पिछले सप्ताह गुजरात के सियासी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा रही कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष रहे अर्जुन मोढवाडिया का 40 साल बाद कांग्रेस को छोड़ने और भाजपा में शामिल होना. 40 सालों तक कांग्रेस में रहे अर्जुन मोढवाडिया ने सिर्फ 24 घंटे के भीतर अपने विधायक के पद से इस्तीफा दिया और साथ ही भाजपा में शामिल भी हो गए.
यह कोई पहला वाक्या नहीं है जब गुजरात में कांग्रेस के नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा हो. साल 2012 से अब तक कांग्रेस के छोटे बड़े लगभग 100 से ज्यादा नेता केसरिया (भाजपा मे शामिल) कर चुके हैं. गुजरात के पूर्व डिप्टी सीएम रहे नरहरि अमीन से लेकर पोरबंदर कांग्रेस के विधायक अर्जुन मोढवाडिया भाजपा में आ चुके हैं.
कांग्रेस छोड़ने वाले ये सभी ऐसे नेता हैं जो कभी ना कभी विधायक या सांसद रहे हों या फिर पुरानी कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे हों. इसके अलावा इन बड़े नेताओं के साथ हजारों कार्यकर्ता जुड़े हैं, उनकी गिनती अलग. यानी की गुजरात कांग्रेस की ज्यादातर लीडरशिप या नेतागिरी का अंत हो चुका है.
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कांग्रेसी नेताओं के मोहभंग की क्या वजह?
आमतौर पर जब भी कोई कांग्रेस का नेता भाजपा में जुड़ता है तो आरोप लगते हैं कि साम, दाम, दंड, भेद से उन्हें दबाया गया, लेकिन जब अर्जुन मोढवाडिया जैसे नेता भाजपा में शामिल होते हैं जिन्हें कांग्रेस ने सब कुछ दिया हो तब यह सवाल उठता है कि ऐसी कौन सी वजह है कि नेताओं का कांग्रेस से मोहभंग होता है? भले ही आधिकारिक तौर पर राम मंदिर के लिए कांग्रेस के स्टैंड की बात हों या फिर देशहित के मुद्दों पर कांग्रेस जनता से दूर होने की बात का आरोप लगाकर नेता कांग्रेस छोड़ते हैं.
सच्चाई यह है कि जिन नेताओं ने 30-40 साल कांग्रेस में बिताए उनको लगता है कि अभी कांग्रेस सत्ता में आने की स्थिति में नहीं है. वैसे में सत्ता में आने के लिए भाजपा ही एकमात्र विकल्प है. इसलिए वह भाजपा मे जुड़ते हैं. हम ऐसे नहीं कह रहे हैं क्योंकि अगर वर्तमान गुजरात सरकार के मंत्रिमंडल पर नजर डालें तो सरकार के 9 में से तीन कैबिनेट मंत्री बलवंतसिंह राजपूत, कुंवरजी बावलिया, राघवजी पटेल कांग्रेस छोड़कर भाजपा मे आए थे.
गुजरात बीजेपी के 38 विधायक कांग्रेस के पूर्व नेता
साल 2022 के चुनाव मे जीते भाजपा के 156 विधायकों मे से 38 विधायक कांग्रेस छोड़कर भाजपा मे आए हुए या कांग्रेसी गोत्र के हैं. कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्यादातर बड़े नेताओं को भाजपा ने सरकार में जगह दी है या फिर राज्यसभा में उनको मौका मिला है.
कांग्रेस के नेताओं का भाजपा में जाने का सिलसिला यही वजह है कि थम नहीं रहा है. शायद यही वजह है जिसके लिए आम लोगों में यह परसेप्शन बन चुका है कि गुजरात में विपक्ष है ही नहीं. यानी की भाजपा के सामने गुजरात में जनता के लिए कोई विकल्प नहीं है.
राहुल गांधी की चार दिवसीय न्याय यात्रा
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो ने यात्रा ने गुजरात में अपना चार दिन का अभियान पूर्ण कर लिया है. भरूच सीट से INDIA गठबंधन के उम्मीदवार चैतर वसावा यात्रा में जुड़े पर दिवंगत अहमद पटेल का परिवार यात्रा से गायब रहा. गुजरात कांग्रेस ने यात्रा को सफल बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया.
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वहीं राहुल गांधी ने बाकी बचे कांग्रेसी विधायकों के साथ बैठक कर उन्हें साल 2027 के चुनाव की तैयारी करने के लिए कहा है. राहुल गांधी की यह यात्रा ज्यादातर आदिवासी इलाकों से गुजरी है और कांग्रेस आशा कर रही है कि यात्रा के जरिए आने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन उनको वापस मिले.
गुजरात भाजपा के बाकी उम्मीदवारों पर मंथन
भाजपा की पहली सूची में गुजरात के 15 उम्मीदवारों के घोषणा के बाद अब बाकी 11 सीटों के उम्मीदवारों के नाम को लेकर दिल्ली में मंथन हो रहा है. भाजपा के सूत्रों की मानें तो मुमकिन है कि सभी 11 सीटों पर नए चेहरे देखने को मिले. उनमें 4-6 महिला उम्मीदवार भी हो सकती हैं.
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पिछली बार भाजपा ने 6 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था और पहली सूची में 15 में सिर्फ दो महिला उम्मीदवार थे. अब जब महिला आरक्षण की बात भाजपा लेकर आई है तब पिछले चुनाव से यह आंकड़ा कम हो ऐसी संभावना बहुत कम है. वैसे में दूसरी सूची में ज्यादातर महिला उम्मीदवार हो सकती हैं.