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सोशल मीडिया से लेकर हर गली नुक्कड़ तक... हर तरफ ज्योति की चर्चा, मनीष पर सब मौन क्यों?

आज सोशल मीडिया से लेकर गली में खड़े लोगों की जुबान तक पर ज्योति मौर्य का नाम है. लोगों ने उनकी कुंडली खोलकर सोशल मीडिया पर रख दी है. लेकिन मनीष दुबे के नाम पर सब खामोश हैं.

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आलोक और ज्योति के मामले में मनीष पर कोई चर्चा क्यों नहीं?
आलोक और ज्योति के मामले में मनीष पर कोई चर्चा क्यों नहीं?

रौनकें जितनी यहां हैं औरतों के दम से हैं... मुनीर नियाज़ी ने यह शे'र कह कर भले ही महफ़िल में बेहिसाब वाहवाही लूटी हो, लेकिन वास्तविकता तो यही कहती है कि पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को कमतर आंकने की आदत सी है. अगर पत्नी गलती से भी पति से ज्यादा कमाने वाली हुई, तो पति वो बर्दाश्त नहीं कर पाता. महिलाओं पर उंगलियां भी बड़ी तेजी से उठती हैं. ज्यादा बोलने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली लड़की अक्सर लोगों के लिए 'तेज' और 'खराब चरित्र' वाली हो जाती है. जब कोई लड़का और लड़की भागकर शादी कर लें, तो किसकी बदनामी होती है? लड़की की या लड़के की?  

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किसी परिवार में अगर लड़की ऐसा करे, तो परिवार वाले उसे अपनाने से इनकार कर देते हैं. सारे रिश्ते तोड़ देते हैं. इतना ही नहीं, जीते जी फोटो पर माला चढ़ाकर पिंडदान तक कर देते हैं. वहीं अगर लड़के के हिस्से ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता. अगर कुछ है भी तो उसे अपवाद की श्रेणी में ही रखा जा सकता है. क्योंकि ऐसे मामलों की संख्या न के बराबर है. जून महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश के जबलपुर से एक मामला सामने आया था. एक लड़की ने मुस्लिम युवक से शादी की थी. जिसके बाद उसके माता, पिता और भाई ने उसका पिंडदान कर दिया. साथ ही मृत्यु भोज भी किया. परिवार ने अपनी बेटी का शोक संदेश भी प्रिंट करवाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. लेकिन यही चीज अगर लड़का करता, तो क्या तब भी यही होता?  

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ज्योति को ही पड़ रही गालियां

इस मामले पर चर्चा बंद भी नहीं हुई थी, तभी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से एक और मामला सामने आ गया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ. बेटी ने मुस्लिम युवक के साथ लव मैरिज की थी. तभी पिता ने उसे कफन उढ़ाकर फूल माला पहना दी. धर्म से हटकर भी अगर आप देखेंगे तो अधिकतर मामलों में परिवार वाले बेटी को अपनाने से इनकार कर देते हैं. लेकिन अगर यही चीज बेटा करे, तो उसे वक्त बे वक्त पर अपना ही लिया जाता है.

ज्योति मौर्य की बात करें तो इस खबर की चर्चा पूरे सोशल मीडिया पर हो रही है. आप बस एसडीएम या ज्योति मौर्य सर्च कर लीजिए, आपको महिलाओं को गाली देते पुरुष आसानी से मिल जाएंगे, हालांकि ज्योति को निशाने पर लेने में कुछ महिलाएं भी पीछे नहीं हैं. कुछ तो बड़े गर्व से सीना चौड़ा कर कह रहे हैं, 'बेटी पढ़ाओ, पत्नी नहीं.' इनका कहना है कि ये अपनी पत्नियों को अफसर बनते नहीं देखना चाहते. इन्हें डर है कि वो भी ज्योति की तरह इन्हें छोड़ देगी. एक शक ये भी है कि पत्नी का कहीं किसी और से अफेयर न चल जाए. 

हमारे देश में जो पढ़ाई का मौलिक अधिकार है. यानी सबको पढ़ने का हक है. अब पति वही अधिकार अपनी पत्नियों से छीन रहे हैं. इस सब के बीच जो सबसे बड़ी लाइन कई जगहों पर हेडलाइन बनी हुई है कि 'आलोक ने ज्योति को SDM बनाया' यह अपने आप में बड़ी हास्यास्पद बात है. अगर ऐसा है तो अलोक से हर उस शख्स को मिलना चाहिए जो अधिकारी बनने का सपना देख रहा है. दो लोग जब साथ होते हैं तो मदद करना साथ, खड़े रहना एक स्वाभाविक बात है, लेकिन सीधे तौर पर यह क्लेम कर देना कि मैंने ही बनाया जो बनाया तो यह कहना अतिश्योक्ति के सिवा कुछ नहीं.  

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पति ने छुड़वाई पत्नी की कोचिंग

खुद को महिलाओं का मालिक समझने वाले ये पुरुष ऐसा सिर्फ कह नहीं रहे, बल्कि कर भी रहे हैं. बिहार के बक्सर से एक मामला सामने आया, जिसमें पिंटू नाम के शख्स ने अपनी पत्नी खुशबू की कोचिंग छुड़वा दी. उसकी पत्नी का कहना है कि वो बीपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रही है. पति 10 साल से पढ़ा रहा है. लेकिन अब मना कर रहा है. खुशबू का कहना है कि जरूरी नहीं सब महिलाएं ज्योति की तरह ही करें. 

इस सब के बीच जिस एक नाम की चर्चा न के बराबर हो रही है वो है- मनीष दुबे. मनीष की बात करें तो वो गाजियाबाद में बतौर होमगार्ड कमांडेंट पोस्टेड है. एक तरफ पुरुष समाज के ज्यादातर ठेकेदारों ने कह दिया है कि उन्हें अब अपनी पत्नियों पर भरोसा नहीं है. वो सभी एकजुट होकर ज्योति के खिलाफ खड़े हैं. दूसरी तरफ मनीष दुबे की कोई बात नहीं कर रहा. केवल ज्योति के चरित्र को ही तार-तार किया जा रहा है. जबकि वो साफ कह चुकी हैं कि मामला अदालत में है. मगर मनीष के चरित्र पर कोई उंगली नहीं, क्यों?

महिलाएं लांछन लगाती नहीं दिख रहीं

शादी के बाहर अफेयर अकेले ज्योति ने नहीं बल्कि मनीष ने भी चलाया है. लेकिन चर्चा सिर्फ ज्योति के नाम ही चल रही है. पति बोल रहे हैं कि पत्नियों को आगे पढ़ने नहीं देंगे, अफसर बनने नहीं देंगे. कहीं वो ज्योति की तरह धोखा न दे दे. लेकिन क्या किसी पत्नी ने अभी तक ऐसा कहा? कि पति को घर से बाहर नौकरी के लिए नहीं जाने दूंगी, कहीं वो मनीष की तरह ही धोखा न दे दे. बल्कि खुद ज्योति ने भी सोशल मीडिया पर पति को लेकर कुछ पोस्ट नहीं किया. जबकि उनके पति आलोक ने तो सब कुछ सामाजिक मंच पर लाकर रख दिया है. व्हॉट्सएप चैट्स से लेकर वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग तक. क्या किसी भी महिला ने मनीष जैसे पुरुष के चरित्र को तार-तार करने की कोशिश की? जैसे पुरुषों का झुंड ज्योति के साथ कर रहा है.

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बात केवल इतनी है कि महिला कुछ गलत करे, तो उसके खिलाफ सारे पुरुष एकजुट हो जाते हैं. उसे अपशब्दों से नवाज़ देते हैं. उसके किए की सजा अपनी पत्नियों को देने लगते हैं. जैसा कि इस मामले में हो रहा है. लेकिन अगर कोई पुरुष ऐसा करे, तो देश की महिलाएं उसकी सजा अपने पतियों को नहीं देतीं. न ही वो सोशल मीडिया पर एक पुरुष के खिलाफ एकजुट होकर खड़ी हो जाती हैं. क्योंकि शायद उन्हें पता है कि, न्याय कानून करेगा सोशल मीडिया नहीं. कोई गलत है या सही, ये फैसला भी अदालत करेगी. वो खुद को समाज की ठेकेदार नहीं मानतीं.


 

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