आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर देश अमृत महोत्सव मना रहा है. ऐसा ही एक कार्यक्रम आज दिल्ली में भी था. केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने ऐतिहासिक लाल किले से विजय चौक तक तिरंगा यात्रा का आयोजन किया था. इसमें उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि थे. देश के हर दल के सांसदों, नेताओं को इस यात्रा में शामिल होना था लेकिन विपक्षी दलों का कोई सांसद इस तिरंगा यात्रा में शामिल नहीं हुआ. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकारी कार्यक्रम की आड़ में अपनी पार्टी का एजेंडा चलाती है. समाजवादी पार्टी ने कहा कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया था. समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने तो ये भी कह दिया कि वो हर घर तिरंगा फहराना ज़रूरी नहीं समझते. उधर महबूबा मुफ्ती ने अपने ट्विटर हैंडल पर तिरंगे के साथ जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा लगाया है. मतलब ये कि आजादी के 75वें वर्ष के उत्सव पर तिरंगे को लेकर राजनीति के अखाड़े में दंगल शुरू हो चुका है. हर राजनीतिक दल के लिए देशभक्ति की अपनी परिभाषा है. तिरंगे के सम्मान का अलग-अलग तरीका बताया जा रहा है. ऐसे में देश के सामने कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या राष्ट्र ध्वज के नाम पर राजनीतिक एजेंडा चलाना सही है? देखें दंगल.
The Culture Ministry organised a 'Tiranga bike rally' from the Red Fort to Parliament for the MPs of all parties on Wednesday. Meanwhile only BJP has joined this rally. Watch this video to know what experts have to say on this.