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Family Planning 2.0 के साथ मोहन भागवत ने प्रस्तावित जनसंख्या नीति को दे दी हरी झंडी | Opinion

अब तक बीजेपी नेताओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने की सलाह देते सुना गया था, अब तो संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की सलाह दे डाली है - क्या ये कोई नई जनसंख्या नीति लाये जाने का संकेत है?

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मोहन भागवत का बयान तो बीजेपी के बड़बोले नेताओं की ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली सलाहों पर मुहर जैसी ही लगती है.
मोहन भागवत का बयान तो बीजेपी के बड़बोले नेताओं की ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली सलाहों पर मुहर जैसी ही लगती है.

मोहन भागवत ने हिंदू समाज की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है. नागपुर में आयोजित कठाले कुल सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख ने कहा, कुटुंब समाज का हिस्सा है... और हर परिवार एक इकाई है. आधुनिक जनसंख्या विज्ञान का हवाला देते हुए भागवत ने कहा, किसी भी समाज की जनसंख्या 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वो समाज दुनिया से खत्म हो जाता है. यहां 2.1 जनसंख्या से उनका आशय प्रजनन दर से था. 

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ऐसे में जबकि केंद्र में बीजेपी की सरकार है, जैसे ही देश की जनसंख्या पर कोई बात होती है, वो हिंदू-मुस्लिम बहस में उलझ जाती है. विपक्षी दलों के नेता संघ और बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर सांप्रदायिकता के आरोपों में घेर लेते हैं. जनसंख्या को लेकर मोहन भागवत जो बात कही है, साक्षी महाराज जैसे बीजेपी नेता पहले से ही करते रहे हैं. 

'हम दो, हमारे दो' से एक कदम आगे

संघ प्रमुख मोहन भागवत कह रहे हैं, आधुनिक जनसंख्या विज्ञान कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वो समाज दुनिया से नष्ट हो जाता है... वो समाज तब भी नष्ट हो जाता है, जब कोई संकट नहीं होता... कई भाषाएं और समाज नष्ट हो गए हैं... जनसंख्या (प्रजनन दर) 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिये.

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अपनी बात को स्पष्ट करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि 2.1 की जनसंख्या वृद्धि दर बनाये रखने के लिए समाज को दो से अधिक बच्चों की आवश्यकता है - दो से ज्यादा, यानी कम से कम तीन ही होता है. तो इस तरह संघ अब चाहता है कि लोग कम से कम तीन बच्चे पैदा करें. 

मोहन भागवत कहते है, हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी, जिसमें कहा गया था कि जनसंख्या वृद्धि दर 2.1 से नीचे नहीं होनी चाहिये. अगर हम 2.1 की जनसंख्या वृद्धि दर चाहते हैं, तो हमें दो से अधिक बच्चों की जरूरत है... संख्या महत्वपूर्ण है, क्योंकि समाज का बने रहना जरूरी है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले भी कई बार जनसंख्या नीति का जोर देकर जिक्र कर चुके हैं. 

1. अक्टूबर, 2021 में विजयादशमी उत्सव के दौरान जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताते हुए मोहन भागवत ने कहा था कि जनसंख्या नीति होनी चाहिये.

2. ऐसे ही जुलाई, 2022 में प्रजनन दल के 2.1 से नीचे आने को खतरनाक बताते हुए मोहन भागवत ने एक व्यापक जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत बताई थी, और कहा था, जनसंख्या असंतुलन पर हमें नजर रखनी होगी.

3. और उसी दौरान कर्नाटक के सत्य साईं यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मोहन भागवत का कहना था, जनसंख्या बढ़ाने और खाने का काम तो जानवर भी करते हैं... ये जंगल में सबसे ताकतवर रहने के लिए जरूरी है... ताकतवर ही जिंदा रहेगा, ये जंगल का कानून है, इंसानों में ऐसा नहीं है... इंसानों में ताकतवर दूसरे की रक्षा करता है... ये ही इंसानियत की निशानी है.

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आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पहले से ही ज्यादा बच्चों पर जोर

मोहन भागवत के बयान पर रिएक्ट करते हुए लालू यादव की पार्टी आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि पहले संघ और बीजेपी आपस में तय कर लें कि जनसंख्या रोकनी है या बढ़ानी है, क्योंकि बीजेपी के तमाम नेता अक्सर ज्यादा बच्चे पैदा करने की बातें करते रहते हैं.

लेकिन, केंद्र सरकार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू के दो प्रवक्ता विरोधाभासी बातें कर रहे हैं. जेडीयू नीरज कुमार संघ प्रमुख के बयान पर प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहते हैं कि उनकी चिंता जनसंख्या विस्फोट है, जबकि जेडीयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद की बातें आरजेडी प्रवक्ता जैसी लगती हैं. अरविंद निषाद संघ प्रमुख और बीजेपी नेताओं की बातों में विरोधाभास देखते हैं. कहते हैं, मोहन भागवत को ऐसे बयान देने से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से विमर्श कर लेना चाहिये, जो आये दिन जनसंख्या पर सार्वजनिक रूप से अपना विचार प्रकट करते हैं. 

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने मोहन भागवत के बयान को नौकरी और बेरोजगारी से जोड़ दिया है, कहते हैं, जो पहले से हैं उनको तो नौकरियां दिलवा दो... नौकरियां है नहीं, फसल की जमीन कम हो रही है. देश में वैसे ही बेरोजगारी है... जो आज युवा हैं, उनको तौ नौकरियां मिल नहीं पा रही. 

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मोहन भागवत से पहले ऐसी ही सलाहियत तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से भी आई है. चेन्नई में एक शादी समारोह में पहुंचे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा था, लोगों को 16 तरह के धन का संचय करने की जगह, 16 बच्चे पैदा करने पर ध्यान देना चाहिये.

एनडीए की एक और सहयोगी टीडीपी के नेता आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने हाल ही में बताया था, सरकार बड़े परिवारों को प्रोत्साहन देने... और पुराने जनसंख्या-रोधी उपायों को पलटने के लिए कानून बनाने पर विचार कर रही है.

चंद्रबाबू नायडू का कहना था, बुजुर्ग आबादी में बढ़ोतरी के चलते राज्य की अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ सकता है... जैसा जापान, चीन और यूरोप के कई हिस्सों में हो रहा है, जहां युवाओं से ज्यादा बुजुर्गों की संख्या है... दक्षिणी राज्यों में प्रजनन दर 1.6 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 2.1 से कम है.

क्या ये परिवार नियोजन 2.0 है

क्या संघ प्रमुख मोहन ने भागवत परिवार नियोजन 2.0 को हरी झंडी दिखाई है?

संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के एक लेख 'डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी और डेस्टिनी' में कहा गया था कि राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या स्थिर होने के बावजूद, ये सभी धर्मों और क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है... कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है... सीमावर्ती राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और उत्तराखंड में सीमा पार से अवैध प्रवास के कारण अप्राकृतिक आबादी में बढ़ोतरी देखी जा रही है... लोकतंत्र में, जब प्रतिनिधित्व के लिए संख्याएं महत्वपूर्ण हों, और जनसांख्यिकी नियति तय करती है, तो हमें इस प्रवृत्ति के प्रति और भी अधिक सतर्क रहना चाहिये.

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देश में लागू इमरजेंसी के दौर में आबादी पर काबू पाने के लिए नसबंदी कराई जा रही थी. सरकारी सख्ती और नसबंदी लागू किये जाने के कई किस्से सुने जाते रहे हैं. अभी तक बीजेपी नेताओं की तरफ से ज्यादा बच्चे पैदा करने की बातें हिंदुत्व के एजेंडे के तहत काउंटर मेकैनिज्म के तौर पर कही जाती रही है. 

असल में ये मुस्लिम समाज के ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली बातों को काउंटर करने का उपाय है. लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक चुनावी रैली में 'ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले' बोल कर कांग्रेस पर हमला बोला था. मोदी और भागवत दोनो के बयान एक ही लाइन पर हैं, और एक ही तरह की बातें हो रही हैं. 

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर, 15 अगस्त 2019 लाल किले से अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे परिवार को सीधे देश भक्ति से जोड़ कर पेश किया था. मोदी का कहना था, हमारे यहां बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट हो रहा है... ये हमारे लिए, हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए... अनेक नये संकट पैदा करता है... हमारे देश में आज भी स्वयं प्रेरणा से एक छोटा वर्ग परिवार को सीमित करके अपना भी भला करता है, और देश का भी भला करने में बहुत बड़ा योगदान देता है... ये सब सम्मान के अधिकारी हैं, आदर के अधिकारी हैं... छोटा परिवार रखकर भी वो देशभक्ति को ही प्रकट करते हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दो साल बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई, 2021 को 'उत्तर प्रदेश जनसंख्या नीति 2021-2030' रिलीज किया था. जनसंख्या नीति में जन्म दर को 2026 तक 2.1 और 2030 तक 1.9 तक लाने का लक्ष्य रखा गया था. तब उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर 2.7 थी. योगी आदित्यनाथ का कहना था, समाज के विभिन्न तबकों को ध्यान में रखकर सरकार जनसंख्या नीति को लागू करने का काम कर रही है... जनसंख्या नीति का संबंध केवल जनसंख्या को स्थिर करने भर नहीं है, बल्कि हर नागरिक के ​जीवन में खुशहाली और समृद्धि का रास्ता उसके द्वार तक पहुंचाना भी है.

मोहन भागवत का ताजा बयान थोड़ा हैरान करने वाला है, क्योंकि हाल फिलहाल ऐसी बातें कर रही थी, जिस पर विपक्षी दलों के लिए रिएक्ट करना मुश्लिक हो रहा था, ये बात अलग है कि मोहन भागवत की बातों को बीजेपी के लिए नसीहत मानी जाने लगी थी. जैसे ये कहना कि हर मस्जिद में मंदिर ढूंढने की क्यों जरूरत है, जैसे हर मौके पर जय श्रीराम का नारा लगाना क्यों जरूरी है. 

क्या जल्दी ही सरकार ऐसी कोई जनसंख्या नीति लाने जा रही है, जिसके नींव की पहली ईंट संघ की तरफ से रख दी गई है? 

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