिसाब किताब
योगी आदित्यनाथ और ममता बनर्जी के कैंपेन में प्रसंग तो अलग हैं, लेकिन मुद्दे एक जैसे हैं - 'राम नाम' और 'दंगा'.
योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान में कांग्रेस को निशाना बनाया है, वैसे ही वहां लड़ाई भी तो उसी से है. ममता बनर्जी ने बीजेपी को टारगेट किया है, तृणमूल कांग्रेस के लिए पश्चिम बंगाल में बड़ी चुनौती तो बीजेपी ही है. कांग्रेस को तो ममता बनर्जी घास भी नहीं डालतीं, और कहने भर को ही INDIA ब्लॉक में टीएमसी को साथ बताया जा रहा है.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं, 'कांग्रेस पार्टी देश के लिए समस्या है. कर्फ्यू लगाना इसके डीएनए में शामिल है.'
योगी आदित्यनाथ ने कर्फ्यू शब्द का इस्तेमाल किया है, जबकि ममता बनर्जी दंगे की बात कर रही हैं. बात तो वही है. दंगे होने पर ही तो कर्फ्यू लगाये जाते हैं. दोनों का तेवर और मकसद तो एक जैसा ही है.
योगी आदित्यनाथ और ममता बनर्जी दोनों ही तौर तरीके एक जैसे अपना रहे हैं, जहां जो जिसका दुश्मन है - निशाना बनाया जा रहा है, मुद्दे की बात बस ये है कि दोनों जगह राम और दंगे का जिक्र जोर शोर से हो रहा है.
कांग्रेस को लेकर राजस्थान के लोगों को योगी आदित्यनाथ समझाते हैं, ये गरीबों को भूखा मार डालेगी, लेकिन आतंकवादियों को बिरयानी खिलाने का इंतजाम कर देती है.
जाहिर है योगी आदित्यनाथ बिरयानी का जिक्र कर पाकिस्तानी आंतवादी कसाब की बात कर रहे हैं. उन दिनों 26/11 के हमलावार कसाब बिरयानी खाने की काफी चर्चा रही. ये तभी की बात है जब देश में यूपीए की सरकार हुआ करती थी - हालांकि, बाद में मालूम हुआ कि ये भी एक जुमला ही था. जैसा काले धन के 15 लाख की बातें.
ये बात तब तक सच मानी जाती रही जब तक सरकारी वकील रहे उज्ज्वल निकम ने बता नहीं दिया कि न तो कसाब ने कभी बिरयानी मांगी थी, न ही कभी उसे परोसी गई थी. ऐसी मनगढ़ंत बातें आतंकियों की तरफ से उसके पक्ष में बनाई जा रही भावनात्मक लहर को काउंटर करने के लिए की गई थीं.
राम मंदिर को लेकर कांग्रेस को निशाना बनाते हुए योगी कहते हैं, राम मंदिर बनाना तो दूर, कांग्रेस ने भगवान राम और भगवान कृष्ण को काल्पनिक व्यक्ति माना है.
ममता बनर्जी भी अपनी चुनावी रैली में राम का ही नाम लेती हैं, लेकिन बीजेपी को नसीहत देने के लिए. राम मंदिर उद्घाटन समारोह के बहिष्कार का सबसे पहले स्टैंड लेने वाली ममता बनर्जी कह रही हैं, भगवान राम आपको दंगा करने के लिए नहीं कहते हैं... लेकिन ये लोग दंगा करेंगे.
2021 के पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले भी ममता बनर्जी बीजेपी पर ऐसे ही इल्जाम लगाया करती थीं. हिंसा की घटनाओं को लेकर ममता बनर्जी का दावा होता था कि बीजेपी बंगाल में दंगा कराने के लिए दूसरे राज्यों से लोगों को लाती है - लेकिन इस बार ममता बनर्जी नया तरीका बता रही हैं.
बंगाल के पूर्वी मिदनापुर में जांच पड़ताल के लिए पहुंची एनआईए की टीम का हवाला देते हुए ममता बनर्जी कहती हैं, बीजेपी एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी को भेजकर दंगा करेगी.
पुरुलिया रैली में ममता बनर्जी लोगों को समझाती हैं, 19 अप्रैल को वोटिंग है... और ये 17 अप्रैल को दंगा करेंगे, - और बीजेपी को नसीहत देती हैं, भगवान राम आपको दंगा करने के लिए नहीं कहते हैं.
राम नाम और दंगा क्या चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है?
6 अप्रैल को एनआईए की एक टीम पूर्वी मिदनापुर के भूपतिनगर में एक टीएमसी नेता के घर पर 2022 के विस्फोट केस की जांच करने पहुंची थी और दो स्थानीय टीएमसी नेताओं, मनोब्रत जना और बालचंद्र मैती को गिरफ्तार भी किया.
वहां के लोगों ने एनआईए अफसरों पर हमला बोल दिया. जांच एजेंसी की एक कार पर ईंटें भी फेंकी गईं. संदेशखाली के बाद एनआईए की टीम पर हमले का ये दूसरा वाकया था. जब एनआईए की टीम शेख शाहजहां से पूछताछ करने पहुंची थी तब भी ऐसा ही हुआ था.
ममता बनर्जी एनआईए की रेड से खफा हैं. और चुनाव से पहले जांच एजेंसी के एक्शन को लेकर बीजेपी पर सवाल उठा रही हैं. पूछती हैं, आधी रात को छापा क्यों मारा? क्या उनके पास पुलिस की परमिशन थी?
और वो लोगों के हमले को भी जायज ठहरा रही हैं. ममता बनर्जी कह रही हैं कि वहां के लोगों ने वैसे ही रिएक्ट किया जैसे वहां किसी भी अजनबी के आने पर होता.
बीजेपी को लेकर ममता बनर्जी की तरफ से सवालों की बौछार होती है, वे चुनाव से ठीक पहले लोगों को क्यों गिरफ्तार कर रहे हैं? बीजेपी क्या सोचती है... वो हर बूथ एजेंट को गिरफ्तार कर लेगी? एनआईए को क्या अधिकार है?
ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दंगे की जो तारीख बताई है वो वोटिंग के दो दिन पहले की है. 17 अप्रैल, 2024, जिस दिन रामनवमी है - संयोग भी देख सकते हैं, और प्रयोग भी.
तो क्या बीजेपी के साथ साथ विपक्षी दल भी राम मंदिर को चुनावी मुद्दा बनाने में जुट गये हैं? मुमकिन है, ममता बनर्जी को ये सब करने का पश्चिम बंगाल में फायदा मिले, लेकिन बाकी जगह फायदे में तो बीजेपी ही रहेगी.