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योगी आदित्यनाथ के कैंपेन से दिल्ली में बीजेपी को फायदा होगा क्या?

योगी आदित्यनाथ के दिल्ली में दस्तक देने के पहले से ही 'बंटेंगे तो कटेंगे' का नारा गूंजने लगा है. देखना है योगी आदित्यनाथ का अगला कैंपेन बीजेपी के लिए हरियाणा-महाराष्ट्र जैसे रिजल्ट लाता है, या झारखंड की तरह फिर से हार का मुंह देखना पड़ता है.

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दिल्ली में योगी आदित्यनाथ का असर हरियाणा-महाराष्ट्र जैसा होगा, या झारखंड जैसा?
दिल्ली में योगी आदित्यनाथ का असर हरियाणा-महाराष्ट्र जैसा होगा, या झारखंड जैसा?

बीजेपी के स्टार प्रचारक योगी आदित्यनाथ की दिल्ली चुनाव में भी एंट्री होने जा रही है. प्रयागराज में लगे कुंभ में यूपी के मुख्यमंत्री ने 22 जनवरी को कैबिनेट की बैठक बुलाई है, और अगले दिन यानी 23 जनवरी से वो भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली चुनाव कैंपेन का हिस्सा बन जाएंगे. बताते हैं, दिल्ली में योगी आदित्यनाथ 14 चुनावी रैलियां और सार्वजनिक सभाएं करने वाले हैं. 

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योगी आदित्यनाथ दिल्ली में ऐसे वक्त चुनाव प्रचार करने जा रहे हैं जब उनके उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है. हाल ही में 9 सीटों पर हुए उपचुनाव में से 7 सीटें योगी आदित्यनाथ बीजेपी की झोली में डाल चुके हैं, लेकिन मिल्कीपुर की अलग अहमियत है, वो उपचुनाव अयोध्या की हार का हिसाब बराबर करने वाला है - मिल्कीपुर में भी दिल्ली की ही तरह 5 फरवरी को ही वोटिंग होने वाली है - और नतीजे 8 फरवरी को आएंगे. 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मोर्चा संभालने से पहले ही उनके खास चुनावी स्लोगन ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ फिर से चर्चा में है. योगी आदित्यनाथ ने ये स्लोगन बांग्लादेश के राजनीतिक हालात के प्रसंग में दिया था, और 2024 के आखिर में हुए विधानसभा चुनावों में ये स्लोगन खासा चर्चित रहा. दिलचस्प बात ये है कि दिल्ली चुनाव में योगी आदित्यनाथ का नारा सिर्फ बीजेपी उम्मीदवार कपिल मिश्रा के इलाके में ही नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी की एक महिला उम्मीदवार के मुंह से सुनने को मिला है. 

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हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में तो योगी आदित्यनाथ के नये नारे को भी विशेष रूप से श्रेय मिला था, लेकिन उसी दौरान झारखंड चुनाव में ये पूरी तरह फेल रहा - अब दिल्ली में योगी आदित्यनाथ के कैंपेन का क्या असर होने वाला है, फिलहाल बड़ा सवाल यही है.

‘बंटोगे तो कटोगे’ का इम्तिहान अब दिल्ली में

दिल्ली के करावल नगर विधानसभा क्षेत्र में 'बंटेंगे तो कटेंगे' लिखे पोस्टर देखे गये हैं, वैसे ही जैसे महाराष्ट्र और उसके साथ हुए राज्यों की विधानसभा के चुनाव में देखने को मिले थे. 

करावल नगर से बीजेपी के टिकट पर कपिल मिश्रा चुनाव मैदान में हैं. 2020 में वो दिल्ली विधानसभा का चुनाव हार गये थे, लेकिन उससे पहले वो करावल नगर से विधायक और अरविंद केजरीवाल के कैबिनेट साथी रह चुके हैं. 

असल में, कपिल मिश्रा के चुनाव प्रचार के दौरान ही 'बंटेंगे तो कटेंगे' के पोस्टर दिखाई दिये थे. दिल्ली में ही योगी आदित्यनाथ के नारे का सपोर्ट आम आदमी पार्टी की एक उम्मीदवार की तरफ से देखना काफी दिलचस्प है - असल में, AAP उम्मीदवार ये स्लोगन अपने नेता अरविंद केजरीवाल के लिए कर रही हैं. 

दिल्ली की रोहतास नगर विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार सरिता सिंह 'बंटेंगे तो कटेंगे' बोलकर लोगों से घूम घूमकर वोट मांग रही हैं - और अपने हिसाब से बयान का मतलब समझा रही हैं.

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सरिता सिंह कहती हैं, ‘देखिये, इस नारे का मैं दिल से सपोर्ट करती हूं… इस बार दिल्ली के लोग बंटे और गलती से बीजेपी जीती तो दिल्ली में 10 साल से जो सुविधाएं मिल रही हैं, वो सब कट जाएगा. 

‘बंटेंगे तो कटेंगे’ बोलकर कपिल मिश्रा लोगों को बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं, जबकि सरिता सिंह आम आदमी पार्टी के लिए.

अब देखना है ये नारा देने वाले योगी आदित्यनाथ दिल्ली में जब ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ कहते हैं, तो क्या असर होता है?

दिल्ली के वोटर पर योगी का कितना प्रभाव दिखेगा

योगी आदित्यनाथ वैसे तो पूरे देश में अपनी हिंदुत्व की राजनीति वाली लाइन पर बीजेपी के लिए चुनाव प्रचार करते रहे हैं, लेकिन दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचल के वोटर के बीच बीजेपी उनका इस्तेमाल करना चाहती है. 

दिल्ली चुनाव में इस बार अखिलेश यादव ने पूर्वांचल के लोगों के वोट के लिए ही अरविंद केजरीववाल का सपोर्ट किया है. यूपी में मिल्कीपुर उपचुनाव योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव दोनो के लिए बराबर महत्वपूर्ण है. अखिलेश यादव अपने हिस्से की दो सीटें तो उपचुनाव में गवां ही चुके हैं, ऐसे में मिल्कीपुर जीतना जरूरी हो गया है. रही बात योगी आदित्यनाथ की, तो उनको मिल्कीपुर में बीजेपी के लिए अयोध्या की हार का हिसाब बराबर करना है. 

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योगी आदित्यनाथ के कैंपेन में कूदने से पहले ही आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल ने हमला बोल दिया है. कहते हैं, पूर्वांचल समाज के लोगों के लिए आम आदमी पार्टी के मन में बहुत इज्जत है… पूर्वांचल के लोग पढ़ने और नौकरी के लिए दिल्ली आते हैं… मुझे दुःख है कि बीजेपी उनको तिरस्कार की नजर से देखती है.

पूरी बीजेपी को निशाने पर लेते हुए केजरीवाल कहते हैं, बीजेपी से मेरा सवाल है… दिल्ली में आधी सरकार उनकी है… 10 साल में पूर्वांचल समाज के लिए उन्होंने क्या काम किये? पूर्वांचल के लोग उन्हें वोट क्यों दें? मैंने वो क्लिप भी देखी है जिसमें हमारे ऋतुराज झा को बीजेपी के प्रवक्ता ने गाली दी. 

जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, महाराष्ट्र झारखंड में भी योगी आदित्यनाथ ने जोर शोर से प्रचार किया था, जिनमें से सिर्फ झारखंड में योगी आदित्यनाथ के कैंपेन का कोई प्रभाव नहीं दिखा - दिल्ली चुनाव के नतीजे का इसलिए भी इंतजार रहेगा.

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