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...तो सैम पित्रोदा ही असली 'पप्पू' हैं, कांग्रेस और राहुल गांधी क्यों नहीं कर सकते किनारा?

राहुल गांधी की छवि अब एक तेज तर्रार नेता के तौर पर उभर रही है, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं  ने भी उन्हें पप्पू कहना छोड़ दिया है. ऐसे समय में उस पुरानी बात को दुहराकर सैम पित्रोदा ने फिर से एक बार राहुल गांधी के पप्पू होने की बात पर बहस छेड़ दी है.

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सैम पित्रोदा और राहुल गांधी (फाइल फोटो)
सैम पित्रोदा और राहुल गांधी (फाइल फोटो)

राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए कई बार मुसीबत बन चुके इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा एक बार फिर पार्टी में शर्मिंदगी का कारण बन गए हैं. राहुल गांधी की अमेरिका यात्रा के पहले ही दिन अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए पित्रोदा ने राहुल गांधी की तारीफ करते हए उन्हें पप्पू कहकर सब गुण गोबर कर दिया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का एजेंडा बड़े मुद्दों को सुलझाने का है. उनके पास ऐसा विजन है, जिसके लिए बीजेपी करोड़ों रुपये खर्च करती है. उन्होंने कहा , मैं आपको बता दूं कि वह पप्पू नहीं हैं बल्कि बहुत पढ़े-लिखे हैं. वह स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिनका किसी भी विषय पर गहन अध्ययन है. राहुल गांधी की छवि अब एक तेज तर्रार नेता के तौर पर उभर रही है, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं  ने भी उन्हें पप्पू कहना छोड़ दिया है. ऐसे समय में उस पुरानी बात को दुहराकर उन्होंने फिर से एक बार राहुल गांधी के पप्पू होने की बात पर बहस छेड़ दी है. राजनीतिक गलियारों में पित्रोदा की इस मासूमियत पर बहस छेड़ दी है. कुछ लोग कह रहे हैं असल में राहुल गांधी और कांग्रेस के नेता वास्तव में पप्पू हैं जो सैम पित्रोदा से छुटकारा नहीं पा रहे हैं. अभी इसी सप्ताह पित्रोदा ने एक बयान में राहुल गांधी को राजीव गांधी से भी होशियार और तेज नेता बता दिया था.  

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1-बीजेपी ने भी पप्पू कहना छोड़ दिया है अब तो...

सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी को पप्पू कहना छोड़ दिया है. हाल फिलहाल में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता जब बीजेपी की टॉप लीडरशिप में से किसी ने राहुल गांधी को पप्पू कहा हो. संसद में पीएम नरेंद्र मोदी ने जरूर उन्हें बालक बुद्धि बोला था, पर पप्पू जैसे पर्सनल आक्षेप करने से पार्टी नेता बच रहे हैं. मतलब साफ है कि राहुल गांधी के खिलाफ अब बीजेपी व्यक्तिगत हमले करने से बच रही है. सवाल उठता है कि ऐसे समय में क्यों राहुल को पप्पू बोलकर सैम पित्रोदा ने बीजेपी को एक और मौका दे दिया कांग्रेस पर आक्षेप करने का. ऐसे समय में जब कांग्रेस राहुल गांधी का इमेज मेकिंग कर रही है सैम पित्रोदा को इस तरह के ब्लंडर के लिए दोषी ठहराकर बाहर का रास्ता क्यों नहीं दिखाया जा रहा है. कहा जाता है कि एक गलती करने पर माफी दी जाती है पर बार-बार गलती करने पर तो अपने बच्चे को भी माफ नहीं किया जाता.

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कांग्रेस मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह को काबू में कर सकती है तो फिर सैम पित्रोदा पर आखिर इतनी रहम क्यों की जा रही है.यही नहीं भारतीयों पर नस्ली टिप्पणी करने के बाद कांग्रेस ने पित्रोदा से रिजाइन मांग लिया था. पर आश्चर्यजनक रूप से लोकसभा चुनावों के बाद उनकी बहाली फिर उसी पद पर हो गई. यह समझ में नहीं आता कि कोई शख्स अगर पार्टी को लोकसभा चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है तो क्या राज्य विधानसभा चुनावों में वो पार्टी को नहीं नुकसान पहुंचाएगा?. जाहिर है कि यह सवाल उठेगा ही कि सैम पित्रोदा आखिर क्यों पार्टी पर बोझ बने हुए हैं. 

2-क्यों सैम पित्रोदा कांग्रेस के लिए हैं जरूरी

दरअसल कांग्रेस चाहती है कि जिस तरह बीजेपी को देश में घेरा जा रहा है उसी तरह विदेशों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस को टार्गेट किया जाए. यह सभी जानते हैं कि सैम पित्रोदा राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के मुख्य आयोजक रहे हैं. राहुल गांधी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान अक्सर शैक्षणिक संस्थानों में या विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ बातचीत करते हैं, उसके पीछे पित्रोदा ही होते हैं. पित्रोदा की इस मामले की तारीफ करनी होगी कि राहुल गांधी विदेशों में जो भी बोलते हैं उसकी चर्चा विश्व स्तर पर होने लगी है. फरवरी-मार्च, 2023 में लगभग एक सप्ताह के यूके दौरे के वक्त राहुल की यात्रा जिसको पित्रोदा ने इस तरह क्राफ्ट किया था कि जिसकी चर्चा वेस्ट की मीडिया में खूब हुई. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में संबोधन, लंदन में चैथम हाउस थिंक टैंक में चर्चा और मीटिंग का आयोजन पित्रोदा ने ही कराया था. जिसमें भारतीय मूल के लेबर पार्टी के सांसद वीरेंद्र शर्मा भी शामिल हुए थे. इन मीटिंग्स में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर आलोचना की गई थी.

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जाहिर है कि पित्रोदा का विदेश में मजबूत नेटवर्क है, जिसे पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व देश के बाहर अपना संदेश फैलाने में फायदेमंद मानता है. पित्रोदा का विदेशों, विशेषकर पश्चिम के अकादमिक हलकों से अच्छा संबंध है. वह पार्टी को विदेशों में कार्यक्रमों की योजना बनाने में मदद करते हैं. राजनयिक समुदाय के भीतर भी उनके अच्छे संबंध हैं. इसी का सहारा लेकर कांग्रेस प्रवासी भारतीयों के साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत करने के नाम पर भारतीय जनता पार्टी को विदेशों में टार्गेट करती है.

3- क्या कांग्रेस रणनीति के तहत ये सब कर रही है

अब सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस ने जानबूझकर किसी रणनीति के तहत राहुल गांधी को पप्पू कहने दिया गया. आज कल इमेज बिल्डिंग के लिए काम करने वाली एजेंसियां बहुत से ऐसे कार्य करती हैं जो आम लोगों की समझ से बाहर होता है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बीच चल रही खतरनाक लेवल की बयानबाजी के पीछे एक अमेरिकी इमेज बिल्डिंग एजेंसी का हाथ बताया गया था. तब यह कहा गया था कि अखिलेश को पार्टी में पूर्ण रूप से स्थापित करने के लिए मुलायम सिंह यादव से इस एजेंसी ने ऐसे बयान दिलवाए थे जिसे सुनकर लोग हतप्रभ थे. 

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हो सकता है कि ऐसा ही कुछ कांग्रेस भी कर रही हो. क्योंकि अब राहुल गांधी का सितारा बुलंदी पर है. कांग्रेस की यह रणनीति हो सकती है कि आम जनता को यह बताया जाए कि किस तरह उनके नेता को पप्पू साबित कर दिया गया था. कांग्रेस हो या सैम पित्रोदा यह बात कहते रहे हैं कि राहुल गांधी को पप्पू साबित करने के लिए बीजेपी कई सौ करोड़ खर्च करती है. हो सकता है कि कांग्रेस इस रणनीति के तहत बीजेपी को खलनायक बनाना चाहती हो? 

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