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 वक्‍फ बिल पर अखिलेश, ममता और लालू जैसा तीखा विरोध करने से क्यों बच रही है कांग्रेस?

Waqf amendment Bill: राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन ख़ड़गे के एक्स हैंडल पर जाइए. पिछले 30 दिनों में बहुत सी बातों पर ये लोग अपनी चिंता दिखाते हैं पर वक्फ बोर्ड के मामले में वे खामोश हैं. रायबरेली में रेल के भविष्य पर राहुल बातें करते हैं, वन अधिकार अधिनियमों की उपेक्षा पर चिंता करते हैं, बनासकांठा में हुए विस्फोट पर शोक प्रकट करते हैं, ईद की मुबारकबाद देते हैं, पर वक्फ बिल पर कुछ नहीं बोलते हैं.

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राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)

भोपाल में पटाखा छोड़ते और मिठाइयां बांटते मुस्लिम समुदाय की खुशी का कारण जानकर आप हैरान हो सकते हैं. दरअसल यह खुशी वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश करने के लिए है. आप हैरान हो सकते हैं पर यह सही है. आज ऐसा दृश्य केवल भोपाल में ही नहीं था. कमोबेश देश के कई हिस्सों से ऐसी तस्वीरें आ रही हैं. आप उन्हें भाजपाई मुसलमान भी कह सकते हैं. पर उनकी बॉडी लैंगवेज बता रही थी कि उनकी खुशी नेचुरल है. आप कह सकते हैं कि यह सब बीजेपी का प्रायोजित है. यह हो भी सकता कि मुसलमानों की यह भीड़ जुटाई गई हो. पर कुछ परसेंट लोग भी अगर खुलकर सामने आ रहे हैं तो मतलब यही होता है कि समर्थन मिलना शुरू हो गया है.

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कल्पना करिए यह भी तो हो सकता था कि इन डांस करते मुसलमानों की जगर पत्थर फेंकती, गाड़ियां तोड़ती मुसलमानों की भीड़ दिख सकती थी. ऐसे मौकों पर जिस तरह सत्ता पक्ष अपने समर्थकों को इकट्टा करता है ठीक उसी तरह विपक्ष पत्थर फेंकने वाले और गाड़ी तोड़ने वालों को जुटाने का काम करता है. पर विपक्ष अगर आज विरोध करने वालों को नहीं जुटा सका तो इसका सीधा मतलब क्या निकलता है?

शायद यही कारण है कि कांग्रेस इस बिल का खुल कर विरोध नहीं कर रही है. पार्टी विरोध करने वालों के साथ तो है पर जिस तरह समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , आरजेडी नेता तेजस्वी यादव वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में जगह उगल रहे हैं उसके मुकाबले में कांग्रेस के बड़े नाम खामोशी बरत रहे हैं.

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कांग्रेस के बड़े नेताओं का बयान देखा क्या

यह कितना बड़ा आश्चर्य है कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर देश की सारा विपक्ष गाल फाड़कर चिल्ला रहा है और कांग्रेस नेता मौन धारण किए हुए हैं. राजनीतिक बयानबाजी के लिए लोकप्रिय सोशल मीडिया एक्स के हैंडल पर कांग्रेस पार्टी , राहुल गांधी , प्रियंका गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दुनिया भर की बातें कर रहे हैं पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उन्होंने शांति बरती हुई है. इमरान मसूद बुधवार को संसद के बाहर वक्फ बोर्ड बिल के विरोध में बैनर लेकर खड़े थे पर उनके नेता इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ केवल बैठक कर रहे हैं. पिछले पंद्रह दिनों में इंडिया गुट की करीब सभी पार्टियों के नेताओं के बयान  वक्फ बोर्ड बिल पर केंद्र सरकार को कोसते हुए आए हैं पर कांग्रेस नेताओं के नहीं. हां कांग्रेस के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर जरूर बहस को जिंदा किए हुए हैं.

सबसे पहले राहुल गांधी के एक्स हैंडल पर आते हैं. राहुल गांधी पिछले 30 दिनों में बहुत सी बातों पर अपनी चिंता दिखाते हैं पर उन्हें शायद वक्फ बोर्ड बिल के बारे में पता नहीं है. रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री के अधिकारियों के साथ रेल के भविष्य पर बातें करते हैं, वन अधिकार अधिनियमों की उपेक्षा पर चिंता करते हैं, गुजरात के बनासकांठा में हुए विस्फोट पर शोक प्रकट करते हैं, ईद की मुबारकबाद देते हैं, मुसलमानों के हित की बात करते हैं पर वक्फ बोर्ड पर एक लाइन भी कुछ बोलने से बचते हैं.

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ठीक ऐसा ही प्रियंका के एक्स हैंडल और मल्लिकार्जुन खड़गे के एक्स हैंडल पर दिखता है. खड़गे वक्फ बिल पर विपक्ष की हुई एक मीटिंग में शामिल होने की विडियो जरूर शेयर करते हैं पर विरोध में कोई एक शब्द भी बोलते नजर नहीं आते है.प्रियंका और खडगे भी इस संबंध में चुप्पी बरतते ही नजर आते हैं. इस बीच 2 दिन पहले सोनिया गांधी एक ऑर्टिकल लिखती हैं पर उसका सब्जेक देश की शिक्षा व्यवस्था है. ऐसे समय में जब देश में वक्फ बिल पर बहस छिड़ी हुई है उनका मन शिक्षा व्यवस्था में लगा हुआ है. ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के बड़े नेता 

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया और कहा कि ये लेजिस्लेचर को बुल्डोज करने जैसा है. उन्होंने सदस्यों के संशोधन प्रस्ताव का मुद्दा उठाया. इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जितना समय सरकारी संशोधनों को दिया है, उतना ही समय गैर सरकारी संशोधनों को भी दिया है. दोनों में कोई अंतर नहीं किया गया है. मतलब साफ था कि उनका विरोध बिल को लेकर नहीं है , उनका विरोध केवल प्रक्रिया पर है.

कांग्रेस ने सीएए का विरोध भी इसी तरह से किया था  

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कांग्रेस ने सीएए का विरोध भी इसी तरीके से किया था. कांग्रेस ने कभी भी सीएए का खुलकर विरोध नहीं किया. केरल विधानसभा चुनावों में पिनराय विजयन ने इसी बात को मुद्दा बना दिया था. पिनराय विजयन कहते थे कि राहुल गांधी अपने न्याय यात्रा के दौरान एक बार भी सीएए के विरोध में नहीं बोले. विजयन का कहना था कि जिस तरह सीएए के खिलाफ केरल सरकार ने विधानसभा से एक प्रस्ताव पेश किया तत्कावीन राजस्थान-मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकारों ने नहीं किया. विजयन का कहना था कि सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ लगी धाराओं को उनकी सरकार ने वापस ले लिया जबकि कांग्रेस सरकारों ने ऐसा नहीं किया. 

कांग्रेस क्यों ऐसा कर रही

दरअसल कांग्रेस देश के कई हिस्सों में आज भी हिंदुओं की पार्टी मानी जाती है. केरल विधानसभा चुनावों मे ंइसलिए ही पिनराय विजयन यह साबित कर रहे थे कि कांग्रेस सीएए का विरोध नहीं कर रही है. और कांग्रेस ने विजयन के टार्गेट करने के बाद भी एक बार सीएए का विरोध नहीं किया. केरल विधानसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी अपनी रैलियों में अपनी सहयोगी पार्टी मुस्लिम लीग के लोगों को भी नहीं आने दे रही थी. दरअसल जिन राज्यों में बीजेपी ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है वहां के हिंदू अभी भी कांग्रेस को अपनी पार्टी मानते हैं. यही हाल पंजाब में है. यहां सिखों की पार्टी अकाली है जबकि हिंदू कांग्रेस को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं. उत्तर भारत के राज्यों में भी सवर्ण हिंदू कांग्रेस का कोर वोट बैंक रहे हैं. कांग्रेस आज चाहती है कि उसके पुराने कोर वोटर्स उसके साथ फिर से वापस आए जाएं. इसी रणनीति के चलते ही कांग्रेस वक्फ बोर्ड संशोधन बिल का विरोध फूंक -फूंक कर रही है.

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