सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के कास्ट सेंसस अभियान को रफ्तार देने की जोरदार कोशिश की है. जैसे राहुल गांधी जातिगत जनगणना कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, सोनिया गांधी ने वैसा ही उपाय राष्ट्रीय जनगणना में खोज लिया है.
राहुल गांधी जातिगत जनगणना के जरिये पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी को सरकारी सुविधाओं का फायदा दिलाने के नाम पर साधने की कोशिश कर रहे हैं, और वही काम सोनिया गांधी खाद्य सुरक्षा कानून के जरिये करना चाहती हैं, क्योंकि कानून बनाने का क्रेडिट तो कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को ही जाता है.
लोगों को मुफ्त राशन बांटकर गरीब कल्याण का जो श्रेय केंद्र सरकार ले रही है, सोनिया गांधी समझाना चाहती हैं कि कांग्रेस जो फायदा पहुंचाना चाहती थी, लोगों को तो मिल ही नहीं रहा है - क्योंकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार जनगणना ही नहीं करा रही है.
राहुल को मजबूत करने में जुटीं सोनिया गांधी
गरीबी हटाओ का नारा कांग्रेस की ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गरीब कल्याण की ही बात करते रहे हैं.
सोनिया गांधी ने बीजेपी और मोदी के गरीब कल्याण के दावे पर वैसे ही चोट करने की कोशिश की है, जैसे बीजेपी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की मुफ्त वाली स्कीम पर.
जैसे बीजेपी ने लोगों को समझा दिया कि गरीबों की असली हमदर्द केंद्र की बीजेपी सरकार की योजनाएं हैं, और केजरीवाल तो सिर्फ वादा करते हैं, बीजेपी की सरकार तो डिलीवर भी करती है.
सोनिया गांधी देश को ये समझाने की कोशिश कर रही हैं कि सरकार की तरफ से उनको जो राशन मिल रहा है, वो असल में कांग्रेस शासन की देन है - और मौजूदा बीजेपी सरकार तो सबको दे भी नहीं रही है, जो वास्तव में हकदार हैं.
और ये तोहमत मढ़ने के लिए सोनिया गांधी देश में जनगणना कराये जाने में देर के लिए मोदी और बीजेपी सरकार को कठघरे में खड़ा कर देती हैं.
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस की सबसे बड़ी नेता सोनिया गांधी ने कहा कि फूड सिक्योरिटी कोई प्रिविलेज नहीं है... ये देश के लोगों का मौलिक अधिकार है.
केंद्र सरकार को टार्गेट करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार जनगणना में 4 साल की देर हुई है. 2021 में ही जनगणना होनी थी लेकिन अब तक स्थिति साफ नहीं हो पाई है. कहती हैं, बजट आवंटन से भी पता चलता है कि जनगणना इस साल भी कराये जाने की संभावना नहीं है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि लाखों कमजोर परिवारों को भुखमरी से बचाने के मकसद से खाद्य सुरक्षा कानून कांग्रेस की यूपीए सरकार ने लाया था. कोविड संकट काल के दौरान इसी कानून की बदौलत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को मदद मिली थी.
सोनिया गांधी समझा रही हैं कि मौजूदा लाभार्थियों का कोटा अब भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर ही आधारित है, जबकि एक दशक से ज्यादा वक्त बीत चुका है.
वोट देने वाली बड़ी आबादी पर कांग्रेस का फोकस
लोकसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष बने राहुल गांधी लगता है अब राजनीति में काफी दिलचस्पी लेने लगे हैं. पहले वो खुद ही कह चुके हैं कि राजनीति या सत्ता की राजनीति में उनकी खास दिलचस्पी नहीं है, और उनका मकसद बिल्कुल अलग है.
राहुल गांधी की गंभीरता देखकर सोनिया गांधी का भरोसा उन पर बढ़ा हुआ लग रहा है. दिल्ली चुनाव कैंपेन के जरिये राहुल गांधी ने दूरगामी सोच का नमूना पेश किया है. जिन बातों के लिए कांग्रेस अब तक क्षेत्रीय दलों पर निर्भर हुआ करती थी, अब नुकसान उठाकर खुद अपने बूते वो सब करने पर आमादा लग रही है. दिल्ली के बाद बिहार चुनाव में भी कांग्रेस का स्टैंड बदलने वाला है, ऐसा नहीं लगता.
बिहार पहुंचकर राहुल गांधी राज्य सरकार के कास्ट सर्वे को ही फर्जी बता डालते हैं, और दावा करते हैं कि सत्ता में आने पर कांग्रेस ये काम सही तरीके से कराएगी. जिस तरह राहुल गांधी ओबीसी की बड़ी आबादी को कांग्रेस से फिर से जोड़ने में जुटे हैं, सोनिया गांधी ने भी उसी बात को अपने तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया है.