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संजय सिंह को मिली जमानत का आम आदमी पार्टी पर क्या असर होगा, जानिये

संजय सिंह को मिली जमानत आम आदमी पार्टी में सभी के लिए फिलहाल तो बहुत बड़ी राहत है. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की जगह तो वो नहीं ले सकते, लेकिन तात्कालिक जरूरतों के हिसाब से ट्रबलशूटर जरूर साबित हो सकते हैं, बशर्ते केजरीवाल की अरविंद गैरमौजूदगी में उनके मन में कोई अनाप शनाप ख्याल न आये.

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संजय सिंह की जमानत ही मंजूरी नहीं हुई है, ट्रायल तक गिरफ्तारी से भी छूट मिल गई है.
संजय सिंह की जमानत ही मंजूरी नहीं हुई है, ट्रायल तक गिरफ्तारी से भी छूट मिल गई है.

संजय सिंह आम आदमी पार्टी के लिए संजीवनी बूटी तो नहीं हैं, लेकिन मौजूदा जख्मों पर किसी असरदार बाम की तरह दर्द से निजात जरूर दिला सकते हैं. 

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एक बात खास तौर पर ध्यान खींचती है कि राज्यसभा सांसद संजय सिंह की जमानत अरविंद केजरीवाल के तिहाड़ जेल जाने के ठीक एक दिन बाद ही मंजूर हुई है. संजय सिंह की जमानत को लेकर जो चर्चाएं हो रही हैं, उनमें इस संयोग में प्रयोग देखने की कोशिश भी हो रही है. जिनका आरोप है कि ईडी जैसी जांच एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारों पर विपक्ष के नेताओं को टारगेट कर रही हैं, वे लोग इसे सरकार की तरफ से चीजों को बैलेंस करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं - हालांकि, जो भी हुआ है, वो अदालत के आदेश पर हुआ है. वो भी देश की सबसे बड़ी अदालत के आदेश पर.

लेकिन संजय सिंह को मिली जमानत में ईडी की वैसी ही भूमिका है जैसी उनकी या बाकी उनके साथी नेताओं की गिरफ्तारी में. मतलब, जैसे ईडी ने गिरफ्तार किया था, रिमांड पर लिया था, उसी ने जमानत का विरोध नहीं किया, और कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली. 

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अभी कुछ ही दिन पहले एक अदालत में मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान भी बचाव पक्ष की तरफ से वैसे ही सवाल उठाये गये थे, जैसे संजय सिंह के मामले में. तभी सीबीआई की तरफ से ये कहते हुए विरोध जताया गया कि जांच चल रही है - और उसी अदालत में सीबीआई ने दिल्ली शराब नीति केस में कुछ हाई प्रोफाइल गिरफ्तारियों के संकेत भी दिये थे.

21 मार्च की शाम होते होते कोर्ट में मिले संकेत सही साबित भी हो गये, फर्क ये था कि अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार सीबीआई ने नहीं बल्कि, ईडी ने किया. संजय सिंह से पहले जमानत तो सत्येंद्र जैन को भी मिल चुकी है, लेकिन उनका केस भी अलग है और कंडीशन भी संजय सिंह से अलग है. 

सत्येंद्र जैन फिर से जेल पहुंच चुके हैं, लेकिन संजय सिंह के साथ ऐसा कुछ नहीं होने वाला है. अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी मनीष सिसोदिया भी अभी जेल में ही हैं.  

संजय सिंह मिली जमानत का तात्कालिक प्रभाव

दिल्ली शराब नीति केस में संजय सिंह को मिली जमानत में एकबारगी तो फायदा ही फायदा नजर आता है, लेकिन चूंकि राजनीति में कुछ भी और कभी भी हो सकता है, इसलिए कुछ खतरे के सिग्नल भी महसूस हो रहे हैं.

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1. संजय सिंह के जेल से बाहर आने के बाद आम आदमी पार्टी को पहला फायदा तो यही होगा कि वो संगठन जान फूंकने की कोशिश करेंगे, जिसकी हाल फिलहाल सबसे ज्यादा तलब होगी. लोकसभा चुनाव सिर पर है, और सारी चीजें अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के इर्द-गिर्द घूम रही हैं. 

पंजाब में तो भगवंत मान यथाशक्ति संभाल भी रहे होंगे, लेकिन दिल्ली की सात सीटों पर तो काम आगे बढ़ ही नहीं पा रहा है. जिस मकसद से अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के साथ चुनावी समझौता किया, वो चीज तो जहां की तहां पड़ी हुई है. 

2. अरविंद केजरीवाल के जेल चले जाने के बाद आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं में जो निराशा छाई रही होगी, संजय सिंह के आने से एक बड़ा संबल मिलेगा. संजय सिंह के फिर से मोर्चा संभाल लेने से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ेगा, जिसकी आज की तारीख में सबसे ज्यादा जरूरत है. 

संजय सिंह की आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं में वैसी ही पैठ मानी जाती है, जैसी किसी जमाने में शिवपाल यादव की समाजवादी पार्टी और मुकुल रॉय की तृणमूल कांग्रेस में हुआ करती थी - उनके लिए तो ये गुजरे जमाने कीा बात हो चुकी है, लेकिन संजय सिंह नये जोश के साथ मैदान में उतरने जा रहे हैं. 

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3. अरविंद केजरीवाल को जेल भेजे जाने की बातें भले ही आम आदमी पार्टी मीडिया और सोशल मीडिया के जरिये वोटर तक पहुंचने की कोशिश कर रही हो, लेकिन चुनावों में जिस तरह का जन संपर्क जरूरी होता है, वो तो लगभग ठप ही पड़ा है - संजय सिंह लौटने के बाद निश्चित तौर पर चुनाव कैंपेन को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे. 

मान कर चलना चाहिये, संजय सिंह फिर से नई ऊर्जा के साथ मीडिया बहसों और चुनाव कैंपेन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ आम आदमी पार्टी की आवाज बुलंद करने का प्रयास कर सकते हैं - और बहुत हद तक वो सफल भी रहेंगे. 

4. अरविंद केजरीवाल के जेल चले जाने के बाद जो काम आतिशी और सौरभ भारद्वाज से नहीं हो पा रहा होगा, संजय सिंह अपनी तरफ से उसकी भरपाई की कोशिश करेंगे. 

आतिशी और सौरभ भारद्वाज एडमिनिस्ट्रेशन के कामकाज भले ही संभाल लेते हों, लेकिन संजय सिंह जैसी राजनीतिक हैसियत और धमक कभी नहीं दिखाई दी. बेशक आतिशी और सौरभ भारद्वाज संजीदगी के साथ अपना और पार्टी का पक्ष कैमरे के सामने रखते हों, लेकिन दोनों में से कोई भी संजय सिंह की तरह बात नहीं कर पाता. 

एक पुराना वाकया है. अरविंद केजरीवाल के घर पर एबीवीपी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद एक टीवी बहस में संजय सिंह जिस तरह तेजस्वी सूर्या से तू-तड़ाक वाले लहजे में बात कर रहे थे, आतिशी और सौरभ भारद्वाज के वश की बात तो नहीं ही है. तब तो संजय सिंह वैसे ही पेश आ रहे थे जैसे फिल्म द कश्मीर फाइल्स को लेकर अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा में भाषण दे रहे थे. 

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5. और सबसे बड़ी बात सुनीता केजरीवाल के लिए हाल फिलहाल संजय सिंह काफी मददगार साबित हो सकते हैं. अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल इस वक्त आम आदमी पार्टी में पावर सेंटर बनी हुई हैं - अब तो वो पार्टी विधायकों की मीटिंग भी लेने लगी हैं.  

शुरुआत सुनीता केजरीवाल ने अरविंद केजरीवाल की कुर्सी पर बैठकर उनका संदेश पढ़ने से की थी - और रामलीला मैदान में हुई INDIA ब्लॉक की रैली में उनके भाषण ने ही लोगों का ध्यान खींचा. अव्वल तो रैली में भी सुनीता केजरीवाल ने अरविंद केजरीवाल का संदेश ही दिया था, लेकिन उनकी पोजीशनिंग खास तौर से की गई थी. 

संजय को लेकर रिस्‍क भी है, कहीं वो मांझी ना बन जाएं!

जिस तरह से राघव चड्ढा की मैदान से गैरमौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं, ऐसा खतरा तो संजय सिंह को लेकर भी हो सकता है. वैसे भी राघव चड्ढा ने X पर संजय सिंह को शेर कह कर संबोधित किया है. एक खतरा ये भी है कि मौका मिलने पर संजय सिंह भी कहीं बिहार के जीतनराम मांझी जैसे तेवर न दिखाने लगें.

और अगर संजय सिंह ऐसा कुछ करते भी हैं तो यही समझा जाएगा कि जो रास्ता अरविंद केजरीवाल ने दिखाया है, उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं. जो व्यवहार अरविंद केजरीवाल ने अन्ना हजारे, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास जैसे साथियों के साथ किया है, संजय सिंह भी अलग रंग दिखाने लगें, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिये. 

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सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह के लिए जमानत की शर्तें तय करने के लिए ट्रायल कोर्ट पर जरूर छोड़ दिया है, और ये भी कहा है कि 'इस जमानत को मिसाल नहीं माना जा सकता' - लेकिन संजय सिंह के मामले में जिस तरीके की छूट दी है, वो अपने आप में मिसाल है. 

सुनवाई के दौरान ईडी की तरफ से संजय सिंह की राजनीतिक बयानबाजी पर रोक लगाये जाने की मांग हुई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ साफ बोल दिया, हम ऐसा नहीं कर सकते हैं. 

और इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने ये भी बोल दिया है कि संजय सिंह अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रख सकते हैं - और सबसे बड़ी बात, प्रवर्तन निदेशालय अब संजय सिंह को गिरफ्तार नहीं करेगा. हां, ट्रायल पूरा होने तक जब जब तारीखें आएंगी, तब तब संजय सिंह को पेश होना होगा.   

संजय सिंह को मिली जमानत बाकियों के लिए मिसाल भले न हो, लेकिन उनके लिए ईर्ष्या का कारण जरूर बन सकती है. छह महीने जेल में बिताने के बाद ही सही, लेकिन संजय सिंह को सुप्रीम कोर्ट से वो प्रोटेक्शन गारंटी मिल चुकी है, जिसके लिए अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाई कोर्ट से गुहार लगाते रहे और नौबत गिरफ्तारी तक आ पहुंची. 

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