किसी दिन, एक विशाल हाथी लकड़ी के पुल को पार कर रहा था. उसके बायें कान के निचले हिस्से पर एक मक्खी बैठी थी. उनके पार जाने के बाद मक्खी ने कहा, "अरे, क्या हमने सचमुच उस पुल को हिला नहीं दिया?"
यह आज के मानवीय दृष्टिकोण का सार बताता है. यद्यपि हम ब्रह्मांडीय पैमाने पर एक सूक्ष्म कण हैं, फिर भी हम स्वयं को धोखा देते हैं कि हम सृष्टि का केंद्र हैं. लोगों का मानना है कि अगर शेयर बाजार चढ़ गया तो उनका जीवन शानदार हो जाएगा. नहीं, अगर हम पौष्टिक भोजन खाएंगे, साफ पानी पिएंगे और शुद्ध हवा में सांस लेंगे तो हमारा जीवन शानदार होगा. इन सबके लिए हमें एक समृद्ध इकोसिस्टम की आवश्यकता है.
'पेड़ जीवित नहीं रहेंगे तो फसल नहीं उगेगी'
लेकिन अगर आप आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पचास वर्षों में धरती पर मेरुदंडी आबादी का सत्तर फीसदी हिस्सा खत्म हो चुका है. दुनिया में अस्सी प्रतिशत कीट बायोमास खत्म हो गया है. यह सचमुच जीवन की मृत्यु है. "ठीक है, अगर कीड़े मर जाते हैं, तो हमें क्या परेशानी है? वैसे भी हमें कीड़े पसंद नहीं हैं!" शहरी आबादी का यही रवैया है. हमें यह समझने की आवश्यकता है कि यदि कल सभी कीड़े मर जाते हैं, तो इस धरती पर ढाई से साढ़े चार साल में सारा जीवन समाप्त हो जाएगा. यदि सभी कीट मर जाते हैं तो आपके पास लगभग अठारह से तीस महीने का समय है. यदि आज सभी सूक्ष्मजीव मर जाते हैं तो कल सब कुछ समाप्त हो जाएगा. मान लीजिए कि मिट्टी में कोई सूक्ष्मजीवी जीवन नहीं है, पेड़ जीवित नहीं रहेंगे, कोई भी फसल नहीं उगेगी.
इस धरती पर अधिकांश जीवन आपकी नग्न आंखों से देखा नहीं जा सकता- यह सूक्ष्मजीवी जीवन है. मुट्ठी भर समृद्ध मिट्टी में पांच से आठ अरब के बीच सूक्ष्मजीव हो सकते हैं. यही वह जीवन है जो इस बात का आधार है कि हम कौन हैं. लेकिन हर साल औसतन 27000 प्रजातियाँ विलुप्त हो जाती हैं.
'मिट्टी की ताकत दूसरे जीवन की ताकत तय करती'
जीवन के साथ मिट्टी का जीवंत होना सबसे महत्वपूर्ण बात है, क्योंकि मिट्टी की ताकत ही हमारे और हर दूसरे जीवन की ताकत को तय करती है. आप इसे पौधों के जीवन के मामले में स्पष्ट रूप से देख सकते हैं. यदि मिट्टी कमजोर है तो पौधा कमजोर है. यदि पौधा कमजोर है तो क्या आप सोचते हैं कि आप कमज़ोर नहीं हुए हैं?
अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया भर में भोजन में पोषक तत्वों की कमी इतनी गंभीर है कि यह दुखद है. संयुक्त राज्य अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के एक अध्ययन में कहा गया है कि लगभग सभी अमेरिकियों में पोटेशियम की कमी है, 90% में विटामिन ई की कमी है, 70% में विटामिन के, 45% में मैग्नीशियम, 43% में विटामिन ए, और 39% में विटामिन सी की कमी है. और ऐसा सबसे समृद्ध देश में है! इसका सीधा मतलब है कि भले ही आप पर्याप्त भोजन खाते हों, लेकिन उसमें पर्याप्त पोषक तत्व नहीं हैं क्योंकि मिट्टी नष्ट हो चुकी है.
'आप सिर्फ पृथ्वी का एक टुकड़ा हैं'
हम भूल गए हैं कि हम पृथ्वी का एक हिस्सा हैं. जो शरीर आप हैं वह केवल वह भोजन है जो आपने खाया है. जो अन्न आपने खाया, वह मिट्टी ही तो है. तो, आप सिर्फ पृथ्वी का एक टुकड़ा हैं या पृथ्वी आपका अधिक विशाल शरीर है. अभी हमारा रवैया यह है कि हम अपनी छोटी उंगली का ख्याल रखेंगे लेकिन हम अपनी बांह का ख्याल नहीं रखेंगे. ऐसे दृष्टिकोण से कष्ट अवश्यंभावी है.
दुर्भाग्य से, आधुनिक शिक्षा लगातार लोगों को केवल अपने बारे में सोचने के लिए प्रशिक्षित कर रही है. यह हमारे आराम और खुशहाली के लिए हर चीज़ का उपयोग करने के बारे में है. प्रारंभ में, हम धरती, पेड़-पौधों, जानवरों का उपयोग करते हैं, और फिर, निस्संदेह, मनुष्यों का भी करते हैं. औपचारिक शिक्षा के माध्यम से शोषण की यह मनोवृत्ति गहराई से स्थापित हो गई है.
हमें तुरंत एक अधिक समावेशी दुनिया की आवश्यकता है. योग या आध्यात्मिक प्रक्रिया का महत्व यह है कि यह समावेशी भावना को लाता है. योग का अंतिम लक्ष्य ऐसी अवस्था में आना है जहां आप पूरे अस्तित्व को अपने ही एक हिस्से के रूप में अनुभव करें. जब एक सर्व-समावेशी अनुभव होता है, तो अपने आस-पास की हर चीज की परवाह करना बहुत स्वाभाविक है क्योंकि जो कोई भी अंदर की ओर मुड़ता है उसे स्वाभाविक रूप से एहसास होता है कि उनका अस्तित्व और बाहरी अस्तित्व अलग-अलग नहीं हैं.
मानव खुशहाली और पर्यावरण की देखभाल दो अलग-अलग चीजें नहीं हैं. इस धरती का संरक्षण और पोषण अपने लिए अच्छे जीवन की आकांक्षा से भिन्न नहीं है.
पिछले साल, जी20 की अध्यक्षता के लिए भारत यह नारा लेकर आया था, "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य." एक ऐसे राष्ट्र और दुनिया का निर्माण करना जिसकी प्रकृति समावेशी हो और हर किसी की खुशहाली के लिए काम करे और इस धरती पर प्रत्येक जीवन के लिए सर्वोत्तम संभावना पैदा करे - यही इस दुनिया के लिए आगे बढ़ने का रास्ता है. आइए इसे साकार करें.