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क्‍या झारखंड में 'घुसपैठिये' बीजेपी को दोबारा सत्ता में ला पाएंगे? | Opinion

कहने को तो चुनाव आयोग ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस की शिकायत पर बीजेपी के कैंपेन वीडियो पर फटाफट एक्शन लिया है. वीडियो डिलीट भी हो गया है, लेकिन सवाल तो ये उठता ही है कि नफा किसे हुआ, और किसे नुकसान?

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झारखंड में बीजेपी के वीडियो पर चुनाव आयोग के एक्शन के बावजूद बीजेपी को फायदा
झारखंड में बीजेपी के वीडियो पर चुनाव आयोग के एक्शन के बावजूद बीजेपी को फायदा

16 नवंबर की रात को झारखंड बीजेपी ने सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट किया था. झारखंड में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा और INDIA ब्लॉक में उसकी गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने वीडियो के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी.

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खास बात ये है कि 17 नवंबर की शाम तक यानी कुछ घंटों में ही शिकायत पर एक्शन भी हो गया, और बीजेपी ने वीडियो डिलीट भी कर दिया. चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस ने भी FIR दर्ज की है. 

चुनाव आयोग से की गई शिकायत में बीजेपी पर भ्रामक बातें करने, समाज को बांटने की कोशिश करने और आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया था - और चुनाव आयोग ने JMM और कांग्रेस की शिकायत को सही मानते हुए सख्त हिदायतें जारी कर दी. 

सवाल ये है कि वीडियो में ऐसा क्या था जिस पर चुनाव आयोग भी फटाफट एक्शन मोड में आ गया? 

और सवाल ये भी है कि चुनाव आयोग के एक्शन से बीजेपी को नुकसान और शिकायत दर्ज कराने वालों JMM और कांग्रेस को कोई फायदा भी हुआ क्या?

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क्या था वीडियो में, और शिकायत में

वीडियो असल में बीजेपी के घुसपैठिया कैंपेन का हिस्सा था. वीडियो में एक घर दिखाया गया था जहां हेमंत सोरेन से मिलती जुलती एक तस्वीर टंगी हुई थी. वीडियो के जरिये उसे झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता का घर दिखाने की कोशिश की गई है, जहां अचानक काफी सारे घुसपैठिये पहुंच जाते हैं, और कहते हैं कि आगे से वे वहीं रहेंगे. 

झारखंड बीजेपी के वीडियो वाले पोस्ट के साथ चुनाव आयोग को टैग करते हुए JMM ने सोशल साइट एक्स पर ही काफी तीखे सवाल किये, क्या देश में अब ऐसे चुनाव होगा? हिंदू-मुस्लिम के नाम पर आप देश को कितना गिरने देंगे? अब थोड़ी शर्म करके जाग जाइए... थोड़ी हिम्मत दिखाइये, बीजेपी ने निर्लज्जता, ओछापन की सारी सीमाएं लांघ दी है. 

JMM महासचिव विनोद पांडेय की तरफ से चुनाव आयोग को दी गई शिकायत में कहा गया था, आचार संहिता उल्लंघन कर किये जा रहे हैं. ऐसे प्रचार को तत्काल बंद कर कार्रवाई की जाये. 

JMM की शिकायत थी कि बीजेपी के आधिकारिक X हैंडल पर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पोस्ट किये जा रहे हैं. जेएमएम की ही तरह कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी वीडियो के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. 

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शिकायत को गंभीर मानकर एक्शन लेते हुए चुनाव आयोग ने झारखंड के मुख्य चुनाव अधिकारी को कई निर्देश जारी किये. झारखंड बीजेपी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने की हिदायत के साथ ही आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर नोटिस देकर जवाब मांगा गया है. पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज कर ली है. 

घुसपैठियों का मामला चुनावी मुद्दा बना क्या

बीजेपी झारखंड में बांग्लादेशी घुसपैठियों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में पहले से ही जुट गई थी, और उसे हवा मिली यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगरा में दिये गये स्लोगन से - बंटेंगे तो कटेंगे. 

योगी आदित्यनाथ की ही तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह ने भी घुसपैठियों का मामला जोर शोर से उठाया. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तो घुसपैठियों का आधार कार्ड और वोटर आई तक बनवा डालने का आरोप JMM नेता हेमंत सोरेन और उनकी सरकार पर लगाया. 

एक रैली में जेपी नड्डा लोगों को अपने हिसाब से समझा रहे थे, 'अभी मुझे खुफिया रिपोर्ट मिली है... उसमें कहा गया है कि यहां बांग्लादेशी घुसपैठियों को मदरसों में शरण दी जाती है... उनके लिए आधार कार्ड, वोटर कार्ड, गैस कनेक्शन हासिल करना आसान बनाया गया है.

जिन आदिवासी हकों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लड़ाई की बात करते रहे हैं, बीजेपी अध्यक्ष उन पर झारखंड के जल, जंगल, जमीन को लूटने और बड़े पैमाने पर घुसपैठ करवाने का आरोप लगा डालते हैं. और लगे हाथ अपनी तरफ से भरोसा दिलाने की कोशिश करते हैं कि बीजेपी की सरकार ही घुसपैठ रोक सकती है. 

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बीजेपी को वीडियो का फायदा मिला क्या?

अब अगर वीडियो की वजह से हुए फायदे और नुकसान की बात की जाये, तो थोड़ा आगे बढ़ कर समझना पड़ेगा. सबसे पहले ये समझना होगा कि बीजेपी के वीडियो शेयर करने का मकसद क्या था? और, वो मकसद पूरा हुआ या नहीं. 

सोशल मीडिया पर वो वीडियो 24 घंटे से कम ही रहा, लेकिन उसका असर तो हुआ ही होगा. ये वीडियो चुनाव प्रचार की डेडलाइन खत्म होने से से दो दिन पहले पोस्ट किया गया. एक दिन पहले वीडियो पर एक्शन हुआ, और वीडियो डिलीट कर दिया गया - और चुनाव प्रचार के आखिरी दिन वीडियो की बातें मीडिया की सुर्खियों में रहीं. 

कहने को तो चुनाव आयोग ने शिकायत पर जितना जल्दी संभव था, और जो कुछ कर सकता था, किया है. अब वोट वीडियो सोशल मीडिया से हट गया है - लेकिन वीडियो का जो मैसेज था, वो? वो मैसेज तो लोगों तक पहुंच ही चुका है.

देखा जाये तो वीडियो पोस्ट करके वोटर को जो मैसेज दिया जाना था, आराम से पहुंच गया. बीजेपी शुरू से ही घुसपैठियों को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी, अपने मिशन में सफल रही - नतीजा क्या होता है, ये देखना होगा. 

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