राजनीति असीम संभावनाओं का खेल है.और जब प्रचंड बहुमत किसी को न मिले तो ये संभावनाएं लोकतंत्र में कुछ ज्यादा ही बढ़ जाती हैं. चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार अब तक रुझान एनडीए गठबंधन के पूर्ण बहुमत की ओर है .पर इंडिया गठबंधन जिस तरह से कांटे की लड़ाई लड़ रहा है उससे संभावनाएं अभी उसके लिए खत्म नहीं हुईं हैं. इस बीच शरद पवार ने बयान दिया है कि वो केंद्र में संभावनाएं तलाशेंगे. सोशल मीडिया में तरह तरह की अटकलों का बाजार गर्म है. नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को लेकर कहा जा रहा है कि वो कभी भी पलट सकते हैं. हालांकि जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा है कि नीतीश कुमार एनडीए में ही रहेंगे. पर आज कल जिस तरह दोपहर में नेता ट्वीट कुछ और करते हैं शाम तक होता कुछ और है. इसलिए कुछ भी कहा नहीं जा सकता.एनडीए के लिए कठिन घड़ी है. हालांकि भारतीय जनता पार्टी हर हाल में कोशिश करेगी कि वो फिर से सरकार बनाए पर क्या ऐसा हो पाएगा?
1- क्या एनडीए की संभावनाओं पर लग सकता है ग्रहण?
लोकसभा चुनाव 2024 के जारी रुझानों में एनडीए को बहुमत मिलता दिख रहा है. भाजपा के नेतृत्व वाली NDA 290 से अधिक सीटों पर लगातार आगे चल रही है. INDIA ब्लॉक भी बीते चुनाव के मुकाबले कहीं बेहतर करता नजर आ रहा है. रुझानों में 230 सीटों के आस-पास लगातार बना हुआ है. रुझानों में गौर करने वाली बात यह है कि बीजेपी अकेले अपने दम पर 272 का बहुमत का आंकड़ा पार करने में असमर्थ दिख रही है. भाजपा को अपने सहयोगी TDP, JDU जैसे दलों पर निर्भर रहना पड़ेगा. ऐसे में भाजपा के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह अपने सहयोगियों को न सिर्फ साथ रखे, बल्कि उन्हें साधे भी रहे.क्यों कि बीजेपी को अगर इनके सहारे सरकार बनाए रखना है तो निश्चित है कि उनकी रहमो करम पर रहना होगा. चुनाव आयोग की बेबसाइट के अनुसार दोपहर 3 बजे तक 292 सीटों पर एनडीए गठबंधन लीड बनाए हुआ था. जिसमें तेलुगुदेशम पार्टी 16 सीटों पर और जेडीयू 14 सीटों पर आगे चल रही थी.इसी तरह लोजपा 5 सीटों पर, जेडीएस 2 पर, आरएलडी 2 पर,एनसीपी 2 पर, शिवसेना शिंदे 5 आदि के आंकड़े थे. जाहिर है कि तेलुगुदेशम पार्टी और जेडीयू का महत्व बढ़ जाएगा.ये लोग एनडीए से सौदेबाजी कर सकते हैं. इसके साथ ही इंडिया गुट भी चाहेगा कि इन लोगों से सौदा किया जाए. जिस तरह 2004 में एनडीए के कई साथी छिटककर यूपीए की ओर चले गए थे.
2-अगर नीतीश और चंद्रबाबू नायडू इंडिया गुट के साथ आए तो?
रुझान के अनुसार ऐसी करीब 17 सीटे सीटें उन लोगों को मिल रही हैं जो अभी तक न इंडिया में थे न ही एनडीए में थे. जाहिर है उनकी प्रत्याशा दोनों ही तरफ जाने की रहेगी.पर मानकर ये चलिए कि वो मैंडेट को ध्यान में रखते हुए इंडिया की ओर चले जाते हैं तो क्या होगा? इसके साथ ही एनडीए में नीतीश और चंद्रबाबू नायडू मिलकर 30 सीट लेकर आ सकते हैं. अब तक रुझानों के अगर एनडीए को 290 सीट मिल रहे हैं तो इंडिया को 230 सीट मिलती दिख रही है. अगर नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडू को पीएम और डिप्टी पीएम का ऑफर मिलता है तो ये लोग इंडिया गुट की ओर आ सकते हैं.इस तरह दोनों गठबंधनों की सीट संख्या हो जाएगी 260 .यानि कि टाई की पोजिशन . ऐसे समय में जो 17 सीट अन्य की आती दिख रही है वो किंग मेकर हो जाएंगे. जाहिर है कि उनमें से कुछ एनडीए की ओर जाएंगे तो कुछ इंडिया गुट की ओर आएंगे.
इस बीच शरद पवार अपनी भूमिका में सामने आ रहे हैं . उन्होंने केंद्र में सरकार के लिए संभावनाएं तलाशने की बात की है.यह भी कहा जा रहा है कि शरद पवार और टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू के बीच संपर्क हुआ है. लेकिन शरद पवार ने आज तक से बात करते हुए ऐसी किसी भी तरह की अटकलों से इनकार किया है.पवार ने बताया कि कल बुधवार को INDIA ब्लॉक की दिल्ली में बैठक है जिसमें फैसला लिया जाएगा कि आगे क्या करना है. अगर नायडू या नीतीश कुमार के रुख में किसी भी तरह का बदलाव होता है तो NDA को सरकार बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. दूसरी ओर भाजपा के आंध्र प्रदेश मामलों के प्रभारी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने चंद्रबाबू नायडू से शिष्टाचार भेंट की है.
3- क्या अखिलेश और ममता कर सकते हैं पीएम पद की दावेदारी?
शाम चार बजकर 45 मिनट पर स्टोरी लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी को यूपी में 34 सीट और कांग्रेस को 6 सीट मिलती दिख रही है. बीजेपी को 36 सीटों पर जीत का रुझान मिल रहा है. दूसरी ओर ममता बनर्जी को बंगाल में 29 सीटें मिलती दिख रही हैं. इस तरह इंडिया गुट में दूसरे नंबर के ताकतवर बन कर अखिलेश यादव उभर रहे हैं. ममता की सीटें उन्हें तीसरे नंबर का रसूखदार बना रही हैं.जाहिर है कि अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की महत्वाकांक्षाएं भी कम नहीं होंगी. अखिलेश यादव और ममता भी अपने को पीएम पद का दावेदार घोषित कर सकते हैं. दरअसल आज कल सीट संख्या सबसे बड़ी पोस्ट के लिए जरूरी नहीं रह गया है. बिहार में नीतीश कुमार कई साल से सहयोगी पार्टियों से कम सीट होने के बावजूद मुख्यमंत्री बनते हैं. महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस सबसे बड़ी पार्टी से होते हुए भी डिप्टी सीएम बने हुए हैं.
4-एनडीए में उद्धव ठाकरे की तरह कोई जिद पकड़ सकता है?
राजनीति अनंत संभावनाओं का खेल है. जिस तरह 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में साथ लड़कर चुनाव जीतने के बाद एनडीए ने पूर्ण बहुमत हासिल किया. पर सीएम की कुर्सी के लिए उद्धव ठाकरे ने सीएम बनने की जिद पकड़ ली. अगर वैसा ही कुछ एक बार फिर पीएम बनने के लिए हो जाए तो? उद्धव ठाकरे ने शरद पवार की एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सीएम बन गए. इसी तरह इस बार केंद्र में दोनों ही गठबंधनों में कोई भी दल जिद पकड़ सकता है.