बिहार की राजनीति में पिछला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण रहा. नीतीश कुमार सरकार ने एक बार फिर से विधानसभा के फ्लोर पर अपना बहुमत साबित किया. लेकिन इन सबके बावजूद, इससे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि जिस तरीके से सरकार ने बहुमत साबित किया और जो ड्रामा फ्लोर टेस्ट 2 दिन पहले बिहार में देखने को मिला, वह अप्रत्याशित था.
नीतीश ने साबित किया बहुमत
नीतीश कुमार के नेतृत्व में 28 जनवरी को एनडीए सरकार का गठन हुआ और उसके बाद 12 फरवरी को सरकार ने बहुमत साबित किया. 12 फरवरी को जब बिहार विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ था उस दिन सरकार ने 129 वोट प्राप्त करके अपना बहुमत साबित किया, जो की मैजिक संख्या 122 से ज्यादा था.
बहुमत साबित करने से पहले विधानसभा में गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों को सेंट्रल हॉल संबोधित किया. इसके बाद सबसे पहले विधानसभा में तत्कालीन स्पीकर अवध बिहारी चौधरी को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई.
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सबसे पहले स्पीकर को हटाया गया
अवध बिहारी चौधरी को उनके पद से हटाने के लिए 28 जनवरी को ही कई सदस्यों ने विधानसभा में नोटिस दिया था. अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया मगर इसको पास करने में राजद के दो विधायकों ने भी सरकार का साथ दिया.
दरअसल, स्पीकर को हटाने के लिए 243 सदस्यों के विधानसभा में कम से कम 122 वोट प्राप्त करना जरूरी है और अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 125 से विधायकों ने वोट किया. इसमें दो विधायक राजद के चेतन आनंद और नीलम देवी ने सरकार के तरफ बैठकर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया.
स्पीकर को हटाने के बाद नीतीश कुमार सरकार ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया जिस पर चर्चा हुई और उसके बाद 129-0 के बहुमत से सरकार ने विश्वास मत परीक्षा पास कर लिया. विपक्ष ने वोटिंग से पहले ही सदन का बहिष्कार किया था और इसीलिए विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़े.
दिलचस्प बात यह रही कि जब विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो रही थी तो चेतन आनंद और नीलम देवी के साथ-साथ राजद के एक और विधायक प्रहलाद यादव ने भी पाला बदल लिया और सरकार के पक्ष में वोट किया जो कि राजद के लिए एक बहुत बड़ा झटका था.
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विश्वास मत से पहले हाई वोल्टेज ड्रामा
हालांकि, बहुमत साबित करने से पहले बिहार में दो-तीन दिन जबरदस्त हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. बिहार की राजनीति में लगातार ऐसी चर्चा बनी रहेगी आरजेडी विधायकों की खरीद फरोख्त में लगी हुई है और ऐसा ही आरोप राजद के तरफ से बीजेपी और जेडीयू पर लगाया गया.
अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए 10 फरवरी को जब तेजस्वी यादव के आवास पर आरजेडी विधायक दल की बैठक हुई तो उसके बाद तेजस्वी यादव ने अपने सभी विधायकों को फरमान जारी कर दिया कि कोई भी अपने घर नहीं जाएगा और अगले दो दिन तक सभी विधायक तेजस्वी के घर में ही रहे.
इसी तरीके से बीजेपी ने भी अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए 12 फरवरी से पहले 2 दिन के लिए यानी शनिवार और रविवार को अपने सभी विधायकों का एक ट्रेनिंग सेशन बोधगया में आयोजित किया जहां पर सारे विधायक मौजूद रहे.
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दिलचस्प बात यह है कि जब सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे थे तो इस दौरान जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी के कम से कम 8 विधायकों से पार्टी का संपर्क नहीं हो पा रहा था. जिससे इस बात के कयास लगाए जाने लगे थे कि उन्होंने शायद पाला बदलने की सोच ली है और राजद के साथ वोट करेंगे.
हालांकि, जिस दिन नीतीश कुमार ने बहुमत साबित किया उसे दिन लगभग सभी विधायकों ने सरकार के पक्ष में ही वोट किया और नीतीश कुमार ने अपना बहुमत साबित किया.