प्रवर्तन निदेशालय की शिकायत पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तलब किया है. दिल्ली शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल को 17 फरवरी को अदालत में पेश होने को कहा गया है.
पांचवें समन के बाद भी जब अरविंद केजरीवाल 2 फरवरी को पेश नहीं हुए, तो अगले दिन ईडी ने अदालत का रुख किया था. ईडी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा, शिकायत का संज्ञान लिया जा रहा है और 17 फरवरी को उन्हें पेश होने के लिए समन जारी किया जा रहा है.
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को पहला समन मिला था तो ईडी को जवाब भेजने के बाद वो मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए चले गये थे. और उसके बाद फिर से समन मिला तो पेशी की तारीख से पहले ही वो विपश्यना के लिए पंजाब चले गये - अरविंद केजरीवाल को ईडी की तरफ से अब तक पांच समन भेजे जा चुके हैं, जिसे वो गैरकानूनी बताते आ रहे हैं.
अरविंद केजरीवाल को कोर्ट का समन मिलने पर आम आदमी पार्टी नेता जैस्मिन शाह का कहना है, आदेश का अध्ययन किया जा रहा है... जो कानूनी रास्ता होगा, उसके हिसाब से काम करेंगे.
ऐसे ही मामले में प्रवर्तन निदेशालय JMM नेता हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर चुका है, लेकिन AAP नेता अरविंद केजरीवाल के पेश न होने पर जांच एजेंसी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
दिल्ली शराब नीति घोटाला केस में ईडी ने पहले अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया, फिर एक और साथी संजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया. दोनों ही नेता फिलहाल जेल में हैं, और बार बार अर्जी देने के बावजूद अब तक उनकी जमानत अभी तक मंजूर नहीं हो सकी है.
साथियों के बाद अब अरविंद केजरीवाल अपनी लड़ाई राजनीतिक और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर एक खास रणनीति बना कर लड़ रहे हैं - अरविंद केजरीवाल को मिला कोर्ट का समन पहली नजर में तो झटके के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन क्या वाकई ऐसा ही है?
केजरीवाल के मुताबिक, ईडी के समन गैरकानूनी हैं
ईडी को समन को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कहते आये हैं, 'मुझे भेजे गये चारों समन कानून की नजर में गैरकानूनी हैं... ऐसे समन को पहले अदालतों की तरफ से रद्द कर दिया गया है... मैंने बार-बार ईडी को पत्र लिखकर कहा कि ये समन अवैध हैं लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया.
शुरू से ही अरविंद केजरीवाल का ई़डी से सवाल रहा है कि उनको आरोपी के रूप में बुलाया जा रहा है, या गवाह के तौर पर? अरविंद केजरीवाल और उनके साथी बार बार कह रहे हैं कि आम आदमी पार्टी के नेता को राजनीतिक साजिश के तहत गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है.
ईडी को भेजे अपने जवाब में अरविंद केजरीवाल सीबीआई दफ्तर में अपनी पेशी का भी हवाला देते हैं. कहते हैं कि वो हमेशा कानून का पालन करने वाले नागरिक रहे हैं, पिछले साल 16 अप्रैल को सीबीआई दफ्तर भी गये थे.
सूत्रों के हवाले से आई खबर के अनुसार, अरविंद केजरीवाल ईडी पर अपने खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगा चुके हैं. ईडी की तरफ से अरविंद केजरीवाल पर समन की बातें लीक करने का भी आरोप लगाया जा चुका है. अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद के प्रति ईडी के अनादर की बात कही है.
ईडी का कोर्ट जाने के बाद क्या संभावना है?
शराब नीति केस की जांच शुरू होते ही अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक लड़ाई शुरू कर दी थी. जैसे मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के मामले में गिरफ्तारी की आशंका जताते रहे, अपने बारे में भी बिलकुल वही तरीका अपनाया हुआ है.
अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए तो वो दिल्ली के लोगों के बीच जाकर उनकी राय भी ले चुके हैं. आम आदमी पार्टी ने एक मुहिम चला कर दिल्ली के लोगों की राय ली थी कि क्या अरविंद केजरीवाल को जेल से सरकार चलानी चाहिये? सर्वे के नतीजों का हवाला देकर आम आदमी पार्टी की तरफ से बताया गया कि दिल्ली के लोग नहीं चाहते कि अरविंद केजरीवाल इस्तीफा दें, बल्कि वे लोग चाहते हैं कि अरविंद केजरीवाल जेल से ही सरकार चलायें. AAP नेता आतिशी ने कहा था कि जेल से सरकार चलाने के लिए वे लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
अब अगर कोर्ट के समन की बात करें तो 17 फरवरी तक तो अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर 17 फरवरी तक रोक लगी हुई है. तब तक ईडी को हाथ पर हाथ रख कर बैठे रहना होगा. ईडी तो अब तभी कोई कदम उठा सकती है जब अरविंद केजरीवाल कोर्ट में भी अपनी पेशी को लेकर कोई नई रणनीति अपनाते हैं.
हो सकता है अरविंद केजरीवाल की तरफ से उनका वकील अदालत में पेश होकर कोई नई तारीख लेने की कोशिश करे. फिर तो सब कुछ वकील की दलील पर निर्भर करता है. कानूनी रूप से ठीक लगने पर अदालत उसके हिसाब ले आदेश जारी कर सकती है. एक संभावना ये जरूर है कि अदालत अरविंद केजरीवाल को सीधे ईडी के सामने पेश होने का आदेश जारी कर दे, लेकिन वकील की दलील से सहमत होने पर राहत भी मिल सकती है.
अव्वल तो प्रवर्तन निदेशालय के अफसर पहले से निश्चित और तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहे होंगे, लेकिन एरर ऑफ जजमेंट तो सभी पर लागू होता है. न्यायिक प्रक्रिया में भी इसीलिए फैसलों की समीक्षा के लिए रिव्यू पेटिशन के इंतजाम किये गये हैं.
ऊपर से देखने में तो अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन दोनों के केस एक जैसे लगते हैं, इसलिए एक सवाल तो बनता ही है कि ईडी के तरीके अलग अलग क्यों हैं? ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया, और अरविंद केजरीवाल के केस में अदालत चली गई. हेमंत सोरेन को तो ईडी ने 10 समन भेजे थे, अरविंद केजरीवाल को भी तो पाचवें के बाद भी समन भेजे जा सकते थे.
क्या हेमंत सोरेन को इसलिए गिरफ्तार होना पड़ा क्योंकि JMM नेता पेशी के लिए तैयार हो गये थे?
अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन कानूनी लड़ाई तो उसी तरीके से लड़ी जा रही होगी जैसे बाकी मामलों में होता है. तारीख पर तारीख टाइप. तब क्या होगा जब अरविंद केजरीवाल अदालत में ईडी को पार्टी बनाकर कानूनी लड़ाई में घेरने की कोशिश करते हैं.
अदालती प्रक्रिया अगर शुरू हुई तो अरविंद केजरीवाल ये मामला हाई कोर्ट भी ले जा सकते हैं. और वहां से भी उनके हिसाब से उनको राहत नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट चले जाएंगे. बेशक सुप्रीम कोर्ट अगर अरविंद केजरीवाल को ईडी के सामने पेश होने का हुक्म देता है, तो हुक्म की तामील तो होगी ही.
लेकिन ये सब होने में वक्त तो लगेगा ही. सब कुछ फटाफट हो जाएगा, ऐसा तो है नहीं - और क्या तब तक लोक सभा का चुनाव खत्म नहीं हो चुका होगा?
अब इस दौरान सीबीआई कोई एक्शन ले तो क्या होगा? अगर पूछताछ के लिए बुलाये तो अरविंद केजरीवाल क्या करेंगे? उनकी बातों से तो लगता है, सीबीआई के बुलाने पर पेश होंगे ही. क्योंकि सीबीआई की पुकार को ईडी की तरह गैरकानूनी तो मानते नहीं.
फिर तो सीबीआई किसी दिन भी गिरफ्तार कर सकती है, और बाद में कस्टडी ईडी ले सकती है. बीते कई मामलों में ये देखने को भी मिला है - बाकी कोर्ट में ट्रायल चलती रहेगी.
ध्यान देने वाली बात ये है कि 15 फरवरी से दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है, ऐसे में अरविंद केजरीवाल के वकील बजट पेश किये जाने को महत्वपूर्ण सरकारी काम बताकर नई तारीख लेने का प्रयास तो कर ही सकते हैं. फिर तो ये संभावना तो बनती ही है कि अरविंद केजरीवाल 17 फरवरी को बजट के बहाने कोर्ट में पेश होने से छूट पालें. कानूनी तरीके से ये संभव तो है ही. है कि नहीं?