क्या 2019 का लोकसभा चुनाव आरक्षण के नाम पर ही लडा जाएगा? क्या राजनीतिक पार्टियां इस देश के गरीब-पिछड़े और शोषित लोगों को एक बार फिर, आरक्षण का झुनझुना पकडा कर सरकार बनाने की जुगत में लगी हुई हैं? क्या रोटी-पानी-बिजली-सड़क और रोज़गार जैसे मुद्दों पर आरक्षण का लॉलीपॉप हावी हो जाएगा? ये सवाल हम क्यों उठा रहे हैं, इसको समझने के लिए आपको पिछले एक दो दिन की घटनाओं को जानना बेहद ज़रूरी है.