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शाहजहां शेख को लेकर इतनी किरकिरी क्‍यों सहती रहीं ममता बनर्जी?

पहले गुनाह को नहीं माना, एफआईआर तक दर्ज करने से मना किया. जब एफआईआर दर्ज हुई तो गिरफ्तारी से बचाती रहीं. गिरफ्तारी हुई तो सीबीआई को सौंपने से मना कर रही थीं. आइए उन कारणों का विश्वेषण करते हैं कि ऐसी क्या वजहें हैं जो ममता बनर्जी इस कदर शाहजहां शेख को संरक्षण दे रही थीं.

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: शाहजहां शेख को क्यों बचा रही हैं ममता बनर्जी
: शाहजहां शेख को क्यों बचा रही हैं ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल सरकार शुरू से ही संदेशखाली के डॉन शाहजहां शेख को बचा रही थी उससे तो यहीं लगता है कि दाल में कुछ काला है. पर जिस तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने 43 आपराधिक केस के आरोपी शाहजहां शेख को सीबीआई के हवाले करने से मना कर दिया उससे तो लगता है कि दाल में कुछ काला नहीं है बल्कि पूरी दाल ही काली है.

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संदेशखाली मामले पर बंगाल की ममता सरकार को हाईकोर्ट से झटका लगा है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने ईडी टीम पर हमले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए हैं. साथ ही कोर्ट ने ममता सरकार को आदेश दिया है कि वह मामले में आरोपी शाहजहां शेख को मंगलवार शाम तक सीबीआई की हिरासत में सौंप दें. हाईकोर्ट के इस आदेश को ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में थीं पर शायद और भद न पिटे इस कारण पश्चिम बंगाल सरकार ने सरेंडर कर दिया और शाहजहां शेख को सीबीआई को सौंप दिया गया.आखिर इस तरह की जिद क्यों? पहले गुनाह को नहीं माना, एफआईआर तक दर्ज करने से मना किया. जब एफआईआर दर्ज हुई तो गिरफ्तारी से बचाती रहीं. गिरफ्तार हुई तो सीबीआई को सौंपने से मना कर रही थीं.आइए उन कारणों का विश्वेषण करते हैं कि ऐसी क्या वजहें हैं जो ममता बनर्जी इस कदर शाहजहां शेख को संरक्षण दे रही हैं.

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शाहजहां शेख की गिऱफ्तारी भी हुई तो ईडी की हिरासत से बचाने के लिए 

ईडी की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सोमवार को दलील देते हुए राज्य की पुलिस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया था. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि 5 जनवरी को संदेशखाली में लगभग 1,000 लोगों की भीड़ ने ईडी अफसरों पर हमले किए थे. उसके खिलाफ 40 से अधिक मामले दर्ज हैं पर अभी तक इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि ममता सरकार ने शाहजहां शेख की गिरफ्तारी भी केवल इसलिए करवाई ताकि ईडी की हिरासत से शाहजहां शेख को बचाया जा सके.

शेख की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच बशीरहाट पुलिस से लेकर सीआईडी को सौंप दी थी. सॉलिसिटर जनरल का दावा है कि शेख की सीआईडी जांच करवाने की घोषणा भी केवल सीबीआई हिरासत से इनकार करने के लिए किया गया था. शाहजहां और उसके सहयोगियों पर संदेशखाली में प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला करने का आरोप है. स्थानीय महिलाएं भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगा रही हैं और महीनेभर से आंदोलन कर रही हैं. पुलिस ने शाहजहां पर जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज की है, वे बेहद गंभीर हैं और उनमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है.

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ईडी का कहना है कि पश्चिम बंगाल के राशन वितरण घोटाले में करीब 10 हजार करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. इस मामले में ईडी ने सबसे पहले बंगाल के पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को गिरफ्तार किया था. बाद में टीएमसी नेता शाहजहां शेख और बनगांव नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन शंकर आद्या की भी संलिप्तता भी सामने आई.  

आजीवन कारावास तक के मामले हैं जिस शख्स पर हैं दर्ज उसके लिए हमदर्दी क्यों

संदेशखाली के आरोपी शाहजहां शेख पर केवल ईडी अधिकारियों की पिटाई करवाने का ही आरोप नहीं है बल्कि संदेशखाली में जमीन पर कब्जा करने और यौन उत्पीड़न के भी आरोप लगे हैं.शाहजहां शेख पर तीन बीजेपी समर्थकों की हत्या और बिजली विभाग के कर्मचारियों की मारपीट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं.  उसे पिछले सप्ताह गुरुवार सुबह गिरफ्तार किया गया था. संदेशखाली और आसपास के इलाकों में 3 मार्च तक धारा 144 लागू की गई है. शाहजहां पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 341, 186, 353, 323, 427, 379, 504, 307, 333, 325, 326, 395, 397, 34 के तहत आरोप लगाए गए हैं.

शाहजहां पर 43 केस दर्ज हैं. लेकिन ज्यादातर मामलों में या तो केस की चार्जशीट उपलब्ध नहीं है या फिर शाहजहां के खिलाफ जांच लंबित है. आजतक के पास ऐसे दस्तावेज हैं जो साबित करते हैं कि कैसे कई मामले दर्ज होने के बावजूद प्रशासन ने शाहजहां के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. गुरुवार को सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन्ही सब मामलों के चलते जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया. हाईकोर्ट ने वकील से कहा,  हम आपके पेश होने का इंतजार कर रहे थे. HC के चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने फटकार लगाते हुए कहा कि हमें इस व्यक्ति पर कोई सहानुभूति नहीं है. अगले 10 साल तक कोर्ट आना-जाना पड़ेगा. पेशी होगी. सुनवाई चलेगी. फिर फैसला आएगा. हाईकोर्ट ने कहा, वकील साहब, अगले 10 साल तक आपके पास बहुत-सा काम होगा. आप काफी व्यस्त रहेंगे. सोमवार को अगली सुनवाई के लिए आइए. 

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सुप्रीम कोर्ट तक गई सरकार ताकि 150 विधानसभा क्षेत्रों में वोट बैंक पुख्ता रहे

ममता सरकार शाहजहां शेख को बचाने के लिए किस हद तक जा सकती है उसकी एक बानगी देखिए. 10000 करोड़ के घोटाले में ईडी शाहजहां शेख से पूछताछ करना चाहती है. सीबीआई जांच करना चाहती है पर ममता सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर रही है. पर दुर्भाग्य से कहीं भी उनके फेवर में फैसला नहीं हो पा रहा है. 

पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है. कारण, सरकार की तरफ से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल शंकर नारायणन ने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत सुनवाई का आग्रह किया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि पहले इस मामले को रजिस्ट्रार जनरल के पास जाकर मेंशन करें. पश्चिम बंगाल की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल शंकर नारायणन ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 4.30 तक केस पेपर और शाहजहां शेख को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था.

सवाल यह है कि आखिर ममता बनर्जी सरकार क्यों ये सब कर रही है. दरअसल सबसे बड़ा कारण है सीमावर्ती इलाकों की तेजी से बदल रही है डेमोग्राफी. यहां मुस्लिम आबादी लगभग 30 फीसदी है, लेकिन वास्तविक तौर पर देखा जाए तो यह 40 फीसदी हो गया है. बताया जाता है कि घुसपैठ के जरिए पश्चिम बंगाल के छह जिले मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और कूचबिहार मुस्लिम बहुल हो गये हैं. पूरे बंगाल में 150 विधानसभा क्षेत्र है, जो पूरी तरह से मुस्लिम वोट से नियंत्रित होता है.अभी मुस्लिम समुदाय का पूरा वोट तृणमूल कांग्रेस को जाता है क्योंकि अभी संरक्षण देने की हैसियत में तृणमूल ही है. इसके पहले कम्युनिस्ट पार्टियां इस हैसियत में थीं तो वोट उन्हें जाता रहा.

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माकपा से लेकर टीएमसी तक ऐसे लोगों के ही सहारे बनी रहती है सत्ता

शाहजहां शेख 2010 के पहले तक कम्युनिस्ट पार्टियों के लिए काम करता था. पर पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही साम्राज्य की रक्षा के लिए शाहजहां ने ये निर्णय कर लिया था कि वह माकपा से दूरी बनाएगा. टीएमसी ने साल 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में वामपंथ की 34 साल की सत्ता को खत्म करके बंगाल में सरकार बनाई. शाहजहां ने हवा का रुख भांप लिया और साल 2012 में टीएमसी से जुड़ गया. 

अब तक जो काम वह लेफ्ट की सरकार के अधीन कर रहा था. अब वही काम वह तृणमूल की सरकार के अधीन करने लगा. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो तृणमूल के दो नेताओं का शाहजहां को सीधा वरदहस्त था. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मुकुल रॉय और उत्तर 24 परगना के जिलाध्यक्ष ज्योतिप्रिय मलिक. लोगों का मानना रहा है कि शाहजहां शेख की काली कमाई का हिस्सा पहले कम्युनिस्ट पार्टियों को ज़ाता था वो अब टीएमसी को जाने लगा था.पत्रकार विनोद शर्मा कहते हैं कि बंगाल में सत्ता का आधार बिंदु शाहजहां शेख जैसे लोग ही हैं. इन्हीं जैसे लोगों के बल पर बंगाल में पहले 34 साल तक कम्युनिस्टों ने शासन किया उसके बाद तृणमूल कांग्रेस कर रही है.शेख जैसे माफिया मैन पावर, गन पावर और मनी पावर तीनों से शक्ति संपन्न होते हैं. जो राजनीतिक दलों को हर मौके पर उपलब्ध कराती हैं.
राजनीतिक हल्कों में ये कहा जाता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर भी ये तंत्र खत्म नहीं होने वाला है. बीजेपी को भी शासन करने लिए शाहजहां शेख जैसे लोगों के इशारों पर ही काम करना होगा.फर्क बस इतना होगा कि चेहरे बदल जाएंगे.

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किसी फिल्मी डॉन से कम नहीं शाहजहां शेख की कहानी

शाहजहां शेख की कहानी जिस तरह लोगों की सामने आ रही है उससे यही लगता है कि यह बॉलिवुड फिल्ंमों का कोई खलनायक है जिसका एक इलाका है जहां कानून का राज नहीं बल्कि इस डॉन का राज चलता है. या कोई अपराध की वेबसीरीज है जिसमें एक शख्स वर्षों पहले बांग्लादेश लांघकर भारत आता है और यहां खेतों और ईंट भट्ठों पर काम करने लगता है. वह मजदूरी ही नहीं करता बल्कि नाव और सवारी गाड़ी भी चलाता है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के चरमोत्कर्ष काल में वह राजनीति में जगह बनाता है. साल 2002 में शेख ने ईंट भट्ठों के मजदूरों का यूनियन बनाता है और माकपा का दुलारा बन जाता है.फिर शेख को अपने साथ लाती हैं ममता बनर्जी.

आरोप हैं कि सत्ता का संरक्षण मिलते ही शाहजहां लगभग बेअंदाज हो गया. उसने यहां के लोगों के खेतों और ज़मीनों पर कब्जा करना के लिए जो हथकंडे अपनाएं उसे सुनकर रोंगटें खड़े हो जाते हैं. शेख संदेशखाली के लोगों की उपजाऊ जमीन लीज पर लेता. उनमें पानी भरकर मछली और झींगा पालने के लिए भेड़ी (तालाब) बना देता. खेत देने से मना करने किसानों की जमान में लाता-खारा पानी भर देता. इससे उन जमीन में उपज नहीं हो पाती और मजबूरी लोगों को अपनी जमीन शेख को देनी पड़ती. 

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