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India को भारत किये जाने पर हो हल्ला क्यों, पहले भी तो बदले गए इन देशों के नाम

खबर है कि केंद्र सरकार India का नाम बदलकर हमेशा के लिए उसे भारत करना चाहती है और इसके लिए संसद में प्रस्ताव ला सकती है. मामले पर विपक्ष की नजर है और आलोचना का दौर शुरू हो गया है. आइये नजर डालें उन देशों पर, जिनका नाम पहले कुछ और था और अब उन्हें किसी और नाम से जाना जाता है.

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India को भारत किये जाने की बात कहकर केंद्र ने लोगों को एक नए विमर्श का मौका दे दिया है.
India को भारत किये जाने की बात कहकर केंद्र ने लोगों को एक नए विमर्श का मौका दे दिया है.

जी-20 सम्मेलन में आने वाले मेहमानों को डिनर के लिए आमंत्रित करते हुए राष्ट्रपति ने रिपब्लिक ऑफ इंडिया की जगह 'रिपब्लिक ऑफ भारत' शब्द का इस्तेमाल कर एक नयी बहस को पंख दे दिए हैं. जी 20 सम्मलेन के फ़ौरन बाद ही केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस सत्र में केंद्र देश का नाम India के बजाए भारत रखने का प्रस्ताव रख सकता है.  माना जा रहा है कि यदि ये प्रस्ताव पास हो गया और देश का नाम बदल कर भारत हो गया तो इससे सबसे बड़ा झटका विपक्ष के I.N.D.I.A. गठबंधन को लगेगा.  

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सरकार के मन में क्या है? देश का नाम बदलने की अपनी और संघ की मुहिम में सरकार कितनी कामयाब होगी? इन सभी सवालों का जवाब वक़्त देगा लेकिन ये कोई पहली बार नहीं है जब किसी देश का नाम बदला है.ध्यान रहे आज दुनिया में 195 देश हैं. इनमें से कई ने कभी सीमा परिवर्तन का हवाला दिया. तो कभी अपने किसी नेता के सम्मान में, तो कभी युद्ध और आजादी के नाम पर अपना नाम बदला है. इसके अलावा राजनीतिक प्रेरणा भी एक अहम कारण है जो किसी देश को अपना नाम बदलने के लिए बाध्य करती है. 

हो सकता है एक देश का नाम बदलना कहने, सुनने और बोलने में एक बहुत छोटी सी चीज लगे लेकिन ये उतना भी आसान नहीं है.इसमें बड़ी मात्रा में पैसा खर्च होता है  और पुराना नाम क्योंकि लोगों के जेहन में रहता है इसलिए नया नाम पचाने में उन्हें शुरूआती दौर में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. आइये नजर डालें उन देशों पर जिनका नाम पहले कुछ और था और जो अब किसी और नाम से जानें जाते हैं. 

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इंडिया को भारत किये जाने पर विरोध करने वाले याद रखें पहले भी कई देशों के नाम बदले गए हैं

नीदरलैंड

डच हुकूमत ने हॉलैंड नाम को बदलकर अपनी छवि में एक बड़ा बदलाव किया. 2020 तक चाहे वो राजनीतिज्ञ रहे हों या फिर पर्यटन बोर्ड और केंद्र सरकार सभी ने हॉलैंड को नीदरलैंड कहना शुरू कर दिया था.  अब नॉर्थ हॉलैंड और साउथ हॉलैंड यूरोपीय देश के 12 प्रांतों में दो प्रांत हैं. एक समय में हॉलैंड को नशीली दवाओं के उपयोग और कानूनी वेश्यावृत्ति के एक बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता था और शायद यही वो कारण था कि  यूरोप के पर्यटकों की एक बड़ी आबादी राजधानी एम्स्टर्डम आती थी.

सरकार को भले ही इससे भारी राजस्व प्राप्त हो रहा था मगर इस बात को उन्होंने गंभीरता से लिया और छवि बदलने और अतीत को भुलाने के उद्देश्य से हॉलैंड का नाम नीदरलैंड किया.

उत्तर मैसेडोनिया

2019 में, मैसेडोनिया गणराज्य आधिकारिक तौर पर उत्तरी मैसेडोनिया गणराज्य बन गया. यहां नाम क्यों बदला गया वजह पूर्णतः राजनीतिक थी. उत्तरी मैसेडोनिया ने नाटो और यूरोपीय संघ में शामिल होने पर ध्यान केंद्रित करते हुए ग्रीस के साथ संबंधों में सुधार करने की मांग की थी.

ग्रीस ने बहुत लंबे समय तक पड़ोसी देश के लिए मैसेडोनिया नाम के इस्तेमाल पर अपना विरोध जाहिर किया था, ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रीस के एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र का नाम भी यही है.

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बाद में इस विषय पर लंबी बातचीत हुई और उत्तरी मैसेडोनिया, इसकी आधिकारिक भाषा और नागरिकों का नाम मैसेडोनिया किया गया. 

काबो वर्दे

सेनेगल के तट से लगभग 700 किलोमीटर  दूर अटलांटिक महासागर में स्थित इस द्वीप राष्ट्र ने 2013 में नाम परिवर्तन के लिए अपना आधिकारिक अनुरोध दर्ज कराया था. पहले इसे केप वर्डे कहा जाता था. नाम बदले जाने की मांग करते हुए यहां के संस्कृति मंत्री ने कहा था कि देश एक मानकीकृत नाम चाहता है जिसके नाम को अनुवाद करने की आवश्यकता न पड़े.

ईरान

मार्च 1935 से पहले तक वेस्टर्न वर्ल्ड में पश्चिमी दुनिया में ईरान जो पर्शिया नाम से जाना जाता था. 1935 में, ईरानी सरकार ने उन देशों से, जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध थे, फारस को "ईरान" कहने का अनुरोध किया, जो फ़ारसी में देश का नाम है. कहा जाता है कि बदलाव का सुझाव जर्मनी में ईरानी राजदूत की ओर से आया था.

थाईलैंड 

थाईलैंड उन कुछ दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में से एक है जिस पर कभी भी ब्रिटिश या फ्रांसीसी उपनिवेश का प्रभाव नहीं रहा. सदियों तक इस क्षेत्र पर एक राजा का शासन था और इसे सियाम के नाम से जाना जाता था. 1939 में, देश पर शासन करने वाले राजा ने संवैधानिक राजतंत्र बनने के बाद इसका नाम बदल दिया. 

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एस्वातिनी

अप्रैल 2018 में, राजा मस्वाती III ने देश के औपनिवेशिक अतीत से आजादी के लिए, स्वाज़ीलैंड का नाम बदलकर एस्वातिनी कर दिया. कहा ये भी जाता है कि राजा इस बात से भी नाखुश थे कि कुछ लोगों  स्वाजीलैंड को स्विट्जरलैंड समझ लेते है. बात क्योंकि देश की पहचान से जुडी थी इसलिए स्वाजीलैंड का नाम बदला गया और उसे  एस्वातिनी  किया गया.

चेकिया

मध्य यूरोपीय देश, चेक गणराज्य का नाम बदलने के पीछे की एक बड़ी वजह मार्केटिंग स्टेटर्जी है. 2016 में, चेक सरकार ने इंटरनेशनल कॉन्टेक्स्ट में अपने लघु संस्करण को बढ़ावा देने की सिफारिश के साथ, आधिकारिक तौर पर इसका नाम बदलकर चेकिया कर दिया.

उनका तर्क था कि इससे  अन्य देशों को वहां के उत्पादों से जुड़ने में आसानी होगी. मजेदार बात ये है कि यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र और कुछ बड़ी कंपनियाँ इसे चेकिया के नाम से संदर्भित करती हैं, लेकिन यह नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय नहीं हुआ खुद वहां के प्रधानमंत्री ने माना था कि ये नाम उन्हें पसंद नहीं है.

श्रीलंका

एस्वातिनी की तरह, श्रीलंका ने भी अपने औपनिवेशिक अतीत से आजादी के लिए अपना नाम बदल लिया. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसका नाम 1972 में तब बदला गया जब इसने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता हासिल की. ज्ञात हो कि पहले श्रीलंका को सीलोन नाम से जाना जाता था.

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कंबोडिया

तमाम मौके आए हैं जब कंबोडिया ने अपना नाम बदला है. 1953 और 1970 के बीच, देश का नाम बदलकर कंबोडिया साम्राज्य और फिर 1975 तक खमेर गणराज्य करा था. 1975 से 1979 तक कम्युनिस्ट शासन के तहत, इसे डेमोक्रेटिक कम्पूचिया कहा जाता था. वर्तमान में इसे किंगडम ऑफ कंबोडिया के नाम से जाना जाता है.

म्यांमार

म्यांमार को मूल रूप से बर्मा कहा जाता था, एक लोकप्रिय विद्रोह के दमन में हजारों लोगों के मारे जाने के एक साल बाद, सत्तारूढ़ सैन्य जनता ने 1989 में इसका नाम बदलकर म्यांमार कर दिया. इस बदलाव को संयुक्त राष्ट्र और फ्रांस तथा जापान जैसे देशों ने मान्यता दी, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन ने नहीं.

आयरलैंड

1937 में, यूनाइटेड किंगडम के साथ सभी संबंधों को हटाने के लिए आयरिश फ्री स्टेट को आयरलैंड में बदल दिया गया. ध्यान रहे कि इस देश का यूनाइटेड किंगडम के साथ 2 वर्षों तक भीषण युद्ध चला.

जिम्बाब्वे

रोडेशिया एक औपनिवेशिक नाम था. 1953 और 1963 के बीच, दक्षिणी रोडेशिया उत्तरी रोडेशिया और न्यासालैंड के साथ रोडेशिया और न्यासालैंड संघ में शामिल हो गया. अप्रैल 1980 में अपनी स्वतंत्रता के बाद देश को जिम्बाब्वे गणराज्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली और इसका नाम बदलकर जिम्बाब्वे कर दिया गया.

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जर्मनी 

1990 से पहले तक जर्मनी को ईस्ट जर्मनी के नाम से जाना जाता था, बाद में इसका नाम बदला और अब जर्मनी हमारे सामने है.

माली 

1960 से पहले तक माली को फ्रेंच सूडान के नाम से जाना जाता रहा है. 

इन देशों के अलावा, कई देश के नामों में कई अन्य बदलाव भी हुए हैं, जैसे शब्दों को जोड़ना या हटाना, अलग-अलग वर्तनी का उपयोग और विभिन्न भाषाओं का उपयोग. उदाहरण के लिए, पहले कांगो गणराज्य के नाम से जाना जाने वाला देश अब कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में जाना जाता है.

बहरहाल, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में किसी भी मुल्क के नाम बदले जाने की वजह पूर्णतः राजनीतिक होती है. नेता या सत्तारूढ़ पार्टी ही आपसी सहमति से इस बात का फैसला करते हैं कि उनके मुल्क का यदि नाम बदला गया, तो वो क्या होगा. जिक्र इंडिया के सन्दर्भ में हुआ है तो चाहे वो सत्ताधारी दल भाजपा हो या फिर राष्ट्रीय स्वंसेवक संघ इनकी लंबे समय से मांग है कि इंडिया का नाम बदल दिया जाए और उसे भारत कर दिया जाए.

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