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कन्हैया लाल का हत्यारा कौन- राजनीति या आतंकवाद?

उदयपुर के कन्हैयालाल हत्याकांड को आतंकवादी घटना मानते हुए केंद्र सरकार ने NIA को जांच सौंप दी थी, लेकिन राजस्थान में ये चुनावी मुद्दे के रूप में फिर चर्चा में है - और राजनीति का आलम ये है कि बीजेपी और कांग्रेस जोरदार तरीके से आपस में भिड़े हुए है.

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उदयपुर हत्याकांड के चुनावी मुद्दा बन जाने से क्या कन्हैयालाल को इंसाफ मिल पाएगा?
उदयपुर हत्याकांड के चुनावी मुद्दा बन जाने से क्या कन्हैयालाल को इंसाफ मिल पाएगा?

उदयपुर का कन्हैयालाल हत्याकांड करीब डेढ़ साल बाद चुनावी मुद्दा बन गया है. इस जघन्य हत्याकांड को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने हैं - और एक दूसरे को कन्हैयालाल की हत्या का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

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पेशे से टेलर कन्हैया लाल की 28 जून, 2022 को बड़े ही बर्बर तरीके से हत्या कर दी गयी थी. हमलावरों ने दुकान में घुस कर धारदार हथियार से कन्हैयालाल का गला काटा - और निर्दयतापूर्वक वीडियो भी बनाया. 

जब वीडियो सोशल मीडिया के जरिये वायरल हुआ तो उदयपुर में तनाव का माहौल बन गया. रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैयालाल ने बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा की टिप्पणी सोशल मीडिया पर शेयर की थी. ये वीडियो नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद से जुड़ी टिप्पणी को लेकर था. घटना के कुछ देर बाद ही राजस्थान पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और बाद में मामला NIA यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया.  

राजस्थान में कन्हैयालाल की हत्या पर राजनीति घटना के बाद ही शुरू हो गयी थी, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे को हत्या के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे. अब जब चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, ये मुद्दा फिर से सुर्खियां बन रहा है - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्हैयालाल की हत्या के लिए कांग्रेस की राजनीति और सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हत्या का कनेक्शन बीजेपी से जोड़ रहे हैं. 

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प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर रिएक्ट करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है कि कन्हैयालाल की हत्या के पीछे बीजेपी के लोग थे. अपने इस दावे को लेकर अशोक गहलोत की दलील है कि हत्या के आरोपियों को थाने से छुड़ाने के लिए बीजेपी नेताओं ने पैरवी की थी. 

क्या है मोदी का कांग्रेस पर आरोप?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियों में कन्हैयालाल हत्याकांड का जिक्र कर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करते हैं, और तुष्टिकरण का आरोप लगाते हुए बीजेपी शासन का फर्क समझाते हैं. खास बात ये है कि प्रधानमंत्री मोदी कन्हैयालाल केस का जिक्र सिर्फ राजस्थान की चुनावी रैलियों में ही नहीं करते, मध्य प्रदेश की चुनावी रैलियों में भी कन्हैयालाल हत्याकांड का जिक्र कर कांग्रेस पर हमला बोलते हैं. 

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, 'राजस्थान में खुलेआम गला काट दिया जाता है... सरकार देखती रहती है... विकास के विरोधी जहां भी जा रहे हैं तुष्टीकरण ला रहे हैं' - यही बयान वो मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बीच ग्वालियर की रैली में भी दोहराते हैं. 

रैली में बैठी भीड़ से संवाद करते हुए मोदी पूछते हैं, 'आप मुझे बताइये... जो उदयपुर में हुआ... कभी आपने कल्पना भी की थी... जिस राजस्थान ने दुश्मन पर धोखे से वार न करने की परंपरा को जिया है... उस राजस्थान की धरती पर इतना बड़ा पाप हुआ है... कपड़े सिलाने के बहाने लोग आते हैं... बिना डर, बिना खौफ... टेलर का गला काट देते हैं - और वीडियो बना कर गर्व से वायरल कर देते हैं.'

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कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए, मोदी कहते हैं, 'राजस्थान में कब दंगे भड़क जायें... कब कर्फ्यू लग जाये... कोई नहीं जानता... दंगाई हो, अपराधी हो, उसे भाजपा सरकार ही ठीक कर सकती है... ये हमारा ट्रैक रिकार्ड है.'

अशोक गहलोत बता रहे हैं घटना का बीजेपी कनेक्शन

प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया में अशोक गहलोत भी राहुल गांधी की तरह ही बीजेपी के साथ विचारधारा की लड़ाई का हवाला देते हैं. अशोक गहलोत का आरोप है कि बीजेपी धर्म के नाम पर लोगों को भड़का रही है. गैर जरूरी चीजों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. अशोक गहलोत बीजेपी नेतृत्व को सलाह देते हैं कि मुद्दों पर नीतियों पर बात करने के लिए आगे आयें, और लड़ाई को विचारधार तक ही सीमित रखें.

अशोक गहलोत का कहना है, 'जो प्रधानमंत्री जी बोले हैं बहुत ही अस्वीकार्य है हम लोगों को... और मैं नम्र निवेदन करना चाहूंगा प्रधानमंत्री जी से कि कृपा करके इस प्रकार का माहौल नहीं बनाएं देश के लिए... देश के हित में नहीं है... समाज के हित में नहीं है.'

चुनावी माहौल के बीच चल रहा आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर

कन्हैयालाल हत्याकांड की पहली बरसी के दो दिन बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उदयपुर पहुंचे थे. एक रैली में अमित शाह ने कन्हैयालाल की हत्या का खास तौर पर जिक्र किया, निशाने पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत थे. सवाल उठाते हुए कह रहे थे, 'कन्हैया को किसने सुरक्षा नहीं दी? किसकी पुलिस चुप रही? आपने तो आरोपियों को पकड़ा तक नहीं... NIA ने उन्हें पकड़ा... झूठ मत बोलिये गहलोत जी कि चार्जशीट नहीं दाखिल की गई... मैं पूरे दावे से कह सकता हूं चार्जशीट 22 दिसंबर, 2022 को दाखिल की गई थी... अब स्पेशल कोर्ट का गठन आपका काम है ताकि दोषियों को सजा दी जा सके.

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अमित शाह के बयान पर अशोक गहलोत ने सोशल साइट X पर प्रतिक्रिया दी, 'उम्मीद की जाती है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर राजनीति नहीं करेंगे... उदयपुर में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जो किया वह एक गैर जिम्मेदाराना कार्य है... श्री अमित शाह द्वारा उदयपुर में झूठ बोला गया कि कन्हैयालाल के हत्यारों रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद को NIA ने पकड़ा... सच ये है कि घटना के महज चार घंटों में राजस्थान पुलिस पकड़ लिया था.'

अशोक गहलोत आगे लिखते हैं, 'यह दुखद घटना 28 जून, 2022 को हुई थी... NIA को इस केस की फाइल 2 जुलाई, 2022 को ट्रांसफर हुई... श्री अमित शाह की संभवत: जानकारी में होगा कि ये दोनों हत्यारे भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे... उन्हें ये जांच करवानी चाहिए कि इन दोनों के मददगार कौन भाजपा नेता थे, जो इनके लिए पुलिस थानों में फोन करते थे? एक ओपन एंड शट केस में चार्जशीट फाइल होने में भी इतना अधिक समय क्यों लगा? और इन्हें अब तक सजा क्यों नहीं हुई?'

अपनी बात के साथ अशोक गहलोत ने मामले से जुड़े शासकीय आदेश की कॉपी भी शेयर की, जिसमें 2 जुलाई, 2022 को राजस्थान पुलिस की तरह से ये केस NIA को सौंपे जाने का जिक्र है.

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कन्हैयालाल की हत्या के आरोपियों को थाने से छुड़ाने के अशोक गहलोत के दावे पर बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत का सवाल है, अगर आरोपियों को पकड़ा गया तो उनको छोड़ा क्यों गया? अगर पुलिस ने उनको छोड़ा तो ये राज्य सरकार की कमजोरी है. 

हत्या की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अशोक गहलोत बताते हैं, जैसे ही मुझे इसकी जानकारी मिली, मैंने अपना निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिया और उदयपुर रवाना हो गया. और बीजेपी नेताओं पर आरोप लगाते हैं, बीजेपी के कई नेताओं को घटना की जानकारी मिलने के बाद भी वे हैदराबाद में एक कार्यक्रम में भाग लेने का फैसला किया था. असल में उस वक्त हैदराबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी आयोजित की गयी थी.

अशोक गहलोत का नया आरोप है कि बीजेपी नेताओं से कनेक्शन के चलते ही केंद्र की बीजेपी सरकार हमलावरों को बचा रही है, और चुनाव के दिनों में माहौल खराब करने के लिए राजस्थान सरकार पर आरोप लगा रही है. 

अमित शाह की ही तरह कन्हैयालाल की हत्या को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी आरोप लगा चुके हैं, इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी राजस्थान सरकार की प्रतिक्रिया बहुत ढीली रही. 

हिमंत बिस्वा सरमा ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाले लहजे में एक बार कहा था, 'अगर ऐसी ही घटना असम में घटती तो पांच मिनट बाद ही जवाब मिल गया होता... कुछ ही देर में ब्रेकिंग न्यूज आ चुकी होती कि कुछ बहुत बड़ा हो चुका है.' 

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राजनीति, आतंकवाद और चुनावी मुद्दा!

जिस तरीके से कन्हैयालाल की हत्या की गयी थी, और घटना के बारे में जिस किसी ने भी सुना सभी का मन सिहर उठा था. कथित हत्यारों ने कन्हैयालाल का गला काटते हुए वीडियो तक बना डाला था - और सोशल मीडिया पर डाल कर ये भी बताया था कि ऐसी घिनौती वारदात को अंजाम क्यों दिया?

हमलावर बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी का सपोर्ट करने से नाराज थे. जब उनको कन्हैयालाल की सोशल मीडिया पोस्ट के बारे में पता चला तभी हत्या का प्लान बना लिया - और अपने एक साथी की मदद से कन्हैयालाल की दुकान पर पहुंच कर हत्या कर दी. 

नूपुर शर्मा के सपोर्ट को लेकर कन्हैयालाल की कुछ लोगों से बहस भी हुई थी. कन्हैयालाल को जान से मार देने की धमकी भी मिली थी. कन्हैयालाल ने जब पुलिस से शिकायत की तो ये कहते हुए लौटा दिया गया कि कुछ दिन वो शांति से रहें. धमकी की वजह से कन्हैयालाल ने कुछ दिनों तक अपनी दुकान भी बंद रखी थी. 

नूपुर शर्मा के जिस बयान के समर्थन को लेकर कन्हैयालाल की हत्या कर दी गयी, उस पर भी खूब बवाल हुआ. बवाल इतना बढ़ा कि बीजेपी ने नूपुर शर्मा को सस्पेंड कर दिया, और सक्रिय राजनीति से दूर रह कर वो घर बैठी हुई हैं. हाल ही में नूपुर शर्मा को कश्मीर फाइल्स फिल्म बनाने वाले विवेक अग्निहोत्री के कार्यक्रम में मंच पर देखा गया था. 

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अभी अदालत का फैसला नहीं आया है, लेकिन कन्हैयालाल की हत्या की वजह एक राजनीतिक बयान का समर्थन बताया गया है. अशोक गहलोत ये दावा तो रहे हैं, हत्यारों को चार घंटे में ही पकड़ लिया गया, लेकिन ये नहीं बता रहे हैं कि शिकायत मिलने के बावजूद उनकी पुलिस ने कन्हैयालाल को सुरक्षा क्यों नहीं दी? बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनावी मुद्दा बन जाने से कन्हैयालाल को इंसाफ मिल सकेगा?

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