अयोध्या विवाद 500 साल से भी ज्यादा पुराना है और 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद से सुप्रीम कोर्ट में अटका पड़ा है. कई बार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनी लेकिन फैसला नहीं हो सका. हालांकि, अदालत ने कह दिया है कि सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करनी होगी. वहीं, अयोध्या को लेकर बीते तीन दशक की राजनीति ने देश का मिजाज बदला है. अपने हर चुनावी घोषणापत्र में राम मंदिर को आस्था का मसला बताकर बीजेपी ने राम मंदिर का वादा किया है. इसीलिए अब जब कोर्ट लगभग मन बना चुका है तो अयोध्या का केस राजनीति की नई तस्वीर सामने रखेगा. लेकिन दंगल में हमारा सवाल होगा कि अयोध्या पर क्या होगा? रामचरित मानस की चौपाई है - होइहै वही जो राम रचि राखा. इसलिए हम भी पूछ रहे हैं कि क्या वही होगा जो राम ने तय कर रखा है?